कुछ दूरी पर खड़ी माला, जो अब तक उसे शख़्स को देख रही थी, अपने दोनों हाथ गालों पर रखे हुए ठंडी आहें भरने लगी।
"ओ माय गॉड! जियान जुबैर अख़्तर… हमारे कॉलेज कैंपस में हमें पढ़ाने के लिए आए हैं!
ओ माय गॉड… ऐसा लग रहा है जैसे आज मेरी पूरी ज़िंदगी की दुआएँ क़बूल हो गईं।
इतना हॉट बन्दा हमें बिज़नेस की क्लास पढ़ाएगा!
ओ माय माय… भाई, तुम्हें पता भी है? अगर इसने एक नज़र भी मुझ पर डाल दी, तो मैं तो पूरी ज़िंदगी जी लूँगी इनकी क़ातिल नज़रों पर!""तुम्हें पता है, पिछले दो सालों से उनकी मैगज़ीन बैक-टू-बैक न्यूयॉर्क, अमेरिका और न जाने कितने देशों में छप रही है।
मुझे तो अभी तक सारे देशों के नाम भी याद नहीं हैं।
ऊपर से भाई… एकदम ऊपर से नीचे तक ज़हर लग रहे हैं!
बिल्कुल क़ातिल ज़हर।
लड़कियों को देखा तो सही… कैसे मधुमक्खियों की तरह उनके आसपास भटक रही हैं।
यह है असली हॉटनेस!"
वह जल्दी से बोली
"चल, क्लास में!
हमें आज फ़र्स्ट बेंच पर बैठना होगा, ताकि… ताकि सर की नज़र हम पर पड़े।"
इतना कहकर उसने इबादत की तरफ़ देखा।
लेकिन इबादत का ध्यान तो सिर्फ़ अपने हाथ में पड़े हुए असाइनमेंट पर था।
वह उसे देखकर धीरे से बोली
"अच्छा, तुम जाओ अपनी सीट पर बैठो।
मैं जल्दी से यह असाइनमेंट पहले नंबर पर जमा करके आती हूँ।"
इतना कहकर वह बिना एक लम्हा रुके भागते हुए आगे निकल गई।
उसने अपनी ज़ुबान से कुछ भी नहीं कहा था।
वह खामोशी में ही सब कहये हुए वह से निकल गईं
वहीं, माला उसे ऐसे खामोशी से जाते हुए देख मुँह बनाते हुए बड़बड़ाई
"खुदाया, क्या लड़की है यह!
अपने ही कज़िन को देखकर ऐसे छुप गई जैसे वह खा ही जाएगा।"
फिर उसने अपना फ़ोन निकाला, कैमरा ऑन किया और शीशे में खुद को देखते हुए बोली
"हाँ… मैं ठीक लग रही हूँ कि नहीं?
बिल्कुल परफेक्ट!"
यह कहकर वह जल्दी से अपनी क्लास की तरफ़ बढ़ गई।
वही इबादत, जो असाइनमेंट सबमिट करने के लिए स्टाफ़ रूम की तरफ़ भागते हुए जा रही थी,
सामने से आ रहे एक शख्स से बुरी तरह टकरा गई।
उसके असाइनमेंट के सारे पेपर्स ज़मीन पर बिखर चुके थे।
वह बड़ी-बड़ी आँखों से एक नज़र अपने असाइनमेंट की तरफ़ देखती है।
उसकी सियाह, काली और गहरी आँखें ही सिर्फ़ नज़र आ रही थीं।
लंबी-लंबी पलकें थीं, जिनमें खौफ़ उतर आया था।
उसने नज़र उठाकर सामने वाले शख्स को देखने की हिम्मत तक नहीं की।
जल्दी-जल्दी से अपने असाइनमेंट के पेपर्स समेटने लगी।
वहीं सामने खड़ा हुआ शख्स, अपने पैरों के पास झुकी हुई उस लड़की को देख रहा था।
उसके छोटे-छोटे हाथ बेहद नाज़ुक और कोमल लग रहे थे।
उनकी रंगत सफ़ेद के साथ हल्की गुलाबी पड़ रही थी।
वह जल्दी-जल्दी पेपर्स उठा रही थी।
लेकिन जीहां की नज़रें इबादत पर टिकी हुई थीं।
उसकी पढ़-पढ़ आई हुई गहरी काली आँखें… कितनी ख़ूबसूरत थीं।
वह खुद न जाने कैसे, अपने पैर ज़रा नीचे करता है और घुटनों के बल बैठ जाता है।
फिर अपनी गहरी आवाज़ में कहता है
"नज़रें कहाँ हैं तुम्हारी?
तुम्हें दिख नहीं रहा था, सामने प्रोफ़ेसर खड़े हैं?"
इबादत यह ठंडी सी आवाज़ सुनकर काँप उठती है।
उसके हाथ थर-थर काँप रहे थे, आँखें और बड़ी हो चुकी थीं।
वह बुरी तरह डर गई थी।
आवाज़ से ही पहचाना जा सकता था कि सामने मौजूद शख्स कौन है।
सामने… जियान जुबैर अख़्तर खड़ा था । इबादत की सास रुक जाते हैं। वह जल्दी से अपना असाइनमेंट समेट । जुबेर की बुक उठाकर उसकी तरफ बढ़ते हुए, बहुत ही धीमी आवाज में कहती है “आई… आई एम सॉरी, सर।”
यह कहते ही वह तुरंत आगे बढ़ गई।
उसने रुकना भी ज़रूरी नहीं समझा था, और न ही नज़र उठाकर उस शख्स को देखने की हिम्मत जुटाई थी।
वहीं जियान अपनी जगह पर खड़ा रह गया।
उसकी आंखों के सामने एक बार फिर से वही गहरी सियाह आंखें आ गईं।
उन नज़रों को देखकर उसका दिल ज़ोरों से धड़कने लगा।
वह बेचैनी से पीछे मुड़कर देखने लगता है, पर इबादत का नाज़ुक वजूद जैसे अचानक गायब हो चुका था।
जुबेर की सांस जैसे थम गई थी।
वह बेताबी से इधर-उधर अपनी नज़रें घुमा रहा था।
उसकी आंखों के सामने बार-बार इबादत का छोटा-सा नाज़ुक हाथ और वो गहरी, काली, सियाह आंखें आ रही थीं।
वे कितनी ख़ूबसूरत थीं।
अगले ही पल उसने अपने बालों पर हाथ फेरा और होंठों पर टेढ़ी-सी मुस्कान आ गई।इस सबसे बेखबर, कि उसे टक्कर मारने वाली कोई और नहीं बल्कि इबादत थी, जुबेर उसे पहचान ही नहीं पाया था।
अब इबादत का वजन 50. 45 के बीच आ चुका था। वह पहले से काफ़ी ज्यादा पतली हो चुकी थी।
जैसे उसका पुराना वाला वजन कहीं गुम हो गया हो।
वजन घटने से उसकी खूबसूरती और भी ज्यादा निखर गई थी।
उधर जियान, जो अभी-अभी प्रिंसिपल के साथ बिज़नेस क्लास की तरफ बढ़ चुका था, कुछ देर बाद प्रिंसिपल बिज़नेस क्लास के अंदर खड़े हुए।
उन्होंने सभी मौजूदा स्टूडेंट्स की तरफ देखते हुए ऊँची आवाज़ में कहा
“आज से आपको मिस्टर जियान जुबेर अख़्तर बिज़नेस की क्लासेस देंगे।
आप तो जानते ही हैं इनके बिज़नेस स्किल्स के बारे में।
साथ ही, प्रैक्टिकल के लिए आप इनका ऑफिस भी ज्वाइन करेंगे… लेकिन अभी नहीं, कुछ वक्त के बाद।
वह भी सिर्फ उन्हीं स्टूडेंट्स को सेलेक्ट करेंगे, जिनके स्किल पढ़ाई के साथ-साथ और बेहतर साबित होंगे।”
इसके बाद प्रिंसिपल बोले
“और अब मैं आप लोगों से मिलवाना चाहता हूँ, जियान जुबेर अख़्तर से।”
उनकी आवाज़ सुनकर जियान, जो क्लासरूम के बाहर खड़ा था, अपने लंबे कदमों के साथ अंदर आ गया।प्रिंसिपल की बातों के बावजूद भी बच्चे अभी तक शोर मचा रहे थे।
लेकिन जैसे ही जयंत क्लास के अंदर आया, एक गहरी खामोशी छा गई।
सभी लोग तकरीबन ठिठक से गए और उसकी तरफ देखने लगे।
जियान ने सभी को देखते हुए ठंडी और सख़्त आवाज़ में कहा
“गुड मॉर्निंग, क्लास।”
उसकी आवाज़ इतनी ठंडी और रुखी थी कि पलभर में सभी स्टूडेंट्स डिसिप्लिन में बैठ गए।
वह आगे बोला
“स्टूडेंट्स, आप लोग तो मुझे पहले से ही जानते हैं।
और रही बात आप लोगों को जानने की… तो वक्त के साथ मैं सब कुछ जान ही जाऊंगा।
आज क्लास का पहला दिन है, इसलिए आप लोग मुझसे कुछ भी पूछ सकते हैं… जो भी आपका दिल चाहे।”
तभी एक लड़की, जिसने बहुत मॉडर्न और फैशनेबल ड्रेस पहनी हुई थी,
जियान को गहरी नज़रों से देखते हुए अट्रैक्टिव आवाज़ में बोली
“वैसे, जियान क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड थी?”
उसने यह ऐसे प्रिटेंड किया मानो पूरी क्लास को बताना चाह रही हो कि वह जियान को पहले से जानती है।
पूरी क्लास उसकी यह बात सुनकर हैरान रह गई।
लेकिन jayaan ने बिना उसकी तरफ देखे, बेहद रूखी आवाज़ में कहा
“माइंड योर टंग, मिस व्हाटएवर!
यह क्लास है, और मैं यहाँ क्लास के हिसाब से बात करूँगा…
ना कि अपनी पर्सनल लाइफ़ के बारे में।
और वैसे भी, मैं तुम्हें क्यों अपनी पर्सनल लाइफ़ बताने लगा?
कौन हो तुम आखिर?”
उसने यह कहते हुए गहरी, ठंडी निगाह उस लड़की पर डाली।
उसकी नज़र इतनी सख़्त थी कि उसे महसूस करते ही लड़की के तो जैसे रोंगटे खड़े हो गए।वह बिना कुछ कहे अपनी सीट पर बैठ गई।
उसे इस वक्त बहुत ही ज़्यादा इंसल्ट महसूस हुआ था।
अपनी मुट्ठियाँ भींचते हुए वह मन ही मन बुदबुदाई
“यह आपने सही नहीं किया, जियान
मैं यहाँ क्या-क्या ख्वाब सजा कर बैठी थी… और आप, आप मुझसे इस टोन में बात कर रहे हैं?
मैं आपकी अब्बू से शिकायत करूँगी।”
यह सोचते हुए उसने इधर-उधर देखा।
वहाँ मौजूद सभी लोग उस पर हँस रहे थे।
प्रिंसिपल पूरी क्लास को जियान के हवाले करके जा चुके थे।
जयंत ब्लैकबोर्ड पर कुछ लिखना शुरू कर चुका था।
वह किताब से देखकर लिख रहा था।
उसकी हैंडराइटिंग बड़ी मुख़्तलिफ और बेहद खूबसूरत थी।
जितना वह ख़ुद हसीन था, उतना ही उसका पढ़ाने का तरीका भी अलग और असरदार था।
क्लास शुरू हुए अभी पाँच मिनट ही गुज़रे थे कि तभी एक बहुत धीमी और मीठी आवाज़ सुनाई दी
“मे आई कम इन, सर?”
इस आवाज़ पर जयंत ने अपना सर घुमाकर देखा।
सामने, बिलकुल सामने, इबादत खड़ी थी।
वह अपनी ईरानी काले रंग की चादर ओढ़े हुए थी।
उसकी वही सियाह काली आँखें, जो इस वक्त नीचे झुकी हुई थीं…
इबादत को देखकर जियान की भौंहें हल्की-सी ऊपर उठीं।
उसे घूरते हुए उसने बहुत गहरी और धीमी आवाज़ में कहा
“आपको पता नहीं है क्लास का वक्त क्या होता है, मिस?”
उसके इतना कहने के साथ ही पूरी क्लास अब इबादत को देखने लगी।
सबके होठों पर मुस्कान थी।
लड़कियाँ तो लड़कियाँ, लड़के भी अपने गालों पर हाथ टिका कर बस उसे ही घूर रहे थे।
इबादत की नज़रें नीचे थीं।
वह अपने ऊपर सबकी नज़रें महसूस कर रही थी।
धीरे से उसने कहा
“आई… आई एम सॉरी, सर।
असाइनमेंट सबमिट करने में थोड़ा टाइम लग गया था।
मैं आगे से एहतियात रखूँगी।
क्या… क्या मैं अंदर आ जाऊँ?”
यह कहते हुए उसने बहुत हिम्मत से नज़र उठाकर जियान की तरफ देखा।
जियान बिना किसी इमोशन के, सीधे उसी को देख रहा था।
उसकी उन तपिश भरी निगाहों को अपने ऊपर महसूस करते ही
इबादत के रोंगटे खड़े हो गए।
वह तुरंत अपना सिर झुका ली।
जियान ने उसकी झुकी हुई शक्ल पर एक पल के लिए गहरी नज़र डाली।
फिर होश में आते ही उसने गहरी और भारी आवाज़ में कहा
“नेक्स्ट टाइम से ख़्याल रखिएगा।
फर्स्ट डे है इसलिए माफ़ कर रहा हूँ।
गो बैक टू योर सीट, फास्ट!”
उसका लहज़ा इतना तेज़ और हुक्म भरा था
कि इबादत जल्दी से क्लास में अंदर आई और
सीधे पहली लाइन में माला के पास वाली कुर्सी पर जाकर बैठ गई।
माला ने पलटकर उसे देखा।
फर्स्ट बेंच पर बैठी इबादत को देखकर उसकी नज़र एक पल के लिए ठहर गई।
लेकिन अगले ही पल उसने तुरंत अपनी नज़रें फेर लीं।
वहीं जियान भी वापस बोर्ड की तरफ मुड़ा
और किताब से देखकर कुछ लिखने लगा।हमारी इबादत भी उसे इस तरह स्पीड में लिखते हुए देख,
जल्दी-जल्दी अपनी कॉपी पर नोट कर रही थी।
कुछ देर बोर्ड पर लिखने के बाद,
Jihaan हर एक चीज़ उन स्टूडेंट्स को समझा रहा था।
लेकिन इबादत के हाथ रुक नहीं रहे थे।
वह Jihaan को देख नहीं रही थी, बस उसकी हर बात को नोटिस कर रही थी।
उसका पेन लगातार नोटबुक पर चल रहा था।
वहीं बगल में बैठी माला धीरे से फुसफुसाई
**“अरे यार, यह तेरा कज़िन आग लगा रहा है…
और तेरे हाथ रुक ही नहीं रहे।
देख तो सही एक नज़र इस पर, कितना हॉट बंदा लग रहा है।
मुझे तो पता था कि मर्द काम करते हुए हसीन लगते हैं…
लेकिन यह नहीं पता था कि कोई मर्द पढ़ाते हुए भी इतना खूबसूरत लग सकता है।
यार, इनके वीनस जैसे हाथ तो देख…
आज पहली बार मुझे किसी मर्द की पोस्टर जैसी पोज़िशन इतनी खूबसूरत लगी है।”**
यह कहते हुए माल जियान के हाथों को ही देख रही थी।
जयंत, जो क्लास में आने के बाद अपना कोट कुर्सी पर डाल चुका था,
शर्ट की स्लीव्स को कोहनी तक मोड़कर स्टूडेंट्स को पढ़ा रहा था।
उसकी नज़र हर स्टूडेंट पर थी।
बीच-बीच में वह किसी न किसी को खड़ा करके
कुछ न कुछ पूछ भी रहा था।वैसे ही जियान कुछ कदम आगे बढ़ा।
उसने अपने दोनों हाथ फर्स्ट बेंच पर टिकाए और पूरी क्लास की तरफ देखते हुए तेज़ आवाज़ में कहा
“एनी डाउट, क्लास?”
उसकी आवाज़ इतनी attrective थी कि सभी स्टूडेंट्स एक साथ सिर हिलाते हुए बोले
“नो सर।”
वहीं इबादत…
जिसकी नज़र अब जाकर अपने पेन से हटकर जियान के हाथों पर पड़ी थी।
वह उसके मज़बूत हाथों को देख रही थी और धीरे से अपना सर उठाकर jihaan की तरफ देखने लगी।
दो साल हो चुके थे।
इन दो सालों में उसने एक बार भी जियान को नहीं देखा था।
न कोई कॉल, न कोई मैसेज, और वीडियो कॉल तो बहुत दूर की बात थी।
लेकिन इन दो सालों में जियान बिल्कुल बदल चुका था।
वह और भी ज़्यादा हसीन हो गया था।
उसकी परफ़ेक्ट शेप बॉडी देखकर ही साफ़ लग रहा था
कि उसने जिम में कितना पसीना बहाया होगा।
उधर जियान, जो अभी अपनी पूरी क्लास पर नज़र दौड़ा रहा था,
अचानक उसे ऐसा महसूस हुआ मानो उसके दिल में एक अजीब-सा सुकून उतर रहा हो।
जैसे कोई प्यारी-सी खुशबू उसके आसपास बिखर गई हो।
उसने नज़र नीचे झुकाई…
और देखा इबादत।
वह अपनी गहरी, सियाह आँखों से बस उसे ही देख रही थी।
जैसे ही इबादत को एहसास हुआ कि जियान भी उसी को देख रहा है,
उसने तुरंत अपनी नज़रें चुरा लीं।इबादत को यूँ नज़रें चुराते हुए देख,
जयंत को थोड़ा अजीब लगा।
पर न जाने क्यों, पूरी क्लास के अंदर उसकी नज़रें बस इबादत पर ही टिकी रह गई थीं।
उसका वह नाज़ुक सा वजूद,
और उसकी गहरी सियाह आँखें…
जयंत के जहन में जैसे उतर चुकी थीं।
जियान ने क्लास की तरफ रुख किया और कहा
“अगर आप लोगों को फिर भी कोई डाउट हो,
तो आप लोग मेरे केबिन में आकर पूछ सकते हैं।
एनीवेज… नाउ क्लास इज़ ओवर।”
इतना कहकर उसने एक नज़र पूरी क्लास पर डाली।
एक-एक करके सभी स्टूडेंट उठकर जाने लगे।
वहीं इबादत ने जल्दी-जल्दी अपना सारा सामान समेटा
और सीधा क्लास से बाहर निकल गई।
सबसे अंजान…
कि जियान की नज़र अब भी उसी पर ठहरी हुई थी।
वह जाती हुई इबादत को बस एकटक देखता रहा।
उसे जाते हुए देख, पीछे से माल चिल्लाई
“अरे, रुक तो सही!
मेरे लिए इतनी जल्दी भी क्या है?”
यह कहते हुए वह भी इबादत के पीछे भागी।



Write a comment ...