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Kadam der kadm

वहीं जियान इस वक्त अपने ऑफिस में था, जहां ठीक सामने जुबेर अख्तर बैठे हुए थे।जीहां, उनके कुछ न बोलने पर इरिटेट हो गया था। जब वह कहता है, “आपने मुझे यहां पर किस लिए बुलाया है? आप मुझे बता सकते हैं। आपको पता है कि मैं कितना इंपॉर्टेंट टेस्ट छोड़कर यहां आया हूं, और आप बस मेरी शक्ल देख रहे हैं। आप बोल क्यों नहीं रहे? क्या कुछ हुआ है? मेरी शक्ल पर आपको जवाब मिल जाएगा। अपने सवालों के बोलिए तो सही।”

वह उन्हें इग्नोर करते हुए अपने लैपटॉप में काम जारी रखते हुए कह रहा था।

जुबेर साहब उसकी तरफ देखते हुए गुस्से के साथ कहते हैं, “दिमाग खराब हो गया है क्या तुम्हारा? तुम्हें आए हुए 1 महीने से ज्यादा हो गया है और तुम एक बार भी घर नहीं आए। चलो, मान लिया हमसे तुम्हारी नाराजगी थी। लेकिन घर में तुम्हारी एक बीवी भी मौजूद है, भूल गए हो क्या? वह भी तो तुम्हारा इंतजार कर रही है। और तुम यहां इस सब के चक्कर में, कॉलेज और ऑफिस के चक्कर में फंस गए हो।”

“मैं सिर्फ इसीलिए कहा था कि तुम सिर्फ एक ही काम संभालो, ताकि तुम अपनी बीवी को भी वक्त दे सको। और तुमने क्या किया? उसके बदले में, तुम 2 साल के अंदर वापस आए भी तो नहीं। तुमने उससे मिलने की कोशिश नहीं की, ना ही उससे कोई राब्ता किया , और ना ही खुद घर आए। तुम चाहते क्या हो आखिर?”

“मैं डाइवोर्स चाहता हूं, अब्बू।

मुझे कोई और लड़की पसंद है और मैं उसी से निकाह करूंगा। और वैसे भी, मुझे वह शुरू से पसंद नहीं थी। आप लोगों ने जबरदस्ती करवाया था मेरे साथ और मुझे मजबूरी में यह करना पड़ा था।”

“बिकॉज अगर मैं यह नहीं

करता, तो आप लोग मुझे जाने नहीं देते। और यह चीज मुझे बहुत अच्छे से पता थी। इसीलिए मैंने कहा, ताकि मेरे सपनों के बीच कोई भी ना आ सके। और अब मैं अपने काम पर हूं। मुझे किसी की जरूरत ही नहीं है।”

“और हां, आपकी लाडली, इबादत है ना, तब ऐसा करिए। मैं खुद उसे डाइवोर्स पेपर भेज दूंगा। उसे कहिएगा कि वह खामोशी से उस पर साइन कर दे। और उसके बाद, उसका और मेरा रिश्ता खत्म।”

“मुझे कोई और लड़की पसंद है। अगर आप लोग चाहते हैं कि मैं घर पर कभी लौटूं और उस लड़की को भी एक्सेप्ट करें, तो ठीक। नहीं तो मैं कहीं और घर लेकर रह सकता हूं। इतना मैं कैपेबल हूं। मुझे किसी की जरूरत नहीं है। मैं आज के वक्त पर सबसे ज्यादा फेमस इंसानों में से एक हूं। कोई मुझे शिकस्त नहीं दे सकता। कोई मुझे हार नहीं सकता।”

और देखिए, आज आप भी मजबूर होकर बैठे हैं। उसने यह सब बड़े ही घमंड और गुरूर के साथ कहा।जुबेर साहब को उसकी इस हरकत पर खून खौल कर रह गया था। वह उसे घूरते हुए, दांत पीसते हुए कहते हैं, “जबान, संभालो! तुम्हें खुदा की ताकत का अंदाजा नहीं है और तुम उससे डिवोर्स चाहते हो। यह हरगिज नहीं होगा और मैं कभी होने नहीं दूंगा।”

“अगर तुमने किसी और लड़की के साथ निकाह करने के बारे में सोचा या किसी और की तरफ नजर उठाई, तो समझ लेना कि तुम्हारा और मेरा रिश्ता खत्म। यह खून का नहीं, खानदान का मामला नहीं है।

प्लीज, अब्बू, आप हमेशा से सिर्फ उस मोटी भद्दी जैसी लड़की की साइड लेते आ रहे हो।”

“बचपन में भी अगर वह गलती करती थी, तो आप मुझे डांटते थे, ना कि उसे। बल्कि मुझसे कहा जाता था कि मैं बड़ा हूं तो मुझे समझना चाहिए। कितना बड़ा था मैं? सिर्फ 8 साल का। तो क्या मेरा बचपन ही छीन लेंगे? और अपने ही ऐसा कर रहे हैं। आप नहीं, मेरा बचपन छीन रहे हैं। इसलिए मुझे वह लड़की पसंद नहीं।”

“उसके आने के बाद आप सबको लगता था कि मैं बड़ा हो गया हूं, बहुत बड़ा हो गया हूं। लेकिन आप लोग यह भूल गए हैं कि एक औलाद अपने मां-बाप के लिए कितना तरसती है। और मां-बाप के लिए औलाद कभी बड़ी नहीं होती। और उसकी मौजूदगी पर आप लोगों ने मुझे बड़ा करार दे दिया था।”

“I really, really hate this girl. Ek toh woh मोटी, hippopotamus की तरह है। उसका मेरे बिना ना कोई वजूद है। । और अगर मैं और वह साथ में खड़े होकर कहीं जाएंगे, तो लोग उस पर तरस खाएंग मेरी वजह से। कि मैंने किस लड़की से शादी कर ली।”

“Main to usse bhi ज्यादा हसीन और खूबसूरत लड़कियां अपने लिए चुन सकता हूं। मैं सिंगल हूं और सक्सेसफुल भी। कोई भी लड़की मेरे साथ आसानी से रह लेगी। अगर आपको पता है तो समझ लीजिए आपकी उस इबादत के साथ कोई भी लड़का जिंदगी डिज़र्व नहीं करेगा। सबको पता है वह कितनी मोटी भैंस है। उसके नाम और नखरों का वजन, उससे कहीं ज्यादा भारी है।”

“और आप चाहते हैं कि वह सब मैं उठाऊं? हरगिज़ नहीं! आप अपनी लाडली से कह दीजिए कि वह मेरा इंतजार ना करे। मैं उसे पेपर भेज दूंगा। दो साल में मैं इतना बिज़ी हो गया था कि इस सबको वक्त ही नहीं दे पाया। पर अब मैं खुद इस सबको अपने हाथों में ले रहा हूं।”

“और हां, मम्मी से कह दीजिएगा कि जब मेरा दिल करेगा तभी मैं आऊंगा। उन्हें परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। और मुझे बहुत अच्छे से पता है, आप यहां मेरा हाल-चाल पूछने या मुझे देखने नहीं आए। यहां भी आप सिर्फ अपनी उस भतीजी की तरफ़दारी करने आए हैं।”

मेरे घर न लौटने की वजह सिर्फ वही है। अगर वह ना होती, तो मैं जरूर घर लौट रहा होता। पर उसकी मौजूदगी पर मैं किसी भी हाल में घर नहीं लौटूंगा।

आप कभी मुझसे मिलने का दिल करे, तो आप खुद ऑफिस आ सकते हैं। या मुझे किसी होटल, रेस्टोरेंट कहीं भी बुला सकते हैं। मैं आऊंगा, लेकिन मैं घर में कम नहीं रहूंगा। मुझे नफरत होती है उसे देखकर। ऐसा अजब सा मन महसूस होता है। मेरा गुस्सा आता है उसे देखकर।

आखिर है क्या? उसके पास ना शक्ल है, ना कलाकारी। ऊपर से उसका बढ़ता हुआ वजन। मैं तो अभी भी अंदाजा लगा सकता हूं वह खा-खा कर एक मोटी भैंस बन चुकी होगी।

बस खबरदार, जो तूने मेरी बेटी के खिलाफ एक अल्फाज़ भी कहा, तो खुद को समझते क्या हो। शायद भूल रहे हो, तुम्हारे पास जितनी पावर, ताकत, सब कुछ आई है, वह सिर्फ और सिर्फ उसी की दुआओं का नतीजा है।

क्योंकि निकाह के बाद बीवी ही शहर की किस्मत बदलने के काबिल होती है। और उसी की वजह से तुम इस सक्सेस के आगे हो। जिस दिन वह तुमसे दूर होगी, जिस दिन वह तुम्हें छोड़ देगी, उस दिन सबसे ज्यादा तुम रिग्रेट करोगे। Jihaan तुम।जिस पैसे, पावर का तुम घमंड कर रहे हो ना।

यह सब भी तुम्हारे कुछ काम नहीं आएगी। मेरी बात ध्यान में रखना, जिहान। जिस तरीके से तुम मेरी बेटी के लिए बोल रहे हो ना, तुम भी तरसोगे। जिससे तुमने मोहब्बत की, ना, तुम उसके लिए तरसोगे। वह तुम्हें कभी नहीं मिलेगी। यह मेरी गारंटी है, और मेरी बद्दुआ भी।”

बोलते हुए वह बहुत ही गुस्से में वहां से निकल गए। जी हां, बिना किसी एक्सप्रेशन के उन्हें जाते हुए देखकर, खून उनका भी जलकर राख हो गया। उनका बस चलता, तो वह न जाने क्या कर गुज़रता।

वह अपने दोनों हाथ टेबल पर तेजी से मारते हुए चिल्लाया, “इबादत! इबादत! इबादत! माय फूट! इबादत!”

“वह होती है जिसे दुआ में मांगा जाए और जिसे मैं अपना बनाना चाहता हूं। उसका नाम भले तुम्हारे नाम से मिलता हो, पर वह तुम्हारी तरह नहीं है। वह खूबसूरत, हसीन है। उसकी आंखें इतनी खूबसूरत हैं कि कोई भी देखकर खुद पर काबू न कर पाए। और वही तुम्हारा खुद का जैसा है, कि किसी को कुछ महसूस भी ना हो इडियट कहीं की!”

“मैं अगर परेशान हो रहा हूं, मैं खून के ashu रो रहा हूं, तो मैं तुम्हें भी rulauga , इबादत। अगर मेरे घर वालों ने मुझे ठुकराया, मैं तुम्हें भी चैन की सांस नहीं लेने दूंगा।”

इबादत माहिर अख्तर वह गुस्से में वहां फट रहा था। उसने एक-एक करके वहां रखे एक्सपेंसिव वास तोड़ना शुरू कर दिए। इससे अच्छा तो तुम मर जाओ उसने उसे बद्दुआ दी थी उसे नहीं पता था कि उसके मुंह से निकले हुए अल्फाज कितनी जल्दी सच होने वाले थे वह गुस्से से पागल होते हुए चेयर पर लीनं हो जाता है उसकी आंखें आप जाकर बंद हो चुकी थी वह खामोशी से एक तक शिलिंग को घूर रहा था उसका फोन अचानक से बजने लगता है जी हां एक नजर अपने फोन की तरफ देखा है उसके घर से फोन आ रहा था फोन बजते बजते बंद हो जाता है उसे देखकर लग नहीं रहा था कि उसका फोन उठाने का बिल्कुल भी इरादा हो

कुछ देर बाद एक बार फिर से फोन बज उठा और ऐसे ही करें 5 से 6 बार फोन बंद हो जाता है जब एक बार फिर कॉल आते हैं जी हां चिड़ते हुए फोन उठाकर जैसे ही कान में लगा था दूसरी साइड से जीना बेगम की घबराई आवाज आती है तुम तुम कहां पर हो जल्दी-जल्दी से घर आ जाओ पता नहीं पता नहीं कैसे हवेली में आग लग गई तुम्हारे बाबा भी फोन नहीं उठा रहे हैं जिहान के हाथ से जैसे फोन छोटा थ वो भागते हुए हवेली की तरफ निकलता है ।

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