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Pehli mulaqaat

जिहान की गाड़ी सड़कों पर दौड़ रही थी। कुछ देर बाद उसकी गढ़ी नील हवेली के सामने आकर रुकी।

वह बिना देर किए सीधा हवेली के अंदर की तरफ भागा। उसकी सास बहुत तेज चल रही थी । माथे पर बाल बिखरे हुए थे , ठंडे पसीने ने अपनी जगह बना ली थी । ओर उसकी वो बेख़ौफ़ आंखें बेहद ही गहरी और ठंडी हो चुकी थी उसका औरा बेहद ही काला हो गया था जिसमें वो डरवाना नजर आ रही थी

वही पूरी हवेली लंबी-लंबी लपटों से जल रही थी।

जीनत बेगम और मेहमाल बेगम दोनों ही हवेली के बाहर खड़ी थीं।

मेहमाल बेगम का रो-रोकर बुरा हाल हो चुका था।

पूरे सर्वेंट्स आग को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे थे,

वो लोग पानी डाल रहे थे।

लेकिन फायर ब्रिगेड आने में वक्त लग रहा था,

ऊपर से वहां का मौसम भी कुछ खास अच्छा नहीं था।

जिहान के कदम अचानक से ठिठक गए।

उसे ऐसा लगा जैसे उसकी जिंदगी तबाह हो रही हो।

वह तेजी से अपनी अम्मी के पास गया और उनके कंधे पर हाथ रखते हुए बहुत आहिस्ता से बोला। अम्मी आप ठीक है ना।

उसकी आवाज़ सुनते ही मेहमाल बेगम और जीनत बेगम दोनों उसकी तरफ देखने लगीं।

जिहान उन्हें सीने से लगाते हुए बोला,

"कुछ भी नहीं होगा... सब ठीक हो जाएगा... आप लोग चिंता मत करें।"

उसने चारों तरफ देखा,

पर जैसे उसकी नजर किसी की तलाश में थी और वह उसे दिखाई नहीं दी

बेचैन होकर वह बोला

"इबादत... वह कहां है?"

मेहमाल बेगम रोते हुए बोलीं

"वह अंदर गई थी... मैंने उस पर गुस्सा किया था।

वह गुस्से में जरूर कुछ कर बैठी होगी।

प्लीज़, खुदा के लिए... तुम जाकर देखो ना।"

यह कहते हुए वह खुद भी अंदर जाने के लिए आगे बढ़ीं।

जिहान ने उन्हें रोकते हुए कहा

"छोटी अम्मी, आप परेशान मत होइए।

मैं हूं ना... मैं उसे कुछ नहीं होने दूंगा।

आप यही रुकिए।"

बोलते हुए वह तेजी से अंदर की तरफ बढ़ा।

हवेली की आग बहुत तेज थी।

जैसे ही वह अंदर गया,

एक बड़ा-सा पिलर लगभग दरवाजे के पास गिरा।

वह किसी तरह बच गया,

लेकिन उसके हाथ हल्के से जल गए।

उसने इधर-उधर देखा और सीधे कमरे की तरफ भागा।

भागते हुए वह जोर से आवाजें दे रहा था

"इबादत! इबादत!"

पर उसे कहीं से कोई रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा था।

हर तरफ सिर्फ आग की तेज़ लपटें जल रही थीं।

जैसे ही वह इबादत के कमरे में पहुंचा,

उसने देखा कि दरवाजा अंदर से लॉक था।

वह गुस्से और बेचैनी में दरवाजे पर लात मारते हुए बोला

"इबादत! पागल हो गई हो क्या?

तुम्हें सुनाई नहीं दे रहा है?

दिखाई नहीं दे रहा है?

यहां आग लगी हुई है!

बेवकूफ लड़की... तुम्हें सोने के सिवा कुछ भी नहीं सूझता ना!"

यह कहते हुए उसने पूरी ताकत से दरवाजे पर लात मारी।

दरवाजा चरमराकर टूटा और अंदर की तरफ गिर गया। वो पहले ही आग के लपेट में था जिससे आसानी से टूट गया

जैसे ही वह कमरे में दाखिल हुआ,

उसकी आंखें हैरानी से फैल गईं।

पूरा कमरा आग की लपटों में जल रहा था।

लेकिन इबादत... वह कहीं दिखाई नहीं दी।

उसने चारों तरफ नजर दौड़ाई।

पर इबादत वहां नहीं थी।

सिवाय बाथरूम के दरवाजे के,

बाकी सब खाली था।

न जाने उसके दिमाग में क्या आया,

उसने अपने मुक्के भींच लिए और खुद से कहा

"बस... तुम यहां नहीं होनी चाहिए!"

यह कहते हुए उसने पूरी ताकत से बाथरूम के दरवाजे पर लात मारी।वहां का नज़ारा देखकर उसका साँस जैसे गले में ही रुक गया।

बाथरूम में अभी भी लपटें जल रही थीं।

इबादत बाथटब के अंदर थी। उसका हाथ बाथटब से बाहर लटक रहा था और सिर किनारे पर टिका हुआ था।

उसे देखकर लग रहा था कि वह बेहोशी में है।

वह जैसे सास लेना भूल गया उसको पलके तक नहीं हिली वो इबादत को देख रहा था । उसके चेहरे पर कंफ्यूजन था।

वह उसे पहचान नहीं पाया, पर न जाने क्यों अगले ही पल दिमाग में कुछ आता है।

वह तुरंत अपना कोट उतारकर उसके ऊपर डाल देता है और उसे गोद में उठाकर बाहर निकलता हुए जोर से चिल्लाया इबादत कहा हो तुम तुम्हे मेरी आवाज सुनाई नहीं दे रही है क्या आवाज दो मुझे कहा हो तुम वो चीखते हुए ।

लगातार उसे आवाज़ दे रहा था, और वही इबादत जो उसकी बाहों में थी, जिसे वह पहचान तक नहीं पा रहा था।

उसके हाथ नीचे की ओर झूल रहे थे।

उसे बचाते हुए वह बाहर आता है।

इबादत को उसने इस कदर बचाया था कि एक चिंगारी भी उसके जिस्म को छू नहीं पाई थी।

बल्कि खुद उसकी पीठ आग से जल रही थी।

जैसे ही वह उसे गोद में लेकर बाहर आया, उसकी शर्ट जल चुकी थी।

तभी वहां जुबेर साहब आ जाते हैं।

वे जिहान की पीठ को इस तरह जलता हुआ देखकर जल्दी से अपना जैकेट उतारकर उसके ऊपर डाल हाथ से आग न बुझा देते हैं।

कुछ देर बाद वहां फायर ब्रिगेड पहुंच चुकी थी।

इबादत की हालत देखकर मेहमाल बेगम की हालत बिगड़ गई।

वह रो रही थीं और उसे उठाने की कोशिश कर रही थीं।

पर इबादत के फेफड़ों में धुआं भर गया था जिससे वो शायद सास नहीं ले पा रही थी । वही जीहां वापिस ई इबादत को देखने के लिए हवेली की तरफ़ बढ़ रहा था

मेहमाल बेगम एकदम से चिल्लाईं

“इबादत… तुम्हें क्या हुआ? आंखें खोलो बेटा!”

उनके मुंह से इबादत का ज़िक्र सुनकर, जिहान हैरानी से उसकी तरफ देखने लगा। उसके पैर अपनी ही जगह पर जम गए थे

वह अपने एहसास के भी आदी नहीं था।

वह हैरान था।

उसका दिमाग जैसे एक लम्हे के लिए ब्लॉक हो चुका था।

जुबेर साहब ने जिहान को देखते हुए कहा

“तुम… तुम इसे लेकर तुरंत हॉस्पिटल जाओ।

फायर ब्रिगेड आ चुकी है।

मैं यहां बाकी चीज़ें संभालता हूं।”

जिहान का दिमाग काम करना बंद कर चुका था।

वो बिना किसी एक्सप्रेशंस के आगे बढ इबादत को अच्छे से अपने मजबूत बाहों में लेकर तुरंत वहां से निकल गया।

और उसके साथ-साथ जीनत बेगम और मेहमाल बेगम भी जा चुकी थीं।

जिहान फुल स्पीड में कार ड्राइव कर रहा था।

उसकी स्पीड इतनी तेज़ थी कि उसने हर सिग्नल तोड़ दिया।

उसे किसी चीज़ से मतलब नहीं था।

उधर मेहमाल बेगम का भी बुरा हाल हो चुका था।

कुछ देर बाद उनकी गाड़ी हॉस्पिटल के सामने आकर रुकी।

जिहान तुरंत गाड़ी से बाहर आया।

इबादत को अपनी गोद में उठाकर अंदर की तरफ भागा।

उसके ठीक पीछे दोनों बेगमें चल रही थीं।

कुछ देर बाद डॉक्टर इबादत ko apne sath में ले गए।

जिहान वहीं एक जगह खड़ा रह गया।

मेहमाल बेगम कुर्सी पर बैठकर रोने लगीं।

“सब मेरी गलती है…

मुझे उस पर इस तरह से नहीं चिल्लाना चाहिए था।”

मैं ऐसा कैसे कर सकती हूं… देखो मेरे बच्चे को क्या हो गया!”

मेहमाल बेगम रोते हुए बुरी तरह पछता रही थीं।

जीनत बेगम ने उनका हाथ पकड़ते हुए कहा

“कुछ नहीं होगा… तुम शांत हो जाओ।

उसे कुछ नहीं होगा।

हम सब जानते हैं उसके बारे में।

वह ऐसा कुछ भी नहीं करेगी, चाहे कुछ भी हो जाए।

तुम फिक्र मत करो।”

करीब एक घंटे बाद डॉक्टर बाहर आए।

उन्हें देखते ही जिहान सीधा पूछ बैठा

“इबादत… इबादत कैसी है?”

उसकी आवाज़ साथ नहीं दे रही थी।

आंखें एकदम सुर्ख हो चुकी थीं।

उसे एहसास हो रहा था कि कुछ देर पहले वह खुद के जेहन में इबादत को मरने का सोच रहा था

“मर जाए… तब मुझे सुकून मिलेगा।”

पर उसे क्या पता था कि उसकी दुआ इतनी जल्दी कबूल हो जाएगी।

डॉक्टर ने गहरी और शांत आवाज़ में कहा

“वह तो पानी में थीं… और वहां शायद आग ज्यादा नहीं थी,

न ही धुआं, जिसकी वजह से उनके फेफड़ों में ज्यादा धुआं नहीं भर पाया।

लेकिन उन्होंने डिप्रेशन की गोलियां ज़्यादा खा ली थीं।

सुबह तक उन्हें होश आ जाएगा।

हमने ड्रिप लगा दी है।

आप लोग बस उनका अच्छे से ख्याल रखें।

हो सके तो उन्हें खुश रखने की कोशिश करें।”

मेहमाल बेगम उनकी बात सुनते ही जल्दी से सिर हिला देती हैं।

वहीं, जिहान के तो जैसे होश उड़ चुके थे।

“डिप्रेशन की गोलियां…?”

उसके मन में सिर्फ यही सवाल गूंज रहा था।वहां पर बस हैरानी से, कभी अपने घरवालों को देखता था तो कभी वार्ड के अंदर की तरफ।

वह इबादत का चेहरा नहीं देख पा रहा था।

ना जाने क्यों उसके दिमाग में अजीब-सी बातें आ रही थीं।

कुछ सोचते हुए उसने कहा

“मैं… मैं इबादत से मिल सकता हूं अभी?”

डॉक्टर ने इनकार करते हुए कहा

“नहीं, अभी हम उसे नॉर्मल वार्ड में शिफ्ट कर रहे हैं।

और जितना हो सके, आप लोग उसे स्ट्रेस से दूर रखें।

बाकी… वह जल्दी बेहतर हो जाएगी।”

यह कहकर डॉक्टर वहां से चले गए।

कुछ देर बाद इबादत को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

मेहमाल बेगम और जीनत बेगम वेटिंग रूम में बैठकर अपनी नमाज़ अदा कर रही थीं।

वे शुकराना अदा कर रही थीं कि उनकी फूल-सी बच्ची को कुछ नहीं हुआ।

जिहान इस वक्त वार्ड के अंदर था।

जहां इबादत के कपड़े बदल दिए गए थे।

उसके हाथ में ड्रिप लगी हुई थी और चेहरा पीला पड़ चुका था।

वह बेहोश थी।

उसे देखकर यही एहसास हो रहा था कि उसके कदम न जाने क्यों उसके करीब उठ ही नहीं रहे।

उसके कदम भारी हो चुके थे।

इबादत को इस हालत में देखकर वह बहुत मुश्किल से एक-एक कदम बढ़ाता हुआ उसकी तरफ आया।

अब जाकर वह बहुत गौर से इबादत का चेहरा देख रहा था।

उसका चेहरा पहले से काफी ज्यादा स्लिम हो चुका था।

उसके कॉलर बोन साफ नज़र आ रहे थे।

उसके हाथ, जो पहले गोल-मटोल थे, अब नाज़ुक कलाइयों में तब्दील हो चुके थे।

जिहान बहुत गौर से, अपनी गहरी आंखों से उसे देख रहा था।

इबादत बेहोशी की हालत में थी।

अचानक उसकी आंखों के कोने भीगने लगे।

आंखों से बूंद-बूंद करके आंसू गिरने लगे।

इबादत के गुलाबी, सुर्ख पड़े होंठ हिल रहे थे।

वह धीमी-धीमी आवाज़ में कह रही थी

“अम्मी… अम्मी… अब्बू… जीहां… प्लीज़… प्लीज़…”

वह बड़बड़ा रही थी और रो रही थी।

उसके मुंह से निकलने वाले अल्फ़ाज़ गले में ही अटक रहे थे।

ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसकी सांस घोंटने की कोशिश कर रहा हो।

Comment jarur kre ☺️

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