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कुर्बत का असर

जिहान तुरंत उसके और करीब आया।

उसका हाथ पकड़कर धीरे-धीरे अपनी हथेलियों से सहलाने लगा।

नींद के आलम में भी इबादत बहुत बेचैन थी।

जब उसे लगा कि अब इबादत धीरे-धीरे शांत हो रही है,

तभी जाकर उसने राहत की सांस ली।

उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि आखिर घर में चल क्या रहा है।

पर अब अंदर ही अंदर उसे गिल्ट सताने लगा था।कुछ तो था जो उसे अपने सीने में चुभता हुआ महसूस हो रहा था

“वह भला कैसे कह सकता था… कि वह मर जाए?

वही तो हमेशा कहता था ना… कि वह उसके घर की इज़्ज़त है।

फिर कैसे उसके लिए इतने बुरे अल्फ़ाज़ उसके मुंह से निकल गए?”

वह खुद को कोस रहा था।

“वह तो अभी छोटी है… और मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी।”

उसे अब खुद पर बेहद गुस्सा आ रहा था।

उसका बस नहीं चल रहा था कि क्यों न खुद को ही इस चीज़ की सज़ा दे ले।

सांस लेना भी उसके लिए मुश्किल हो रहा था।

उसे बस इतना चाहिए था कि किसी तरह इबादत होश में आ जाए।

लेकिन इबादत इस सबसे बेख़बर, गहरी नींद में थी।

ना जाने उसके दिमाग में क्या आया कि वह वार्ड से बाहर चला गया।

वहां जाकर पास ही लगी कुर्सी पर बैठ गया।

उसे कमरे में सांस लेना मुश्किल हो रहा था।

उसके कहे हुए अल्फ़ाज़ उसके कानों में गूंज रहे थे।

धीरे-धीरे रात कटने लगी और आसमान में आफ़ताब फैल गया।

इबादत को अभी-अभी होश आया था।

उसकी आंखें धीरे-धीरे खुलने लगीं।

वह खुद को एक खाली और बंद जगह पर पा रही थी।

उसके चेहरे का रंग उड़ चुका था।

उसने इधर-उधर देखा, लेकिन आसपास कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था।

घबराहट और डर के मारे उसका दिमाग काम करना बंद कर चुका था।

उसे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसे कैद कर लिया हो।

उसकी सांसें तेज़ हो गई थीं।

मुंह से आवाज़ निकल नहीं रही थी।

मुश्किल से उसने कहा

“अम्मी… अम्मी…”

धीरे-धीरे उसकी आवाज़ ऊँची होने लगी।

तभी वार्ड का दरवाज़ा खुला।

एक वार्ड बॉय अंदर आया।

उसके हाथ में एक ट्रे थी, जिसमें कुछ दवाइयां रखी हुई थीं।

उसे देखकर इबादत के डर में और इज़ाफा हो गया।

वह अपने कदम पीछे खींचते हुए, बिस्तर पर सिकुड़कर बोली

“अम्मी… बड़ी अम्मी… बड़े अब्बू… कोई है… मम्मी…”

वह बुरी तरह से चीखने लगी थी।

सामने खड़ा वार्ड बॉय उसे इस हालत में देखकर हैरान रह गया। इबादत ने डर के मारे अपने हाथों को सीने पर ढक लिया और चीखते हुए कहा

“मेरे करीब मत आना! मैंने कहा ना, मेरे करीब मत आना!

मम्मी… कहां हैं आप?

कोई है यहां?

किसी को मेरी आवाज़ सुनाई दे रही है क्या?”

वह इस बार पूरी ताकत से ज़ोर से चीखी।

उसकी आवाज़ इतनी तेज़ थी कि बाहर बैठा जिहान तेजी से अंदर आ गया।

अंदर का नज़ारा देखकर उसकी आंखें हैरानी से बड़ी हो गईं।

सामने इबादत अपने हाथ से ड्रिप निकालने की कोशिश कर रही थी।

उसके हाथ से खून निकल आया था।

वहीं वार्ड बॉय अपनी जगह पर ठिठककर खड़ा रह गया।

जिहान तेजी से उसके पास आया।

लेकिन उसके छूने से पहले ही इबादत ने ड्रिप पूरी तरह निकाल दी और सीधा दरवाजे की तरफ भागी।

वह जोर से चिल्लाई

“अम्मी… कहां हैं आप?”

भागते हुए वह किसी के सीने से टकरा गई।

टकराते ही वह बुरी तरह से कांप गई।

उसका पूरा शरीर ठंडा पड़ने लगा।

अंदर से जैसे सारी हिम्मत जवाब दे गई थी।

चेहरे पर बिखरे हुए बाल और डरी हुई नज़रें लिए,

वह धीरे-धीरे अपना सर उठाकर ऊपर की तरफ देखने लगी।

सामने अयान खड़ा था, और उसके ठीक बगल में माला खड़ी हुई थी।

दोनों के चेहरे पर हैरानी और परेशानी साफ़ नज़र आ रही थी।

इबादत तुरंत अयान के पीछे चिपकते हुए कहती है,

"वह लोग मुझे मुझे वहां पर... मुझे घर जाना है, मुझे अम्मी के पास जाना है। मम्मी को बुलाओ।"

वह इस क़दर हाइपर हो रही थी कि उसके मुंह से अल्फ़ाज़ तक नहीं निकल रहे थे।

किसी को भी ठीक से समझ नहीं आ रहा था। आखरी हुआ क्या

माला उसे इस तरह अपने होश से गाफिल देख तुरंत उसके पास आती है और उसका हाथ पकड़ लेती है।

वह कहती है,

"रिलैक्स, कुछ भी नहीं हुआ। देखो, हम लोग हैं ना।"

इबादत ज़ोर से अपना सर हिलाते हुए बोली,

"नहीं... नहीं... वह मुझे ले जाएगा... मुझे उसके साथ नहीं जाना है। प्लीज़... प्लीज़... मेरी अम्मी को बुलाओ।"

उसके शब्द अधूरे और बिखरे हुए थे।

अयान के चेहरे पर परेशानी साफ़ झलक रही थी, उसके माथे पर बल पड़ गए थे।

वह तुरंत उसे बाजू से पकड़कर अपनी तरफ़ घुमाता है और उसके चेहरे पर हाथ रखते हुए बेहद आहिस्ता से कहता है,

"कौन? तुम किसकी बात कर रही हो, इबादत? देखो, मैं हूं यहां पर।

तुम कमज़ोर नहीं हो। तुम्हें सब कुछ आता है, तुम लड़ सकती हो।"और हम है तुम्हारे साथ तुम्हारा साथ देने के लिया

इबादत धीरे-धीरे सर उठाकर अयान को देखती है।

उसका चेहरा बिल्कुल सुन्न था, मानो सारे जवाब खो चुके हों।

फिर अचानक वह उसके सीने से लगकर ज़ोर-ज़ोर से रोना शुरू कर देती है।रोते वक्त उसकी आवाज़ इतनी तेज़ थी कि सब उसकी हालत पर परेशान हो चुके थे।

किसी को कोई समझ नहीं आ रहा था।

अयान के हाथ हवा में ही ठहर गए थे।

वहीं जिहान अपनी जगह पर हैरान होकर खड़ा था।

इबादत किसी अनजान शख्स के इतने क़रीब थी कि उसकी मुट्ठी और भी मज़बूत हो गई थी।

वह लंबे कदमों से तुरंत उसके पास आता है और उसकी बाजू पकड़कर अयान से अलग करते हुए अपनी तरफ़ घुमाता है।

इबादत उसे खुद से दूर धकेल रही थी।

वह उसका चेहरा तक नहीं देख रही थी, बस अपना सर बार-बार हिलाते हुए कह रही थी,

"अयान भाई, प्लीज़... प्लीज़ मुझे बचा लो।

मुझे यहां पर नहीं रहना, मुझे सांस नहीं आ रही है।

मुझे अम्मी... अम्मी के पास जाना है।"

वह पागलों की तरह चिल्ला रही थी जैसे उसे कुछ होश नहीं हो । और जिहान को खुद से दूर करने के लिए अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल कर रही थी।

कभी उसके सीने पर मुक्के मार रही थी, तो कभी उसके हाथों पर अपने नाख़ून गड़ा रही थी।

उसने इतनी ज़ोर से खरोंचा कि जिहान के हाथों की स्किन न तक निकल आया।

लेकिन जिहान ने उसे एक लम्हे के लिए भी नहीं छोड़ा।

वह उसे मज़बूती से अपने करीब किए रहा और उसके पेट पर धीरे-धीरे हाथ फेरकर उसे शांत करने की कोशिश करता रहा।

माला की आंखों में आंसू आ चुके थे।

वह अयान के गले से लगकर धीरे-धीरे सिसकने लगी थी।

वहीं दरवाज़े पर खड़े जुबेर साहब, जीनत बेगम और मेहमाल बेगम सब इबादत को हैरानी और परेशानी से देख रहे थे।

उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसने सब कुछ खो दिया हो।

जिहान उसे धीरे-धीरे शांत कर रहा था।

न जाने उसकी कुर्बत और उसके करीब होने का क्या असर था कि इबादत अब शांत होने लगी थी।

उसे अब खौफ़ नहीं आ रहा था।

वह धीरे से जिहान के सीने से हटकर चारों तरफ़ देखने लगी।

वहां सिर्फ़ उसके अपने खड़े थे।

इबादत ने सर उठाकर जिहान की तरफ़ देखा।

जिहान पहले ही अपनी गहरी आंखों से उसे ही देख रहा था।

उसकी आंखों में अजीब सी गहराई थी।

इबादत उसकी नज़र से टकरा गई।

उसकी गहरी काली आंखें सीधी जिहान की आंखों से टकरा रही थीं।

जिहान बिना किसी एक्सप्रेशन के उसे देख रहा था।

उसके चेहरे से यह समझना मुश्किल था कि वह सोच क्या रहा है।

लेकिन अगले ही पल इबादत पूरी ताक़त से उसे खुद से दूर धकेलकर चिल्लाई,

"आप! आपकी हिम्मत भी कैसे हुई मुझे छूने की? आपने क्या सोचकर मुझे गले लगाया था?"

इतना कहकर वह बुरी तरह कांपते हुए पीछे पलटी और उसकी नज़र अपनी अम्मी पर पड़ी।

इबादत दौड़कर उनके पास गई और उनके हाथ पकड़कर उनके साथ खड़ी हो गई।जिहान हैरानी से इबादत को देख रहा था।

वह किसी पागल की तरह बर्ताव कर रही थी।

अभी एक पल में वह कुछ और थी, और अगले ही पल में बिल्कुल कुछ और बन चुकी थी।

उसने कुछ भी नहीं कहा था।

उसके लब खामोश थे।

जैसे उसने एक गहरी ख़ामोशी इख़्तियार कर ली हो।पर दिमाग दिमाग तो जैसे सोचने से खुद को रुक ही नहीं पा रहा हो ।

वहीं मेहमाल बेगम इबादत को देख, उसके पूरे चेहरे पर अपने लब रखकर रोते हुए बोलीं,

“मुझे माफ़ कर दो।

मेरी गलती है... मुझे तुम्हें इस तरह डांटना नहीं चाहिए था।

मैं क्या करूं बेटा, मैं खुद परेशान हो गई थी।

तुम बच्चों की तरह ज़िद करती हो।

मैं हर वक्त तुम्हारे साथ नहीं रह सकती ना।”

इबादत कुछ नहीं बोली।

बस उनके सीने से लगकर घबराई हुई खामोश खड़ी रही।

फिर उसने अपना सर उठाकर जुबेर साहब को देखा।

वह खुद भी परेशानी से उसे ही देख रहे थे।

इबादत उनके पास जाकर उनसे लिपट गई और रोते हुए बोली,

“मुझे यहां पर नहीं रहना बड़े अब्बू।

मुझे घर जाना है।

मुझे यहां पर खौफ़ आता है।

आपको पता है ना, मुझे डर लगता है अकेले रहने से।

मुझे यहां पर नहीं रहना... प्लीज़ मुझे घर ले चलो।”

वह लगातार रो रही थी।

उसकी आंखों से आंसू झर-झर गिर रहे थे।

जुबेर साहब उसका सिर सहलाते हुए उसे अंदर लेकर आए।

फिर वार्ड में बैठी नर्स की तरफ देख, उसे ड्रिप लगाने का इशारा किया।

तभी इबादत ने तुरंत उनके हाथ पकड़ लिए और बोली,

“नहीं... मुझे कुछ नहीं चाहिए।

मैं बिल्कुल ठीक हूं।

मुझे बस घर जाना है।”जुबेर साहब उसके सर पर हाथ रख, प्यार से सहलाते हुए बोले,

“जब यह ड्रिप खत्म हो जाएगी तब हम तुम्हें घर ले जा सकते हैं।

तब तक तुम नहीं जा पाओगी।

तो जल्दी से लगवा लो।”

इबादत उनकी बात पर सर हिला देती है और खामोशी से बेड पर लेट जाती है।

नर्स आगे बढ़कर उसके हाथ में ड्रिप लगा देती है।

वार्ड बॉय को पहले ही वहां से भेज दिया गया था।

वहीं जुबेर साहब बाकी सभी की तरफ़ देखते हुए कहते हैं,

“हो गया, अब आप लोग घर जाइए।

घर पर बात होगी।”

फिर अयान की तरफ़ देखकर बोले,

“बेटा, तुम इसके साथ रुको।

मैं ज़रा डॉक्टर से बात करके आता हूं।”

इतना कहकर वह वहां से जाने लगते हैं।

इबादत तुरंत उनके हाथ पकड़कर नामंजूरी में सर हिलाते हुए बोली,

“आप... आप क्यों जा रहे हैं?

आप अयान भाई को भेज दीजिए।”

यह सुनकर अयान के चेहरे का रंग बदल गया।

उसे “भाई” कहलाना बिल्कुल पसंद नहीं था।

फिर भी वह अपने होठों पर मजबूर मुस्कान सजाते हुए बोला,

“कोई बात नहीं... मैं चला जाता हूं।”

उसने यह बात बड़ी मुश्किल से कही थी।जैसे अपने सीने पर पत्थर रख लिया हो

जुबेर साहब तुरंत सख़्ती से बोले,

“नहीं अयान, तुम रुको।

मुझे डॉक्टर से बात करनी है।

मैंने उसे मना किया था कि इस वार्ड में एक नर्स के सिवा कोई भी नहीं आएगा।

उसकी हिम्मत कैसे हुई यहां वार्ड बॉय को भेजने की?”

तभी जिहान सबकी तरफ़ देखते हुए बोला,

“आप सभी जाइए।

मैं हूं यहां इसके साथ।”

इबादत ने एक नज़र उसकी तरफ़ देखा और तुरंत अपना सर दूसरी तरफ़ मोड़ लिया।

वही जुबेर साहब तुरंत बाहर निकल गए।

अब वहां सिर्फ़ माला, अयान, मेहमाल बेगम, और जीनत बेगम रह गए थे।

“हम लोग हैं ना यहां पर।

आप घर जाइए और जाकर अच्छा-सा नाश्ता तैयार करिए।

हम सब घर आते हैं,”

बोलते हुए उन्होंने मुश्किल से मुस्कुराने की कोशिश की।

उन्हें खुद इबादत की हालत देखी नहीं जा रही थी।

बचपन की दोस्ती, स्कूल फ्रेंडशिप और अब कॉलेज तक का साथ...

इबादत का बदला हुआ रवैया और उसकी हालत माला और अयान को बर्दाश्त नहीं हो रही थी।

मेहमाल बेगम उसका हाथ पकड़कर बोलीं,

“हम अकेले नहीं जाएंगे तुम भी चलो यह अयान ओर जीहां उसे संभाल लेगा।”

Late night chp ke liye sorry 😐 pr ab chp enjoy kriye or sath comment kriye 🥰 😍 mei bs aap logo ke comments ke sahare hi rooj episode de rahi hu warna to ab tk gap ho jata 😅to bs comment krte rahiye 🤭

Good night 🌉

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