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जीहां इबादत के कमरे में

जिहान उसके पास जाकर, कंधे पर हाथ रखते हुए सख़्त आवाज़ में बोला

"... तुम? तुम यहाँ क्या कर रहे हो?"

सामने बैठा हुआ लड़का, जिहान की आवाज़ सुनकर एकदम चौंक गया।

वह अपने चेहरे पर आए डर को छुपाने की कोशिश करता हुआ बोला

"अरे यार, मुझे पता चला कि तुम वापस आ गए हो।

तो क्या मैं तुमसे मिलने नहीं आ सकता?

और कोई अपने दोस्त से इस तरीके से मुख़ातिब होता है?

लगता है फ़ौरन जाकर तुम्हें भी बाहर की हवा लग गई है!"

यह कहते हुए वह उठकर खड़ा हो गया।जिहान बिना ज़्यादा कुछ कहे, खामोशी से चेयर पर बैठ गया।

कुछ देर बाद मेहमाल बेगम और जीनत बेगम भी वहाँ आकर डिनर लगाने लगीं।

जुबैर साहब भी आ चुके थे। उनके चेहरे पर अब जाकर मुस्कान लौट आई थी।

हवेली में काम लग चुका था।

वह हवेली को फिर से एक नया लुक दे रहे थे, जिसकी डिज़ाइन इस बार उन्होंने इबादत से ली थी।

इबादत ने पूरा फेवर किया था। यह तक़रीबन 2 साल पहले की बात थी, जब उसने एक नया डिज़ाइन बनाकर सुबह साहब को दिखाया था।

जुबेर साहब उस डिज़ाइन को देखकर बड़े इंप्रेस हुए थे। उन्होंने कहा था

"अगर मुझे कभी मौका मिला, तो मैं बिल्कुल इसी तरीके से हवेली को दोबारा बनवाऊँगा।"

और शायद वही दिन आ गया था।

लेकिन यह सब महज़ इत्तेफ़ाक़ नहीं लग रहा था।

शायद यह किसी की साज़िश थी... जो बहुत ही खूबसूरती से रची गई थी।

जुबेर साहब मुस्कुरा रहे थे।

सबसे बातें करते हुए, उन्होंने अचानक मेहमाल बेगम की तरफ देखते हुए कहा

"इबादत कहाँ है? आप उन्हें बुलाकर लाइए।

हमें उनसे एक बहुत ज़रूरी काम है।"

यह कहते हुए वह डिनर करना शुरू कर चुके थे।

जीनत बेगम भी उनके बगल में आकर बैठ गई थीं।

अब सब लोग डिनर पर, इबादत का इंतज़ार करने लगे।

कुछ देर बाद, पायल की छन-छन के साथ ही नाज़ुक क़दमों की आहट सुनाई दी।

इबादत सीढ़ियों से नीचे उतर रही थी।

जिहान ने पलटकर उसकी तरफ देखा।

उसकी तिरछी नज़रें, इबादत पर आकर ठहर गईं।

न जाने उसके दिमाग़ में कौन-सा फ़ितूर चढ़ा हुआ था।

जब-जब उसने इबादत को देखा, उसका सांसों का बहाव रुक जाता।

उसकी नज़रें उसी पर थम जातीं, जैसे वह कुछ और देखना ही नहीं चाहता था।

उसके बगल में बैठा हुआ कबीर भी, इबादत को ही देख रहा था।

इबादत, जिसने अपने सिर से लेकर नीचे तक दुपट्टा ओढ़ा हुआ था, नज़रें उठाकर पहले तेज़ी से आगे बढ़ रही थी।

पर जैसे ही उसकी नज़र जिहान पर पड़ी, उसके क़दम थम गए।

उसकी स्पीड धीमी हो चुकी थी।

अब वह बहुत धीरे-धीरे चलते हुए आ रही थी।

जिहान के चेहरे पर इस वक़्त थोड़ा सुकून उतर आया।

उसे देख उसकी घबराहट कुछ कम हुई थी।

वह नज़रें चुरा रही थी।

वही जिहान, उसे यूँ घबराता हुआ देखकर तेज़ आवाज़ में बोला

"तुम इतने धीमे क्यों चल रही हो, बेबी एलिफ़ेंट?

इधर आओ, मेरे पास आकर बैठो।"

उसकी तेज़ आवाज़ पर इबादत ने उसकी तरफ़ देखा,

लेकिन उसे नज़रअंदाज़ करते हुए सीधा मेहमाल बेगम के बगल वाली चेयर पर जाकर बैठ गई।

जिहान ठीक सामने बैठा था।

उसके बगल में कबीर मौजूद था।

जुबैर साहब, इबादत को देखते हुए मुस्कुराकर बोले

"बेटा, आपने जो डिज़ाइन्स दी थीं, वो कमाल की थीं।

और अब उन ख्वाबों को पूरा करने का वक़्त आ गया है।

मुझे पता है, आप बहुत ज़्यादा एक्साइटेड होंगी।"

इबादत उनकी बात पर सिर्फ़ सिर हिला देती है।

उसने कुछ भी नहीं कहा।

उसके होंठ ख़ामोश रह गए थे।वह अपनी प्लेट में थोड़ा-सा डिनर निकालते हैं।

उसके हाथ भी अब काँपने लगे थे।

जिहान लगातार उसे देख रहा था।

बल्कि वह खुद आगे बढ़कर उसके प्लेट में खाना डालते हुए बोला

"बेबी एलिफ़ेंट, ये क्या हालत बना रखी है तुमने?

इस तरह तो तुम कमज़ोर हो जाओगी।

ठीक से खाना तो खाया करो।

क्या तुम मुझे इंप्रेस करने के लिए डाइटिंग पर हो?

अरे, मैं तो पहले ही तुमसे इंप्रेस हो चुका हूं।"

वह बहुत ही फ़्लर्टी अंदाज़ में उसे परेशान कर रहा था।

जुबैर साहब उसे घूरते हुए बोले

"मेरी बेटी को परेशान करना बंद करो, और चुपचाप अपने खाने पर ध्यान दो।"

इबादत बिना कुछ कहे, धीरे से एक बाइट बनाकर अपने मुंह में डालने लगी।

तभी उसे ऐसा लगा जैसे किसी का पैर उसके पैर से टच हुआ हो।

उसकी सांस गले में अटक गई।

वह पूरी तरह से खाँसने लगी।

जिहान तुरंत अपनी जगह से उठकर उसे पानी देने लगा।

"तुम... तुम ठीक हो?

आराम से नहीं खा सकती क्या?

इतनी भी क्या जल्दबाज़ी है खाने की?"

यह कहते हुए वह उसे पानी पिलाने लगा।

इबादत बिना कुछ कहे खामोशी से पानी पी रही थी।

लेकिन उसकी नज़र बार-बार कबीर पर जा रही थी।

कबीर होंठों पर शैतानी मुस्कान लिए, आराम से डिनर कर रहा था।

जिहान ने जैसे इबादत की चोरी पकड़ ली थी।

वह उसके चेहरे पर हाथ रखकर, उसकी नज़रें अपनी तरफ़ घुमाते हुए बोला

"उसे क्या देख रही हो?

मेरी तरफ़ देखो... और चुपचाप अपने डिनर पर फ़ोकस करो।"इबादत अभी भी खामोश थी।

उसके हाथ काँप रहे थे और मन जैसे मुश्किल से संभल पा रहा था।

उसे ऐसा लग रहा था जैसे बार-बार कोई उसके पैर को टच कर रहा हो।

उसने नीचे झुककर देखने की हिम्मत भी नहीं दिखाई।

वह घबराई हुई थी।

जिहान उसे लगातार देख रहा था।

इसी बीच इबादत अचानक अपनी जगह से खड़ी हुई और बोली

"मेरा हो गया... ।"

वह तुरंत मेहमाल बेगम की कुर्सी के बगल में जाकर खड़ी हो गई।

वहीं, कबीर की आइब्रो एक तरफ़ उठ गई।

लग रहा था जैसे उनके बीच अभी-अभी कोई झगड़ा हो चुका हो।

वह भी जल्दी-जल्दी अपना डिनर खत्म करने लगा और फिर अपनी जगह से उठते हुए बोला

"मैं बस यहाँ तुमसे मिलने आया था।

बाक़ी हम फिर कभी मिल लेंगे।

अभी मुझे थोड़ा इंपॉर्टेंट काम है।"

यह कहते हुए वह तुरंत वहाँ से निकल गया।

उसके जाने के साथ ही, सबने एक गहरी सुकून भरी सांस ली।

इबादत की साँसें भी उखड़ चुकी थीं।

वह किसी तरह खुद को संभाल रही थी।

उसने एक ठंडी और गहरी सांस भरी।

उसे देखकर साफ़ लग रहा था कि कबीर की मौजूदगी से वह घबराई हुई थी।

उसके जाने के बाद वह कुछ हद तक शांत हो गई।

वहीं, जिहान ने कबीर को जाते हुए बस सिर हिला दिया।

उसे कबीर के साथ रहने में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं थी।

वह उसे बहुत अच्छे से जानता था...

कि वह किस शख़्सियत का मालिक है।वह एक क्लोदिंग इंडस्ट्री का CEO था।

उसकी कंपनी ब्रांडेड कपड़े बनाती थी, जिसके लिए वह आए दिन चर्चा में रहता था।

उसके हर एक डिज़ाइन बहुत महंगे हुआ करते थे।

इसी वजह से वह काफ़ी मशहूर हो चुका था।

उसने शुरुआत शौक़ से की थी,

पर धीरे-धीरे यही काम उसका प्रोफ़ेशन बन गया।

ऐसा नहीं था कि वह कोई आम इंसान था।

वह बहुत पहुँच वाला शख़्स था।

यह तो वक़्त ही बताएगा।

इबादत, कबीर जाने के बाद सुकून से अपनी चेयर पर बैठ गई।

अब उसका खाने से मन उठ चुका था।

कुछ देर बाद, सभी लोग अपने-अपने कमरे में चले गए।

मेहमाल बेगम और जीना बेगम इस वक़्त भी किचन में ही थीं।

तभी जिहान बिना किसी आहट के, सीधा इबादत के कमरे में दाख़िल हो गया।

इबादत अपने बिस्तर पर बैठी, फोन में कुछ कर रही थी।

दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ पर उसने तुरंत सिर उठाकर देखा।

उसने फ़ौरन अपना फोन बंद करके साइड में रख दिया।

जिहान की आँखें सिकुड़ गईं।

वह उसे घूरते हुए बोला

"तुम मुझसे क्या छुपा रही हो, बेबी एलिफ़ेंट?"

यह कहते हुए वह अपने कदम धीरे-धीरे उसकी तरफ़ बढ़ाने लगा।

इबादत के हाथ काँप रहे थे।वह घबरा के बोली "कुछ भी तो नहीं, मैंने आपसे कुछ बोला ही नहीं। आपसे क्या छुपा सकता हूं?"

"पहले आप मुझे यह बताइए, आप यहां इस वक्त क्या कर रहे हैं?" वह बोलते हुए अपनी जगह से खड़ी हो चुकी थी।

Jihaan, तुरंत उसके करीब आता है। उसके हाथ से फोन लेते हुए कहता है, "अपना फोन इधर दिखाओ।"

इबादत अपना सर काफी गुस्से में उठाते हुए कहती है, "हरगिज़ नहीं, मैं आपको अपना फोन क्यों दिखाऊंगी? आप होते कौन हैं इस तरीके से मुझ पर चढ़ने वाले?"

उसने इतना कहा ही था कि jihaan अचानक आगे बढ़कर उसके होठों पर अपनी सख्त उंगली रख उसे खामोश कर देता है।

जीहां की आंखें गहरी और हल्की-हल्की सुर्ख पड़ रही थीं। उसकी वाइब थोड़ी बदल चुकी थी, जिसे महसूस कर इबादत खुद-ब-खुद घबराने लगी थी। उसके हाथ कांपने लगे थे।

कुछ कहते-कहते उसके हाथ से फोन छूट गया और सीधा वहां रखे हुए पानी के जग पर गिर पड़ा।

वह तुरंत अपने फोन को देखने लगी । इबादत की आंखें घबराहट से बड़ी हो चुकी थीं।jihaan बिना किसी एक्सप्रेशन के बस उसे देख रहा था।

वह उसके और करीब आया, अपने चेहरे को झुकाते हुए, डीप और डॉमिनेटिंग वॉइस में बोला

"सोच लेना, बेबी एलिफेंट... अगर तुम मुझसे कुछ छुपा रही हो तो मैं तुम्हारे साथ बहुत बुरा कर सकता हूं। जो भी है, खामोशी से मुझे बता दो।"इबादत उसकी तरफ देखकर नाराज़गी से बोली,

"क्या बकवास कर रहे हैं? मेरे पास बताने के लिए कुछ भी नहीं है। और आप यहां क्या कर रहे हैं? जाइए यहां से, मुझे सोना है।

बार-बार इस तरह मेरे कमरे में आकर मुझे मत जगाइए। आपको कितनी बार बता चुकी हूं, आपकी मौजूदगी में सांस लेना मुश्किल हो जाता है मुझे। इतनी सी बात आपको समझ में नहीं आती क्या?"

उसके बाद हल्की-सी हंसी हंसा, पर उसकी हंसी कोई मामूली हंसी नहीं थी। वह हंसी डराने वाली थी।

Hello cutie to aap mei se kisi ne kaha tha ki dobara ruksati ke bare mei kyuki ibadat ki shadi ke baad use tb hi ruksati kr diya tha but reality mei esa hota h aghr ek baar ruksati ho gai to jb second time mei ek month ya ek saal baad aghr ladhka ladhki ko apne sath lene a raha h to ladhki ko proper ruksat kya jata ha esliye dobara ruksati ki jaygi 🤭 humare side esa hi hota ha to mei full usi trha likh rahi hu kyuki jihaan 2 saal baad wapish aya h 😅

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