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You blady baby elephant

एक खूबसूरत हवेली ,

जहां एक औरत अपने साथ एक नाजुक ओर बेहद ही खूबसूरत लड़की को आप साथ ले जाते हुए हस कर कह रही थी

मुझे बहुत अच्छे से मालूम है… अगर जियान तुम्हें परेशान करेगा या कुछ भी करने की कोशिश करेगा, तो तुम उसे छोड़ोगी नहीं। जिस तरीके से तुम दोनों की लड़ाइयां होती हैं ना… खुदा बचाए, पता नहीं अब क्या होने वाला है।”

यह कहते हुए उन्होंने उस नाजुक जान को शांत करवाया।

इबादत उनकी बात पर नाक सिकोड़ते हुए बोली

“यह बात तो आपने सही कही… मैं भी उसे छोड़ूंगी नहीं।”

इतना कहकर वह आराम से वहां बैठ गई। उसे रिलैक्स होता देख, जीनत बेगम वहां से चली गईं।

दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ से, इबादत की सांसें थम-सी गईं। वह इधर-उधर कमरे को देखने लगी।

इस कमरे से उसका बहुत पुराना रिश्ता था। बचपन से लेकर आज तक उसने इस कमरे से न जाने कितनी चीजें चुरा कर ले गई थी।

कितनी बार जियान को सोते हुए देखकर, उसके मुंह में बर्फ से भी ज्यादा ठंडा पानी डालकर जगा देती थी। उसकी शैतानियां इतनी बढ़ गई थीं कि उसने जियान के शैंपू में कलर मिला दिया था, जिससे उसके बाल तक रंग गए थे।

उसके बाद, जियान से बचने के लिए उसे अपनी फूफी के घर जाकर कुछ महीने रुकना पड़ा था।भाई जियान भी कहां कुछ कसर छोड़ते थे उसे परेशान करने के लिए। उसके आने के साथ ही उसकी चोटी काट दी थी।

जब इबादत उठकर अपने बालों को देखकर रो रही थी, तो जियान कह रहा था

“हमें पता नहीं… क्या पता किसने इस पर काला जादू कर दिया है। मुझे तो डर लग रहा है। इसे घर से बाहर निकाल देते हैं। हम पर भी इसका टोटका न हो जाए।”

वैसे भी, फूफी तो जादू-टोना करते हैं। उन्होंने ही इसे कुछ करके भेजा है। या फिर चोटी काटने वाली हवा चली है, इसलिए इसकी चोटी कट गई।

इबादत को अपने बालों से बहुत प्यार था। यह बात पूरी हवेली वाले जानते थे। और उसी का बदला लेने के लिए, जियान ने उसकी चोटी उड़ा दी थी।

वह दोनों हमउम्र नहीं थे। जियान उससे पूरे 8 साल बड़ा था और इबादत उससे 8 साल छोटी। पर उनकी लड़ाइयां ऐसी होती थीं जैसे दोनों बराबरी के हों।

पूरी हवेली वाले उन दोनों से परेशान थे। लेकिन जियान की एक आदत थी… वह किसी लड़की की तरफ नजर उठाकर देखता तक नहीं था।

इबादत को वह बेबी एलीफेंट कहकर नफरत जताता था, उस पर गुस्सा करता था, और एक लम्हे भी प्यार से बात नहीं करता था। हर वक्त एक-दूसरे को परेशान करते रहते थे।

पर न जाने क्यों, फिर भी वह उससे बातें करता था। वरना तो किसी भी लड़की की तरफ देखता तक नहीं था।इबादत यही सब सोच रही थी कि तभी उसे एहसास हुआ

“यार, अब तो वह मेरा शौहर बन गया न! अब उसे मारूंगी तो अच्छा… थोड़ी नहीं लगेगा । हां, तो मुझे परेशान करेगा तो मैं भी मार सकती हूं। बढ़िया है!”

यह कहते हुए उसने अपने ही सर पर हल्के से मारते हुए खुद से हंसकर कहा और वापस वहीं बैठ गई।

कुछ देर बाद उसे ऐसा लगा जैसे दरवाज़ा किसी ने धीरे से खोला हो।

धीरे से घूंघट के अंदर से नज़र उठाकर देखा तो सामने लंबी चौड़ी डार्क पर्सनेलिटी अंदर दाखिल हुए इस वक्त उस सख्श की आंखें सुर्ख थी चेहरे पर गुस्सा उतरा हुआ था । ओर उसका ओर तो कैसे धीरे धीरे थंडरहॉटा जा रहा ही वो जियान था जियान खड़ा था।

वह अंदर आया और दरवाज़े को तुरंत अंदर से कुंडी लगाकर बंद कर दिया।

इबादत ने उसे देखते हुए अपनी आंखें जरा छोटी कर लीं।

जियान पूरी तरह अंदर आया। उसने अपने कुर्ते के ऊपर पहनी हुई सदरी को बड़ी बेदर्दी से उठाकर ज़मीन पर पटका।

उसके कुर्ते की स्लीव कोहनी तक मोड़ी हुई थी। उसके सफेद गोरे हाथ पर विनाश दिखाई दे रहे थे, और आंखें ग़ुस्से से लाल हो रही थीं।

वह इबादत के पास आया और उसके बाजू पकड़कर उसे एकदम से खींचकर खड़ा कर दिया।

चिल्लाते हुए बोला

मैंने तुमसे कहा था न, मना कर दूं! तुम्हें मेरी बात समझ में नहीं आती?

क्या तुम्हें लगा कि मैं तुमसे निकाह कर लूंगा और कुछ कहूंगा भी नहीं?”

उसने और ग़ुस्से से कहा

“क्या तुम्हें पता नहीं है कि तुम्हारे जैसे बदसूरत शक्लों सूरत और हाथी जैसे शरीर वाली लड़की के क़रीब कोई लड़का नहीं आ सकता?

इसलिए तुमने सोचा कि कोई बात नहीं, घर का ही है… फंसा लेती हूं।

अपनी इन्हीं चिकनी-चुपड़ी बातों में मेरी अम्मी-अब्बा को फंसाया है न तुमने!”

यह कहते हुए उसने बड़ी तेजी से इबादत को ज़ोर का धक्का दे दिया।इबादत ज़मीन पर गिर गई थी।

वह एक लम्हे के लिए संभल ही नहीं पाई, न ही समझ पाई कि आखिर हुआ क्या।

उसने सर घुमा कर जियान को देखा।

जियान अगले ही पल उसके चेहरे से घूंघट खींचकर ज़मीन पर फेंक देता है और चिल्लाकर कहता है

“आईने में अपनी शक्ल देखी है तुमने? इतनी बदसूरत होगी कि कोई तुम्हारे क़रीब भी नहीं आएगा!

और अपना वज़न देखा है? खा-खा कर बस मोटी होती जा रही हो।

कुछ वक़्त के बाद तो तुम्हारे लिए कोई ड्रेस भी नहीं मिलेगी।

तुम्हारे लिए तो तान से कपड़ा लेकर बनवाना पड़ेगा।

एलीफ़ेंट जैसी लगती हो तुम!

कितनी बार बोला था न… इनकार कर दो! क्यों नहीं किया इनकार?”

यह कहते हुए उसने इबादत के मोटे-मोटे, फूले हुए गालों को ज़ोर से दबा दिया।

इबादत दर्द से तड़प गई।

उसने तुरंत उसके हाथ पर अपना हाथ रखकर उसे दूर धकेला और गुस्से से बोली

“पागल हो गए हो क्या?

आपका दिमाग़ खराब हो गया है?

यह कैसी बकवास कर रहे हो?”

वह रोती हुई लेकिन ठोस आवाज़ में बोली

“मैंने भी तो कहा था न कि आप निकाह से इनकार कर दो।

क्यों नहीं किया इनकार?

मुझे कोई शौक़ नहीं है आप जैसे इंसान से निकाह करने का, जिसे खुद अपने आप के सिवा कोई पसंद न हो।”

फिर आंसू पोंछते हुए बोली

“आप भी निकाह नहीं करना चाहते थे

तो फिर खुद क्यों नहीं किया इनकार?

क्या तुम्हें पता नहीं था कि मैं मना नही कर सकता हूं?

या तुम्हें लगता है कि मेरी अम्मी-अब्बा नहीं हैं…

जो मैं इनकार करती तो उन्हें कोई तकलीफ़ नहीं होती?”

जियान, जो उसके जबड़े को मज़बूती से थामे हुए था,

उसे बाजू पकड़कर खड़ा करता है और फिर धक्का देकर बैठा देता है।

वह गुस्से से झुकते हुए कहता है

“जितनी ज़बान चल रही हो न…

अगर दिमाग़ भी इतना चलता तो शायद कुछ बन जाता हमारा!

पर नहीं… तुम्हें तो साफ़-साफ़ कहना था कि तुम्हें कबूल है।

जब तुमने मुझे ‘ना’ कहा… तो अब सुन लो!

आज मैं निकाह की वो सुन्नत भी पूरी कर दूँगा।

तुम्हें पूरी तरह अपना बना लूँगा।”

यह कहकर उसने अपना कुर्ता झटककर फेंक दिया।

इबादत की तो जैसे सांस ही थम गई।

वह उसे घूरते हुए, कांपते होंठों से चिल्लाई

“ख़बरदार!

अगर मेरे क़रीब आने की भी कोशिश की…

तो जान ले लूँगी मैं तुम्हारी!”

उसकी आंखों में आंसुओं के साथ आग जल रही थी।

दोनों की आंखों में नफ़रत थी, और दोनों के ही चेहरे गुस्से से लाल हो चुके थे।

लेकिन जियान कहां पीछे हटने वाला था।

वह तुरंत उसके और करीब आया,

उसके दोनों बाजू पकड़कर उसे ज़बरदस्ती बेड पर धकेलते हुए बोला

“क्यों? क्या हो गया?

डर लग रहा है क्या तुम्हें?

क्या तुमने ये सोचा था…

कि निकाह करके मेरे कमरे में आओगी, और मैं तुम्हें यूं ही रहने दूँगा?

इतना अच्छा इंसान नहीं हूँ मैं!

मैं ज़िंदगी अपने उसूलों पर जीता हूँ,

अपने इरादों को मज़बूत रखता हूँ,

और अपने हौसलों पर चलता हूँ।

मुझे किसी की ग़ुलामी करना पसंद नहीं है।

और तुम… तुम खुद को समझती क्या हो?”सत्तर किलो की एक मोटी, भैंस जैसी शक्ल वाली लड़की…

तुम्हारे साथ खड़े होने में भी मुझे शर्म आएगी!”

जियान ज़हर उगलते हुए बोला

“लोग क्या कहेंगे मुझे?

कि मेरे जैसा हैंडसम, हांक लड़का…

जिसे कोई भी लड़की मिल सकती थी,

उसने तुमसे निकाह करके तुम पर एहसान कर दिया है!”

इबादत एकदम खामोश हो गई।

वह खुद को देखने लगी।

हाँ, वह बाकी लड़कियों की तरह पतली-दुबली नहीं थी,

वह मोटी थी…

लेकिन इतनी भी नहीं, जितना जियान उसे ताने मारकर बता रहा था।

असल में वह सिर्फ पैंसठ किलो की थी।

पर हाँ, उस वज़न में भी वह थोड़ी भारी लगती थी।

उसके मोटे-मोटे, गोल-गोल भरे हुए गाल

चेहरे पर अजीब-सी प्यारी सी मासूमियत देते थे।

गाल भरे होने की वजह से उसकी नाक और होंठ

बहुत छोटे-छोटे से नज़र आते थे।

लेकिन उसकी बड़ी-बड़ी आंखें

और भी ज़्यादा खूबसूरत लगती थीं।

उसका मोटापा बाकी लड़कियों की तरह भद्दा नहीं था।

बल्कि वह अपने ढंग से एक प्यारी-सी डॉल लगती थी।

उसके हाथ मोटे-मोटे थे,

जिनमें चूड़ियां फंसी हुई चमक रही थीं।

जियान ने उन हाथों को देखा।

अगले ही पल उसने उन्हें अपने हाथ में कसकर जकड़ लिया,

और फिर बेदर्दी से बेड पर पटकते हुए बोला

“ये लड़कियों के हाथ खूबसूरत होते हैं!

और तुम्हारे हाथ… ऐसा लगता है

जैसे किसी गोरिल्ला का हाथ पकड़ लिया हो।”

यह कहकर उसने उसका हाथ इतनी तेज़ी से झटका

कि उसकी चूड़ियां टूटकर बुरी तरह उसकी कलाई में धंस गईं।

इबादत दर्द से चीख उठी।इबादत की आंखों में आंसू आ गए थे।

वह लगभग रोते हुए, अपनी पूरी ताक़त से जियान को दूर धकेलने लगी।

लेकिन जितनी भी कोशिश करती,

जियान तो जैसे एक बॉडीबिल्डर था।

वह पूरी तरह से उस पर झुका हुआ था।

उसने इबादत के दोनों हाथ पकड़कर बेड के सिरहाने पर जकड़ दिए।

जियान ताना मारते हुए बोला

“क्या हुआ? अभी तो मैंने शुरू भी नहीं किया…

और तुम रोने लगीं?

अभी तो मैं तुम्हें उस दर्द से गुजारूँगा…

जिसके बाद तुम ठीक से चल भी नहीं पाओगी।

बहुत शौक था ना निकाह करने का?

तो अब पता चलेगा कि निकाह के बाद

मियां-बीवी के बीच क्या-क्या होता है!

चलो… आज तुम मुझे मेरा ‘शौहर’ होने का हक दो।”

यह कहकर उसने उसके मोटे, गोल-मटोल से पेट पर हाथ रखा।

उसकी हरकत पर इबादत बुरी तरह चीख उठी।

जियान जैसे ही उसका कुर्ता ऊपर करने लगा,

उससे पहले ही इबादत ने पूरी ताक़त लगाकर उसे दूर धकेल दिया।

जिया सीधा बेड से नीचे ज़मीन पर गिरा।

गिरते ही उसकी कमर में तेज़ दर्द उठा।

वह गुस्से से दहाड़ा

“You bloody Baby elephant!

तुम्हारी इतनी हिम्मत कि मुझे ज़मीन पर गिरा दिया?

अब मैं तुम्हें दिखाता हूँ…!” कहते हुए वो दाढ़ का उठा था ।

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