09

Raabta

Ab aage ..

कुछ देर बाद,

जिहांन अपने केबिन में बैठा हुआ कुछ फाइलें देख रहा था।

तभी उसके केबिन पर दस्तक हुई।

उसने नज़रें उठाए बिना गहरी आवाज़ में कहा

“कम इन।”

दरवाज़ा खुलने की आवाज़ के साथ ही एक लड़की कैटवॉक करते हुए अंदर आई।

उसकी आहट सुनकर जियान ने सामने की तरफ देखा…

सामने वह लड़की पूरे स्टाइल से खड़ी थी।

अपने दोनों हाथ टेबल पर टिकाते हुए, अजीब और मुख़्तलिफ़ अंदाज़ में बोली

*“तुम्हें नहीं लगता कि तुमने क्लास में कुछ ज़्यादा ही रूड बिहेव किया?

भूल रहे हो क्या, कि मैं तुम्हारे दादा के बेस्ट फ्रेंड की बेटी हूँ?

वह भी एकलौती बेटी!

तुम ऐसा मेरे साथ कैसे कर सकते हो, जिहान

तुम्हें पता है मेरी कितनी इंसल्ट हुई तुम्हारे इस रूड बिहेवियर से?

तुम्हें मुझसे प्यार से बात करनी चाहिए थी।

तुम ऐसा कैसे सबके सामने मुझे इंसल्ट कर सकते हो?

तुम तो जानते हो न… आई रियली लाइक यू, जिहान।”

उसने यह बहुत ही अलग और अजीब से लहज़े में कहा था।

जिआन की आँखें ऊपर उठीं।

उसने गुस्से से टेबल पर ज़ोर से हाथ मारा और सख़्त आवाज़ में बोला

**“माइंड योर टंग, मिस व्हाटएवर!

मुझे यहाँ तुम्हारा नाम भी नहीं पता।

और शायद तुम भूल रही हो… यह तुम्हारा घर नहीं, बल्कि कॉलेज है।

और यहाँ मैं तुम्हारा प्रोफेसर हूँ।

तुम्हें अपने प्रोफेसर से बात करने की तमीज़ बिल्कुल भी नहीं है।

पर कोई बात नहीं… मैं हूँ ना।

मैं तुम्हें तमीज़ सिखा दूँगा।

पर उससे पहले, अपने डैड को कॉल लगाओ।

और उनसे मेरी बात करवाओ।

कहना जिहान जुबेर अख़्तर उनसे बात करना चाहते हैं।

क्योंकि मैं उन्हें बताना चाहता हूँ

कि उनकी बेटी कॉलेज में उनके पैसे किस तरह वेस्ट कर रही है…

जिसे पढ़ाई में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं है।

और हाँ, आइंदा मेरे केबिन में आने की ज़रूरत नहीं…

जब तक कोई बहुत ज़रूरी काम न हो।

नाउ गेट आउट!”जियान की तेज़ आवाज़ पर अन्या बुरी तरह घबरा गई।

वह हकलाते हुए बोली

“सॉरी… सॉरी सर, मैं तो… मैं तो बस ऐसे ही…”

“गेट आउट!”

जिहान ने गुस्से से चिल्लाते हुए दरवाज़े की तरफ इशारा किया।

अन्या सकपकाती हुई तेज़ क़दमों से बाहर निकल गई।

पर जाते-जाते उसके मन में ग़ुस्सा और चोट दोनों ही साफ़ झलक रहे थे।

उसने मन ही मन कहा

“ठीक है जिहान… अभी तुम मेरी तरफ एक नज़र भी नहीं डाल रहे।

पर कोई बात नहीं।

मुझे बहुत अच्छे से पता है…

जुबेर अंकल तुम्हारे वेलकम पर एक पार्टी ज़रूर रखेंगे।

और उस पार्टी में… तुम्हारी नज़रें मुझसे हटेंगी भी नहीं।”

यह सोचकर उसने अपने बालों को घमंड से पीछे झटका

और कैटवॉक करते हुए आगे बढ़ने लगी।

उसके हर स्टाइलिश अंदाज़ पर वहाँ खड़े लड़कों की नज़रें टिक गईं।

सबकी नज़रें अन्या के बैक पर अटक गई थीं।

उसने एक क्रॉप बैकलेस टॉप और टाइट जींस पहन रखी थी,

जिसमें उसके जिस्म का हर नक़्श कपड़ों के बावजूद साफ़ झलक रहा था।

अन्या ने सबकी नज़रें अपने ऊपर महसूस कीं

और गहरी, saticfaction से भरी मुस्कान के साथ आगे बढ़ गई।

उसे लग रहा था मानो इस दुनिया में

उससे ज़्यादा खूबसूरत लड़की कोई हो ही नहीं सकती।

लड़के उसे रुक-रुक कर घूरते रहे।

लेकिन इस सबसे अनजान…

उसके ठीक पीछे, करीब दस कदम की दूरी पर

इबादत और माला चल रही थीं।

उन पर भी कई लोगों की नज़रें टिकी हुई थीं।कहते हैं ना, बे-पर्दगी चाहे कितनी भी ख़ूबसूरत क्यों न लगे,

लेकिन जब एक पर्दा किसी लड़की पर होता है,

तो लोग चाहकर भी अपनी नज़रें उठाते नहीं, बल्कि झुका लेते हैं।

कुछ ऐसा ही हो रहा था।

जहाँ इबादत के लिए नज़रें झुक रही थीं,

वहीं कुछ लोगों की नज़रें उसकी गहरी आँखों में कहीं गुम-सी हो रही थीं।

लेकिन इबादत…

बिना किसी पर तवज्जो दिए जल्दी-जल्दी आगे बढ़ रही थी।

उसे इन सबका बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था।

वहीं माला ने उसे देखते हुए कहा

“अच्छा, ठीक है…

तुम जाकर कैंटीन में मेरा वेट करना।

मैं वॉशरूम जाती हूँ, उसके बाद साथ में घर चलेंगे।

वैसे भी आज हमारा कोई लेक्चर नहीं है।

और मैं तो बहुत ही ज़्यादा एक्साइटेड हूँ,

जब जुबेर अंकल पार्टी रखेंगे।”

सबको इस पार्टी के बारे में बहुत अच्छे से पता था।

लोग जानते थे कि यह खानदान कौन है…

एक रईस घराना, जिनका नाम पूरे शहर में मशहूर था।

हर कोई यह भी अच्छे से जानता था कि जियान

अब एक ब्रांड बनकर लौटा है।

उसकी मौजूदगी पर जश्न न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता।

वह खानदान का इकलौता वारिस था।

और लोग अगर उसकी ख़ुशियों में शामिल होते,

तो उनका अपना स्टेटस भी और ऊँचा हो जाता था।

पर इस सबसे उलट, इबादत को इस सब me जरा भी दिलचस्पी नहीं थी। उसे देखते हुए वह कहती है, “ठीक है बाबा, आना जब होगी तो मैं सबसे पहले तुम्हें बताऊंगी। पर फिलहाल हमें घर चलना चाहिए।”

माला उसकी तरफ देखते हुए ड्राइवर को कर निकालने के लिए कह देती है, “भाई, आज नहीं आ पाएंगे। तुम मेरे साथ ही चलो, मैं तुम्हें घर छोड़ दूँ।” इसी बहाने उसे एक नजर और ध्यान से देखने का मौका तो मिलेगा।

“कम से कम वह चार्मिंग पर्सनैलिटी ही ऐसी है, यार। मुझे तो तुमसे जलन होती। काश तुम्हारी जगह में वह घर में होते। काश तुम्हारी जैसी किस्मत मेरी होती, तो आज कितना अच्छा लग रहा होता। और मैं पूरा टाइम सर को देख पाते।”

वहीं, इबादत जो उसकी किस्मत वाली बात पर अटक चुकी थी, वह उसे देखते हुए आहिस्ता से कहती है, “दुआ करो कि मेरे जैसे किस्मत तुम्हारी न हो। बहुत तकलीफ होगी, और मैं नहीं चाहती कि मेरी इतनी प्यारी, इतनी अजीज दोस्त को यह अजियत से गुजरना पड़े।”

माला हैरानी से उसकी तरफ देखने लगती है। उसे समझ नहीं आया था कि आखिर इबादत किस तकलीफ की बात कर रही हैं। पर वह ज्यादा तवज्जो नहीं देती।

वह सब छोड़ो, चलो अब हम लोग घर चलते हैं। आज का टाइम तो कंप्लीट हुआ। बोलते हुए, वह दोनों ही गाड़ी में बैठकर निकल चुके थे।इबादत जैसे ही हवेली वापस लौटते हैं, उसकी नजर हाल में बैठी हुई अपनी अम्मी और बड़ी एमी पर जाती है। दोनों के चेहरे, जो सुबह गुलाब की तरह खिले हुए थे, इस वक्त मुरझाए हुए थे।

वह उनकी तरफ देखते हुए आहिस्ता से करीब आती है। चादर को साइड में रखते हुए कहती है, “क्या हुआ मम्मी, बड़ी मम्मी? आप लोग कुछ परेशान नजर आ रहे हैं। कुछ हुआ है तो मुझे बताइए। आप लोगों की तबीयत ठीक नहीं है क्या?”

जीनत बेगम उसे यूं परेशान होता देखती हैं। “कुछ नहीं बेटा, तुम जाओ, जाकर अपने कमरे में कपड़े तब्दील कर लो। तुम भी थक गई होगी ना। हम लोग तो बस ऐसे ही परेशान हो रहे हैं। हमें लगा था जिहान वापस आने के बाद हम लोगों से मिलने के लिए घर आएगा, पर वह तो घर आया ही नहीं। बल्कि फोन करके कह रहा है कि वह कुछ वक्त बाद आएगा। उसने अपने लिए अलग घर ले लिया।”

इबादत ने अच्छा नहीं किया बेटा, बड़ी अम्मी कहती हैं। इबादत उनकी तरफ देखने लगती है। वह समझ रही थी कि उसकी बड़ी मम्मी इस बात से ज्यादा किसी और वजह से परेशान हैं।

इबादत बिना कुछ कहे अपने कमरे में चले जाती हैं, डरे और सहमे हुए। इसी बीच वे वापस घर के अंदर आ रहे थे। घर में सिर्फ उनके घर वाले और कुछ मुलाजिम थे। वह मुलाजिम काम में व्यस्त नहीं थे, बल्कि उनकी तादाद बहुत ज्यादा थी।

इबादत जल्दी से अपने कमरे में जाती हैं और पूरे कमरे का ध्यान से देखती हैं। जब उसे तसल्ली हो जाती है कि कमरे में कोई भी मौजूद नहीं है, तो वह जल्दी से कमरे को अंदर से लॉक कर लेती हैं।

फिर वे वापस ड्रार से दवाइयां निकालकर उन्हें एक साथ खाते हैं और फ्रेश होने लगते हैं। उन दवाइयों से उनकी एंजायटी, डिप्रेशन और घबराहट कुछ हद तक काबू में रहती थी।

इसी तरह दिन निकल रहे थे। वह रोज कॉलेज जा रही थी, और देखते ही देखते एक महीना बीत चुका था। इस समय कुछ बदल चुका था, और वह था जिहान का रवैया इबादत के लिए।

इबादत को लेकर उसे पता नहीं था। यह उसकी बीवी है। उसे बस यह लगता था कि यह एक खूबसूरत सी लड़की है, जिसकी आंखें बहुत ही मासूम और ज्यादा पर्दे में रहती हैं।

इस एक महीने के अंदर जिआन ने एक बार भी घर पर फोन नहीं किया, और न ही किसी से बात करने की कोशिश की। उसने यहां तक कि इबादत के बारे में जानने की भी कोशिश नहीं की।वहीं इबादत, जो जल्दी-जल्दी में अभी क्लास की तरफ बढ़ रही थी, तभी वहां पर एक पियूं ने इबादत को देखा और कहा, “बेटा, यह कुछ नोट्स हैं जो जीहां, सर ने मांगे हैं। आप उन्हें दे देना। उन्होंने आपको बुलाया भी है। और मुझे अभी थोड़ा अर्जेंट काम है, तो फिर मैं जाता हूँ।”

बोलते ही वह तुरंत वहां से चला गया।

इबादत परेशानी से उन नोट्स को देखने लगती है। उसके चेहरे पर परेशानी साफ दिखाई दे रही थी। वह कभी केबिन के रास्ते को देखती हैं और फिर गहरी सांस लेकर सीधा केबिन की तरफ बढ़ जाती हैं।

वह धीरे से केबिन के दरवाजे पर खड़ी होती हैं और बहुत ही हल्की आवाज में कहती हैं, may i, कम इन सर।”

उसकी आवाज सुनकर जियान, जो अभी-अभी लैपटॉप में डूबा हुआ था और एक पेपर पर लगातार कुछ लिख रहा था, ठंडी आवाज में कहते हैं।come in

इबादत धीरे से सर उठाकर अंदर की तरफ देखती हैं। जियान इस वक्त लाइट ब्लू कलर की फॉर्मल शर्ट और फॉर्मल पैंट पहने हुए थे। उनके चमचमाते शूज और हमेशा की तरह डॉमिनेटिंग सख्त चेहरा लिए बैठा था ।उसने अभी तक इबादत की तरफ नहीं देखा था।

इबादत दरवाजे पर खड़ी अपनी धीमी सास लेती है उसे अंदर एक खतरनाक ओरा महसूस हो रहा था जो किसी का भी दम घोंटने के लिए काफ़ी हो ,

वही जीहां उसे यूं दरवाजे पर खड़ा देखा। “वैसे ही, ठंडी मर्दाना आवाज में कहता है।

, वहां खड़े रहने की जरूरत नहीं है , यहां आकर बैठिए,” उसने बड़ी इज्जत से कहा।

इबादत धीरे से उसके सामने वाली चेयर पर जाकर बैठ जाती हैं और अपने हाथ में पड़े हुए नोट्स को उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहती हैं, “यह नोट्स हैं जो आपने मंगवाए थे।”

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