03

Baby elephant

जियान पूरे बेड पर फैलते हुए बोला

“यह तुम्हारी जगह नहीं है समझी?जाकर सोफे पर लेटो।”

इबादत उसकी तरफ देखते हुए नाक सिकोड़कर बोली

“दिमाग़ ख़राब हो गया है क्या आपका बिल्कुल?

मैं सोफे पर क्यों लेटूँगी?

जितना इस कमरे पर हक़ आपका है,

उतना ही मेरा भी है।”

जियान ताना मारते हुए हंसा और बोला

“किस बात की हक़ की बात कर रही हो बेबी?

मैंने तुमसे निकाह मजबूरी में किया था…

ताकि मेरे रास्ते,

मेरे सपनों के बीच कोई ना आए।

और तुम इस निकाह को हक़ीक़त मान रही हो?

ख़्वाबों की दुनिया से बाहर आओ।

तुम जैसी बेबी एलिफ़ेंट के लिए

कभी शहज़ादे नहीं होते।”

इबादत ने उसकी ओर गुस्से से देखा।

फिर उसी लहज़े में सख़्ती से बोली

“और अगर शहज़ादा आप जैसा होना…

तो इससे बेहतर मैं शैतान से निकाह करना पसंद करूंगी।”

जियान का चेहरा लाल हो गया।

वह झल्लाते हुए चिल्लाया

“बहुत ज़्यादा ज़बान चल रही है न तुम्हारी?

अभी खींचकर तुम्हारी ज़बान काट दूँगा!”

यह कहकर वह फिर से बेड से उठ खड़ा हुआ।

इबादत उसके इस रिएक्शन पर गहरी सांस लेकर खुद को शांत करने लगी।

उसने खुद को किसी तरह संभाल लिया था।

उसकी आंखें नम थीं।

वह जियान से नजरें नहीं मिला पा रही थी।

धीरे से बोली

“मेरा सर दुख रहा है…”

जियान उसकी ओर देखते हुए तंज कसकर बोला

“तो तुम क्या चाहती हो?

लड़के लड़कियों के नखरे उठाते हैं…

तो क्या मैं भी तुम्हारे नखरे उठाऊँ?

तुम्हारा सर दबाऊँ?

या फिर तुम्हारे लिए डांस करूँ?

बताओ, क्या चाहती हो तुम?”

इबादत ने रुखाई से जवाब दिया

“खुदा के लिए अपनी ज़ुबान की शटर को बंद कर लीजिए।

मेरे लिए इतना ही बहुत है।

मुझे उम्मीद नहीं है कि आप मेरे नाज़-नखरे उठा सकते हैं।”

जियान ने ठंडी हंसी छोड़ी और बोला

“मैं तुम्हें नखरे उठाऊँ?

तुम्हारे नाज़-नखरों की बात कर रही हो?

जितना तुम्हारा वज़न है न,

उससे कई गुना ज़्यादा वज़न तुम्हारे नखरों का है।

बहुत अच्छे से जानता हूँ मैं।

और हां,

अब तुम्हारे मुंह से एक भी आवाज़ नहीं निकलनी चाहिए।

कल मेरी फ्लाइट है।

वक्त से उठा देना।”

यह कहकर उसने अपने मुंह पर तकिया रख लिया।

हाथ बढ़ाकर बेड के साइड की लाइट भी बंद कर दी।

इबादत कुछ देर उसे देखती रही।

फिर चुपचाप जाकर सोफे पर लेट गई।

उसकी आंखों में नींद नहीं थी।

पलकों ने पल भर के लिए भी साथ नहीं दिया।

वह बस बालकनी की ओर देख रही थी,

जहां एक खूबसूरत सा चांद निकला हुआ था।

वह खामोश थी।

उसकी आंखों से हल्के-हल्के आंसू गिर रहे थे।

वह अपने आंसुओं को पोंछते हुए खुद से बोली

“इतनी तकलीफ क्यों हो रही है मुझे?

मैं तो खुद ही इस निकाह के लिए राज़ी नहीं थी।

वह तो हमेशा मुझे ऐसे ही अल्फ़ाज़ बोलते रहे हैं।

तो आज… आज इतनी तकलीफ क्यों हो रही है?”

उसने अपना हाथ सीने पर रख लिया।

तकलीफ बहुत थी… इतनी कि बयान नहीं कर पा रही थी।

पर क्यों?

इसका जवाब उसे नहीं मिल रहा था।

वह गहरी सांस ले रही थी।

कमरे में उसकी सांसों का शोर गूंज रहा था।

तभी उसके कानों में जियान की आवाज़ पड़ी

“तुम अपनी सांस रोक सकती हो?

तुम मुझे डिस्टर्ब कर रही हो।”

इबादत उसकी तरफ देखते हुए बिखर गई।

फीकी मुस्कान के साथ बोली

“ऐसा कह दो न सीधा-सीधा…

कि मैं मर ही जाऊं।

तुम्हें तो छुटकारा चाहिए न मुझसे?

मिल जाएगा तुम्हें।

शायद… इसी वजह से मुझे तकलीफ हो रही है।

जब से निकाह हुआ है…

मैं देख रही हूं,

कैसे इस रिश्ते से तोड़ने के लिए बेचैन हो।”

इतना कहते ही,

जियान अचानक गुस्से से बिस्तर से उठ बैठा।

उसकी आंखें गहरी हो गईं।

वह इबादत को घूरने लगा।

इबादत ने नजरें नहीं उठाईं।

वह उसे देखना नहीं चाह रही थी।

जियान ने धीमे, पर खतरनाक लहजे में कहा

“और तुम्हें पता भी है…

कटने का मतलब क्या होता है?

अगर तुम्हें नहीं पता…

तो मैं अच्छे से बता सकता हूं।

तुम्हारे दिल में अरमान उमड़ रहे होंगे,

ना मेरे करीब आने के लिए…

मेरी क़ुरबत के लिए।”तभी तुम ऐसे अल्फाज़ों का इस्तेमाल कर रहे हो। पर ध्यान रखना, जीते-जी क्या मरने के बाद भी तुम जियान जुबेर अख्तर की क़ुरबत के लिए तरसते रहोगे।

पर में , तुम्हारे क़रीब कभी नहीं आऊँगा । अपने इन ख़्वाबों को अपने ही दिल में दफ़न कर लो। जियान जुबेर अख्तर कभी भी तुम जैसी शक्ल वाली लड़की को अपना नहीं बनाएगा। गॉट इट?

दोबारा मेरे सामने ऐसे अल्फाजों का इस्तेमाल किया तो, तुम्हारी ज़ुबान खींचकर यही अपने हाथ की ब्रेसलेट बना लूँगा। फिर बस, गूंगी बनकर रहना elephant कहीं की!

यह बोलते हुए वह वापस लेट चुका था। इबादत अपनी आँखें बंद कर चुकी थी । उसने कुछ भी नहीं कहा। उसका बिल्कुल भी मन नहीं था कि उसे जवाब दे।

वह जानती थी, जितना वह जवाब देगी, आगे से जियान उससे भी ज़्यादा कठोर अल्फ़ाज़ उसके लिए इस्तेमाल करेगा।

धीरे से वह बड़बड़ाई

“बेटा, जितनी जवान चल रही है न तुम्हारी, एक बार मेरा हाथ उठ गया तो, तुम खुद ही दुनिया से उड़ जाओगे। बड़े आए hmmm भले ही मुझे बेवाह होकर सफ़ेद कपड़े पहनाने ही कई न ओढ़े लेकिन तुम्हारी ज़िंदगी मैं भी जहन्नम बना दूँगी।

मेरा नाम भी इबादत ज़ाकिर अख्तर नहीं रहेगा। बड़े आए! इन्हें देखकर तो सिर्फ़ एक ही कहावत याद आती है

नाम बड़े और दर्शन छोटे!”इसी तरीक़े से रात निकल जाती है। इबादत गहरी नींद में सो रही थी

कुछ ही देर तेज़ी से अलार्म बजने की आवाज़ आई।

सुबह की सुनहरी किरणे हवा की ताजगी के साथ धीरे धीरे कमरे में दाखिल हो रही थी “तुम्हें पता है न, मुझे नींद में डिस्टर्बेंस बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है।”

जियान एकदम सख़्त उठ कर बैठ गया और इबादत की तरफ़ देखने लगा, जो बहुत ही बेफ़िक्री से सो रही थी। नींद की वजह से उसका कुर्ता थोड़ा नीचे की तरफ़ खिसक गया था। पेट हल्का सा दिखाई दे रहा था। उसके बाल बिखरकर चेहरे पर आ रहे थे।

बालकनी से आती हुई हल्की-हल्की हवाएं उसके रुख़सार को चूमते हुए निकल रही थीं। वह सुबह बहुत प्यारी लग रही थी ।

ऐसा नहीं था कि वह मोटी थी। उसका वज़न उसके हिसाब से बिल्कुल सही था। बस फ़र्क इतना था कि वह मानती थी

जिसका वज़न जितना ज़्यादा होता है, उसका दिल भी उतना ही बड़ा होता है। और जो जितने कमज़ोर और पतले-दुबले होते हैं, उनका दिल भी उतना ही छोटा होता है।

जब भी कोई उसे ‘मोटी’ कहता, कि वह ‘बस फट जाएगी’, कम खाए, एक्सरसाइज़ करे, जिम जॉइन करे तो वह यही कहती थी

“पहले अपने दिल को बड़ा करने के लिए जिम जॉइन करो!”

पर आज, एक लम्हे के लिए जियान की नज़र उस पर रुक गई थी। वह तो जैसे खो गया था उसके रुख़सार पर।

वह सच में इबादत थी। बिल्कुल अपने नाम की तरह। लोग उसे दुआ में मांगते होंगे।

यह ख़याल जैसे ही जियान के दिमाग़ में आया, उसने तुरंत अपने गाल पर थप्पड़ मारा और बोला

“वादा है, मैं इसके बारे में सीरियसली सोचूँगा।”

फिर खुद ही चिढ़ते हुए, अपनी जगह से उठा और उसके क़रीब कदम बढ़ा दिए।

इबादत गहरी नींद में सो रही थी। उसे ख़्याल तक नहीं था कि वह सोते-सोते किनारे पर आ चुकी थी। जियान उसे देखकर सोचने लगा“ये कब तक ऐसे सोती रहेगी…”

वह फिर से सोफ़े पर गिरा, और हाथ भी फैल गए। फिर वह धीरे-धीरे उसके पास आया और हल्के से उसे हिलाते हुए बोला

“लिटिल एलीफ़ेंट… सुनो, लिटिल एलीफ़ेंट… तुम्हें सुनाई नहीं दे रहा है क्या?”

उसने बहुत धीरे से पुकारा था। यह चीज़ इबादत के लिए वैसी थी जैसे नींद में किसी मक्खी ने कान के पास भिनभिनाया हो। उसने नींद में ही उसका हाथ बुरी तरह से झटक दिया।

जियान अपने हाथ को देख रहा था। उसकी जबड़े कस गए।

“यह लड़की नींद में भी सिर्फ मुझे ही झटकने के बारे में सोचती है। ना जाने क्या मिलाकर इसने मेरी अम्मी-अब्बा को खिला दिया है जो यह लोग इसके ही गुण गाते रहते हैं। आई स्वेयर, अगर तुम मेरे चाचा की बेटी ना होती, तो कब का मैं तुम्हें इसी पंखे से बांधकर लटका देता। पर अफ़सोस… तुम्हें कुछ नहीं होता, यह पंखा ही सुसाइड कर लेता!”

यह कहते हुए वह एक बार फिर से उसका हाथ पकड़ने बढ़ा और धीरे से खुद से बोला

“इस लड़की को बिल्कुल भी तमीज़ नहीं है। किस तरीक़े से सो रही है, । क्या इसे नहीं पता कि एक जवान लड़का भी इसी कमरे में रहता है? अगर कोई कुछ कर दे तो… बेटा, अगर तुम मेरे घर की इज़्ज़त ना होतीं, तो मैं तुम्हें अच्छे से सबक सिखाता।”

बोलते-बोलते उसकी नज़र अचानक इबादत के गोल-मटोल पेट पर जा ठहरी।

वह बिल्कुल सफ़ेद आटे की तरह नर्म और मासूम लग रहा था। उसका नाज़ुक सा पेट उसे कुछ देर तक बाँध सा गया।

जियान धीरे से उसके कुर्ते का किनारा पकड़ता है और नीचे करके उसके गोलू-मोलू पेट को ढक देता है।

इस बीच, उसकी उंगलियाँ इबादत के पेट को हल्का-सा छू गईं। इबादत तो नींद में थी, उसे किसी चीज़ का ख़याल नहीं था। पर जियान की उंगलियाँ एकदम से कस गईं।

उसे अपने शरीर में तेज़ करंट सा एहसास हुआ। वह तुरंत पीछे हट गया और उसे घूरने लगा।

इबादत तो बिल्कुल एक प्यारी-सी स्नो वाइट की तरह सुकून भरी नींद में थी। पर जियान की नींद, उसे इस तरीक़े से सोता हुआ देख, पूरी तरह खराब हो चुकी थी।

वह चिढ़ते हुए बोला

“ये लड़की ना… सुबह ही नहीं,होती पता नहीं। सबसे पहले इसे निपटाना है।”

यह कहते हुए वह सीधे वॉशरूम के अंदर चला गया।

कुछ देर बाद वह ब्लैक कलर की फ़ॉर्मल पैंट और वाइट शर्ट पहनकर बाहर आया। उसने देखा, इबादत उठ चुकी थी।

उसके बिखरे हुए बाल, छोटी-छोटी आँखें, और गोलू-मोलू से हाथ, जिनसे वह आँखें मल रही थी नींद का आलम जैसे उसके पूरे सर पर सवार था।

उसे ऐसे जागा हुआ देखकर, जियान एक नज़र डाली और बिना कुछ कहे सीधे कमरे से बाहर निकल गया।

उसके जाते ही, इबादत जो अभी तक सब कुछ नींद में खो चुकी थी, धीरे-धीरे रेंगते हुए कमरे से बाहर निकल आई।

वह एकदम लेज़ी टर्टल की तरह चल रही थी। कभी रेलिंग पकड़ती, कभी दरवाज़ा धीरे-धीरे खोलती। बहुत ही बेपरवाही के अंदाज़ में वह अपने कमरे से नीचे आ चुकी थी।

इस वक़्त लिविंग हॉल में सब मौजूद थे। जियान भी अभी-अभी किचन से बाहर निकला था। उसकी नज़र इबादत पर रुकी और उसके दाँत कस गए।

“ये लड़की…” उसने बस यही अल्फ़ाज़ निकाले।

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