अयान और जिहान को छोड़कर इस वक़्त वार्ड में कोई भी मौजूद नहीं था।
बाकी सभी लोग जा चुके थे।
अब वार्ड में सिर्फ़ गहरी ख़ामोशी थी।
इबादत चुपचाप ग्लूकोज़ की बोतल को देख रही थी,
जिससे पानी की बूंदें धीरे-धीरे टपक रही थीं।
कभी वह उसे टकटकी लगाकर देखती,
तो कभी उसे गोल घूमते देख लेती।
जिहान खामोश था।
उसने कुछ भी नहीं कहा।
लेकिन अयान को न जाने क्यों,
जिहान का वहां मौजूद रहना बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था।
इबादत अपनी ड्रिप को देखते हुए धीमे स्वर में बोली,
“अयान भाई…”
अयान, जो खामोशी से दीवार से टेक लगाए खड़ा था,
तुरंत सीधा हो गया और उसकी तरफ़ कदम बढ़ाते हुए बोला,
“क्या हुआ? तुम्हें कुछ चाहिए?”इबादत उसकी तरफ़ देखते हुए बोली,
“हाँ, आप… आप इनको कहिए कि यह यहां से चले जाएं।”
उसने जिहान को देखा तक नहीं था।
जिहान उसे घूरते हुए उसके क़रीब आया।
उसके गाल पकड़कर उसका चेहरा मोड़ते हुए बोला,
“और तुम्हारी ज़ुबान में जंग लग गया है क्या?
जो तुम डायरेक्ट मुझसे बात नहीं कर सकती और किसी और का सहारा ले रही हो?
सीधे बोलो ना!
और तुम्हें क्या लगता है?
तुम्हारे कहने पर मैं चला जाऊंगा?
हरगिज़ नहीं जाऊंगा।”
वह अपनी डरावनी आंखों से घूरते हुए बोल रहा था।
इबादत तुरंत उसका हाथ झटक देती है।
अपने गालों को साफ़ करते हुए चिल्लाकर कहती है,
“मैंने कहा ना, मुझे मत छूइए!
आपको मेरी इतनी-सी बात समझ में नहीं आती?”
वह अपने दोनों गाल रगड़ने लगी।
रगड़ते-रगड़ते उसके दोनों गाल सुर्ख़ टमाटर हो चुके थे।
जिहान उसकी आंखों में देखने लगा।
यह वही नज़रें थीं जिनका वह एक महीने से दीवाना था।
हर बात पर अब जाकर उसने अपनी आंखें बंद कर लीं।
उसे समझ में आ रहा था कि यही नज़रें, यही नफ़रत…
और इस लड़की का उससे दूर-दूर भागना उसकी आंखों का खालीपन उसकी आंखों की नफरत नाराजगी यही तो था जो उसे तोड़ रहा था।
जहां कॉलेज में हर लड़की उसके क़रीब आना चाहती थी,
वहीं इबादत एकमात्र लड़की थी जो उससे दूर और कटी-कटी रहती थी।
वह कैसे भूल सकता था…
वह तो उसकी बीवी थी। न जाने क्यों यह देखकर वह हल्का-सा मुस्कुराया।पर वो मुस्कान आम नहीं थी
उसका चेहरा न जाने क्या बयां कर रहा था।
वह खुद से ही कहने लगा,
“सच में, निकाह में बहुत ताक़त होती है।
प्यार हुआ भी तो उस लड़की से,
जो असल में मेरी बीवी है।
नखरे और अदा तो देखो इसके।
कॉलेज में बस मुझे घूरती रहती थी।
कोई भी काम करने के लिए कहो,
तो हर शब्द चबा-चबाकर बोलती थी।
और अब देखो…
कैसे चिल्ला रही है।
सच में, बीवियां निकाह के बाद बदल जाती हैं।
अक्सर दोस्त भी ज़माने लगते हैं।”
यह कहते हुए वह इबादत को देख रहा था।
वहीं इबादत उसकी तरफ़ देख भी नहीं रही थी।
अयान को ऐसा लग रहा था जैसे वह उन दोनों के बीच में आ रहा हो।
वह बिना कुछ कहे वार्ड से बाहर जाने लगा।
दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ पर
इबादत तुरंत उठकर दरवाज़े की तरफ़ देखने लगी।
उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे अयान का जाना उसे पसंद नहीं आया।
फिर उसने टेढ़ी नज़रों से जिहान की तरफ़ देखा।
वह खुद में सिमट गई, जैसे उसे खौफ़ आ रहा हो।
उसकी इस हरकत पर जिहान की आंखें सिकुड़ गईं।
वह उसे khud से डरते हुए देख, बेड के थोड़ा और करीब बढ़ा।
फिर उसके कंधे पर हाथ रख दिया।
इबादत तो उसके हाथ को दूर करने ही वाली थी,
कि जिहान ने उसके कंधे पर अपनी पकड़ और भी मज़बूत कर दी।
वह झुककर धीरे से बोला,
“किस क़दर खौफ़ खा रही हो तुम मुझसे इतना भी क्या डरना हम्मा
इबादत ने कुछ नहीं वो खामोशी से अपनी ड्रिप को देखने लगी जैसे उसके खत्म।होने के इंतजार mei हो उसकी ड्रिप लगभग खत्म।होने वाली थी और खत्म।होते ही उसने बिना कुछ कहे, इबादत ने उसे तुरंत खींचकर निकाल दिया।
जिहान की आंखें गहरी हो गईं।
वह तुरंत उसका हाथ पकड़कर उस पर अपना रुमाल रखता है,
जहां से खून निकलने लगा था। उसने अपने जबड़े कस लिए थे
इबादत ने फौरन अपना हाथ खींच लिया और अपनी जगह से उठ खड़ी हुई।
वह सीधे दरवाज़े की तरफ़ कदम बढ़ाने लगी।
उसके कपड़े पहले से ही बदल दिए गए थे।
उसने अपना दुपट्टा पहले ही गले में डाल रखा था।
दरवाज़े पर पहुंचकर उसने दुपट्टे को पूरी तरह फैलाकर अपने ऊपर ओढ़ लिया।
फिर आहिस्ता से दरवाज़ा खोला और चारों तरफ़ देखने लगी।
वहां कोई भी नहीं था।
उसे याद आया कि जुबेर साहब बाहर जा रहे थे।
वह तुरंत तेज़ी से उनकी तरफ़ भागी और उनका हाथ पकड़ लिया।
जुबेर साहब ने उसे बाहर देख, तुरंत उसका हाथ कसकर थाम लिया फिर परेशानी से बोले,
“तुम बाहर क्या कर रही हो?
मैंने कहा था ना, आराम करने के लिए!”
इबादत वैसे ही उनका हाथ पकड़कर बोली,
“नहीं बड़े अब्बू… मैं ठीक हूं।
घर चलिए।”
वह यह कहते हुए इधर-उधर देखने लगी।
कुछ देर बाद जिहान कमरे से बाहर आया।
उसके बाल माथे पर झूल रहे थे।
शर्ट के कुछ बटन खुले हुए थे और कपड़े मैले लग रहे थे।
उसके चेहरे पर जगह-जगह मिट्टी लगी थी।
वह अब भी कल वाले ही कपड़ों में था।पर उसका चरम अभी भी बिल्कुल वैसा ही था ।। डार्क डोमिनेस और ठंडे जैसे उसके इस लोक को बाया करने के लिए अल्फाज की कमी हो गई हो
वह इबादत को गौर से देख रहा था। उसकी गहरी आंखें इबादत की हर हरकत पर टिकी हुए थी
उसके चेहरे पर घबराहट और डर साफ़ झलक रहा था।
कुछ देर बाद वह सब सीधे फ़ार्महाउस के लिए निकल गए।
हवेली काफ़ी ज़्यादा जल चुकी थी,
जहां पर अभी रहना पॉसिबल नहीं था।
जुबेर साहब जैसे ही इबादत को लेकर फ़ार्महाउस पहुंचे,
इबादत की सास एक पल के लिए ठिठक गईं।
वह इधर-उधर देखते हुए हकलाकर बोलीं,
“बड़े अब्बू हम लोग यहां क्यों आए हैं?
हमें तो हवेली वापस जाना था ना?”
वह प्यार से उनके सर पर हाथ रखते हुए बोले,
“नहीं बेटा, हवेली में आग लग गई थी।
वहां रहना अभी सही नहीं होगा।
पहले सेहत और आराम की ज़रूरत है,तुम्हें
इसलिए हम लोग यहां रहेंगे।”
इबादत चुपचाप फ़ार्महाउस को देख रही थी।
उसके हाथ आपस में उलझे हुए थे।
जिहान, जो अभी-अभी ड्राइविंग सीट से बाहर उतरा था,
इबादत की तरफ़ देखते हुए उसके लिए दरवाज़ा खोलते हुए बोला,
“अब तुम अपने पैरों से चलकर जाओगी,
या फिर चाहती हो कि तुम्हें उठा कर ले जाया जाए?
”
इबादत बिना कुछ कहे आहिस्ता से दरवाज़े से बाहर आई।
वह चारों तरफ़ नजर दौड़ाकर सब कुछ देख रही थी।
जैसे ही उसकी नज़र दरवाज़े पर खड़ी मेहमाल बेगम पर पड़ी,
वह भागकर उनके पास गई और उनके सीने से लग गई।
टूटे हुए लहजे में बोली,
“माफ़ करना… मुझसे ग़लती हो गई।
मेरा इरादा आपको परेशान करने का नहीं था।”अम्मी
मेहमाल बेगम बिना कुछ कहे उसका हाथ थाम लेती हैं।
उन्होंने उसका हाथ अपने होठों से लगाते हुए कहा,
“तुम जानती हो ना, मेरे पास सिर्फ़ तुम हो।
मैं तुम्हें खो नहीं सकती।
अगर मैंने तुम्हें खो दिया, तो मैं ख़त्म हो जाऊँगी,
तबाह हो जाऊँगी।
तुम इतनी-सी बात समझती क्यों नहीं हो?”
इबादत उनकी आंखों से आँसू पोंछते हुए घबराकर बोली,
“आइंदा कभी ऐसा नहीं करूंगी।
आप मुझे डांटा मत करें।
आप मेरे साथ रहिए ना।
अगर आप मेरे साथ रहेंगे,
तो मैं कुछ भी… कुछ भी ग़लत नहीं करूंगी।
पक्का!
और मुझे सच में नहीं पता था कि आग लगी है।
अगर मुझे पता होता,
तो मैं आपको भला अपने कमरे में जाने ही नहीं देती,
और न ही वहां पर ये सब कुछ होता।”
वह घबराकर सब कह रही थी।
मेहमाल बेगम उसे अपने साथ लेकर अंदर आईं
और कपड़े पकड़ाते हुए बोलीं,
“जाओ, जाकर फ्रेश हो जाओ।”
इबादत ने तुरंत उनका हाथ थाम लिया और बोली,
“नहीं, आप चलिए ना मेरे साथ।”
वह उन्हें खींचते हुए ज़बरदस्ती अपने साथ ले गई।
जिहान बस उसे जाता हुआ देखता रह गया।
वह जुबेर साहब की तरफ़ देखते हुए बोला,
“अब्बा , इसे क्या हुआ?
और ये हाई डिप्रेशन की दवाइयां क्यों ले रही है?”
जुबेर साहब धीरे-धीरे उसकी तरफ़ घूमे
और गहरी आवाज़ में कहा,
“तुम्हें सब से मतलब नहीं होना चाहिए।
तुम्हें कोई और लड़की पसंद है।
तुम उसके साथ रहो।
मैंने अपनी बेटी के लिए सोच लिया,
वही करूंगा।
और अब तुम यहां से जा सकते हो।
तुमने रात भर हमारी बहुत मदद की,
उसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया।”
उन्होंने यह ‘शुक्रिया’ ऐसे अदा किया
जैसे उसके मुंह पर फेंक कर मारा हो jihaan, ने उनकी तरफ उसके होठों पर मुस्कान उभरी थी , 😏



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