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Tini handes

जिहान का दिल एक पल के लिए ठहर सा गया।

इबादत को इस तरह तैयार देख, वह कुछ पल तक बस निहारता ही रह गया। उसकी सास जैसे उसे बगावत पर उतर आए थी ।

वह शायद पहली दफा इस तरह तैयार होती दिखीं।

बहुत ही बेहतर लग रही थीं।

जीहां उसी वक़्त कोई अंदर आता है।

उसके अंदर आते ही दरवाज़े दोनों ओर से खुल गए।

वह वैसे ही बेड पर बैठते हुए बोला

"तुम्हें अक़्ल नहीं आएगी ना! मैंने कितनी दफ़ा कहा है कि जब कमरे में अकेली रहती हो तो दरवाज़े को अंदर से लॉक कर लिया करो। तुम्हें मेरी बात बिल्कुल भी समझ में नहीं आती, है ना? और यह इतना सज-धज कर क्या कर रही हो? कहाँ जाने की तैयारी है? मुझे तो पता है… मेरे जाने के बाद तो तुम्हें घूमने का मौक़ा मिल जाएगा। है ना? मेरी बंदिशों की वजह से ही तो घर पर रहना पड़ता था तुम्हें।"

वह उसकी तरफ पलटकर देखती हैं।

अपनी आँखें थोड़ी छोटी करके, हल्का-सा पाउट बनाते हुए बोलीं

"यह सब… यह सब मैं आपके लिए ही तो कर रही हूँ। देखिए, आपको पसंद आया? यह मेरा नया लुक है। इतने भारी कपड़े, मेरे कानों की इयररिंग्स… अच्छी लग रही हैं न?"

यह कहते हुए उसने अपने बाल एक साइड कर लिए।

गले में खूबसूरत, पतली-सी चैन पड़ी थी, जिसमें एक सिंपल सा पेंडेंट झूल रहा था।

उसे वैसे भी ज़्यादा ज्वेलरी का शौक नहीं था।

मेकअप के नाम पर भी उसने बस ग्लॉस और काजल लगाया हुआ था।

जिहां मुस्कुराते हुए बोला

"तो तुम ये सब मुझे दिखाने के लिए पहना है । तो मत पहनो ? अलग करो। ये सब

इबादत टपक से उसकी बात बीच में कट के बोली गलत फहमी हे आप की ,

यह सब इसलिए पहनकर तैयार हुई हो ताकि आगे से जब आप मेरे सामने आओ, तो आप भी इसी तरीके से तैयार होकर आओ… ना कि बदसूरत गधे जैसी शक्ल लेकर। अगर ऐसे आए तो सीधा… खुला ले लूगी ! गॉट इट?"

इतना कहते हुए वह अपने बालों को झटकते हुए कमरे से बाहर निकल गई। jihaan उसे घूरते हुए खुद से कहता

"इस लड़की के तो बस… बेटा, एक बार मुझे वापस आने दो। तब तुम बीस की हो जाओगी। फिर मैं तुम्हें बताऊँगा। जितना तुम मेरे साथ अभी हरकतें कर रही हो ना… तब तुम्हें रुलाऊँगा। खून के आँसू रुलाऊँगा। सुना तुमने? मेरा नाम jihaan जुबेर अख़्तर!"नहीं

यह कहते हुए उसने गुस्से में पैर पटके और वहाँ से बाहर निकल गया।

उसी वक्त उसकी नज़र एक मुलाज़िम पर पड़ी।

वह थोड़ा आगे ही खड़ा हुए इबादत को देख रहा था।

Jihaan गुस्से से उसके पास आया और तेज़ आवाज़ में बोला

"नज़र कहाँ है तुम्हारी? नज़र सिर्फ काम पर होनी चाहिए! और तुम्हें यहाँ ऊपर आने के लिए किसने कहा था?"

वह मुलाज़िम, जो अभी इबादत को देख रहा था, jihaan की बात सुनकर एकदम से हड़बड़ा गया।

नज़रें झुकाते हुए जल्दी-जल्दी बोला

"माफ़ी… माफ़ी! मैं… मैं आपको ही बुलाने आया था। यहाँ की सफ़ाई कर रहा था। काफ़ी गंदा हो गया था न, इसलिए बस… और कुछ नहीं।"

इतना कहकर वह नज़रें चुराने लगा।

Jihaan ने उसे गुस्से से देखा और सीधा डाँटते हुए, लेकिन सख़्त आवाज़ में जीनत बेगम की ओर मुड़कर बोला

"कोई भी मुलाज़िम ऊपर के फ़्लोर पर नहीं जाएगा। यह मेरी सख़्त हिदायत है।

और अगर आप लोगों ने नहीं मानी… तो देख लीजिएगा। मैं ऐसे मुलाज़िमों को घर से बाहर निकाल दूँगा।

सारा स्टाफ सिर्फ़ हवेली के काम के लिए है। औरतों के लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ औरतें ही बुलाई जाएँगी।"जीनत बेगम परेशानी से बोलीं

"यह तुम क्या कह रहे हो? तुम्हारा दिमाग तो ठीक है न? और अभी अचानक से तुम्हारे दिमाग में यह स्टाफ निकालने की बात कहाँ से आ गई? Jihaan bina kisi expression ke bola घर में औरतें रहती हैं और आपने स्टाफ में मर्द रखे हुए हैं। कल को कुछ हो गया तो ज़िम्मेदार कौन होगा?"

जीनत बेगम को उसकी इस बात पर बड़ा प्यार आया।

वह मुस्कुराते हुए उसे देखने लगीं और बोलीं

"सीधा-सीधा बोलो ना कि तुम्हें जाते हुए यहाँ पर इबादत की फ़िक्र सता रही है। यह सारे बहाने क्यों बना रहे हो?"

Jihaan उनकी आँखों में सीधा देखते हुए दो-टूक जवाब देता है

"क्योंकि वह बेवकूफ़ है! मैंने उसे हज़ार बार कहा है कि दरवाज़ा अंदर से लॉक रखा करे जब अकेली रही करती है। पर उसे मेरी बात समझ में ही नहीं आती। ऐसे ही बेवकूफ़ी करती रहती है। दरवाज़ा खोलकर रखती है हमेशा। और आपको पता है… वह मेरे घर की इज़्ज़त है। और मैं अपनी इज़्ज़त पर दाग़ बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर सकता। उसे समझाइए!"

इतना कहते हुए उसकी नज़र उस मुलाज़िम पर गई, जो अभी भी हड़बड़ाए अंदाज़ में जल्दी-जल्दी काम कर रहा था।

उसके माथे से पसीना टपक रहा था।

जीनत बेगम उसकी बात पर मुस्कुराईं।

फिर उसे हिदायत देते हुए बोलीं

"तुम्हें इतना परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। सभी लोग हमारे अपने हैं। भरोसेमंद लोग यहाँ पर काम करते हैं। और हाँ… वहाँ पहुँचने के बाद इबादत के पास कॉल और मैसेज करके उससे बात करते रहना। अभी तुम दोनों का रिश्ता नया नया है। और इस उम्र में अगर यह सब नहीं करोगे… तो कब करोगे?"जिहान ने उन्हें आँखें गोल कर देखा और सारा माहौल इग्नोर करते हुए बोला

"अच्छा, मैं चलता हूँ। मेरी फ्लाइट का टाइम हो गया है।"

इतना कहकर वह सीधा बाहर निकल आया।

तभी उसकी नज़र इबादत पर पड़ी।

वह झूले पर बैठी आराम से फोन कान पर लगाए हुई कह रही थीं

"हाँ-हाँ, मैं तो बस आज ही बड़े अब्बा के साथ निकल रही हूँ एडमिशन के लिए। पता है, मैं तो बहुत एक्साइटेड हूँ। कितना मज़ा आएगा कॉलेज में न कोई रोकने वाला, न कोई टोकने वाला। और हम जो चाहें, जैसा चाहें… वैसा कर सकते हैं। ऊपर से हम क्लासेस भी बंक करेंगे। फाइनली आज़ादी मिल गई उन चोटियों से और उस स्कूल यूनिफॉर्म से!"

वह बेहद एक्साइटेड लग रही थीं।

जिहान, जो अभी बाहर निकल ही रहा था, यह सब सुनकर ठिठक गया।

उसकी भौंहें ऊपर की ओर चढ़ गईं और कदम सीधा इबादत की तरफ बढ़ गए।

इबादत अब भी फोन पर मशगूल थीं।

जिहान अचानक आया और झटके से उनके हाथ से फोन छीनकर तुरंत कॉल काट दी।

उसने फोन पर एक नज़र डालने की हिमाकत तक नहीं की।

इबादत उसकी इस हरकत पर गुस्से से लगभग चिल्ला उठीं

"अब आपको क्या मसला हो रहा है? बात कर रही थी ना मैं! आपको हर जगह अपनी ये लंबी टाँगें घुसाना ज़रूरी होता है क्या? फोन दीजिए मेरा!"

वह गुस्से में एकदम से उठकर खड़ी हो गईं।जिहान ने उसका हाथ पकड़ते हुए सख़्त आवाज़ में कहा

"कॉलेज में एडमिशन करवाने जा रही हो ना? तो ज़्यादा उडने की ज़रूरत नहीं है। चुपचाप कॉलेज जाओगी और चुपचाप घर आओगी। ज़्यादा इधर-उधर घूमी तो सोच लेना।"

"और हाँ… यह बात हमेशा अपने जहन में गांठ बाँधकर रखना। मेरी नज़र हर वक़्त तुम पर रहेगी, मिस ज़ाकिर अख़्तर। अगर तुमने कोई भी तमाशा लगाया, या मेरे जाने के बाद कोई ऐसी ज़िद की जो बेमानी है… तो देखना, मैं तुम्हें टकला कर दूँगा!"

इबादत उसकी बात सुनकर गुस्से से भड़क उठीं

"क्या कहा? आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझे टकला करने की? अगर आपने मुझे टकला किया, तो मैं आपकी टाँगे तोड़ दूँगी! बहुत प्यार है ना आपको अपनी इन लंबी टाँगों से?"

"और मेरा फोन दीजिए! आपको इससे क्या? आप होते कौन हैं बात-बात पर मुझ पर हुक्म चलाने वाले? बचपन से देखती आ रही हूँ… अगर आपने अब मुझ पर हुक्म चलाने की कोशिश की, तो आपके ये चार महीने की खूबसूरत ज़िंदगी… मैं इसे ही उजाड़कर रख दूँगी!"

यह कहते हुए वह गुस्से में आग उगलते हुए बोलीं।

उस वक़्त वह किसी छोटे बेबी ड्रैगन की तरह लग रही थीं।

उनकी नाक तुरंत ही लाल पड़ गई थी, और जिस तरीके से वह बोल रही थीं… उसमें बस आग के शोले निकलने की कमी थी।

लेकिन फिर भी, वह बड़ी प्यारी लग रही थीं।Jihaan उसे इस तरह देख, अचानक उसके चेहरे के बिल्कुल करीब झुक गया।

अपना चेहरा उसके पास ले जाते हुए गहरी आवाज़ में बोला

"क्या… रिश्ते की बात कर रही हो ना? अगर मैं तुम्हें रिश्ते के बारे में सच बता दूँ, तो शर्म से डूबने के लिए तैयार हो जाओगी।"

"भूल रही हो कि हमारा निकाह हुआ है। सोचो, जो चीज़ अभी हुई ही नहीं… उसे मैं अभी जाकर कर सकता हूँ। मुझे ज़्यादा वक़्त नहीं लगेगा। मेरे पास अभी भी दो घंटे हैं। और एक घंटे में मैं तुम्हें पूरी तरह से ‘निपटाकर’ फिर आराम से जाऊँगा।"

"पर हाँ… जब तक मैं वहाँ लैंड नहीं हो जाता, तब तक तुम्हारी ये आँखें जो मुझे घूर रही हैं, इनकी नींद पूरी नहीं होगी। और तुम्हारा ये बेबी एलीफ़ेंट जैसा बना हुआ बदन… इसकी थकान भी दूर नहीं होगी। गॉट इट?"

उसकी यह बातें सुनकर इबादत का पूरा चेहरा लाल पड़ गया।

वह बिल्कुल टमाटर की तरह लग रही थीं।

नाक फूलाते हुए, गुस्से से उसे घूर रही थीं।

जिहां ने उनकी हालत देख हल्की-सी मुस्कान दी।

फिर उनका फोन उनके छोटे-से हाथ में रखते हुए बोला

"तुम्हारा फोन, टिनी-हैंड वाली लड़की।"

यह कहते हुए वह स्टाइल से वहाँ से निकल गया।

इबादत वहीं फोन पटकते हुए बड़बड़ा रही थीं।

फिर चिल्लाकर बोलीं

"मुझे बहुत खुशी होगी आपके यहाँ से जाने की! कम से कम अब से हवेली पर सिर्फ़ मेरा ही… मेरा राज चलेगा!"

इतना कहकर वह अंदर की तरफ बढ़ गईं।जिहान जा चुका था।

इबादत अपनी ज़िंदगी में मशगूल थी।

दिन धीरे-धीरे निकल रहे थे।

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