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Jihaan ki besarmi ka level

जीहां उसकी बात पर हल्की-सी हंसी हंसा, पर उसकी हंसी कोई मामूली हंसी नहीं थी। वह हंसी डराने वाली थी।

ओर अगले ही लम्हे उसने उसका हाथ पकड़कर उसे अपने करीब खींच लिया और धीमे स्वर में कहा,

"मेरी मौजूदगी में तुम सांस नहीं ले पाती, बेबी एलिफेंट? सोचो... जब सुबह-शाम, हर वक्त तुम्हें मेरे साथ रहना होगा। तुम्हारी सुबह भी मुझे देखकर होगी और तुम्हारी रातें भी मुझे देखकर गुजरेंगी... तब कैसे सांस लोगी?

आदत डाल लो, बेबी एलिफेंट। कहीं ऐसा न हो कि निकाह के बाद तुम्हारी नींद और सुकून सब उड़ जाए।"

वह उसे घूर रहा था।

इबादत ने अपनी सांस रोक रखी थी। उसके होठ मजबूती से अंदर की ओर दबे हुए थे। न वह सांस ले रही थी, न ही हिल रही थी।

Jihaan उसकी इस हरकत पर अपना सर हल्का टेढ़ा करते हुए, डॉमिनेटिंग वॉइस में बोला सांसे रोकने का बहुत शौक है, बेबी एलिफेंट? तो क्यों ना मैं इन सांसों को अपनी तरह से रोक दूं... क्या कहती हो?"

बोलते हुए वह उसके चेहरे को देख रहा था।

उसका पूरा फोकस इबादत के होठों पर था। उसके होठ कांपने लगे।

इबादत ने तुरंत उसकी नजरों की तपिश अपने होठों पर महसूस की। उसकी आंखें हैरानी से बड़ी हो गईं।

वह झटके से उसकी पकड़ से छूट गई और गुस्से से बोली,

"यह क्या बदतमीज़ी है? आपको समझ नहीं आता आप क्या कह रहे हैं?"

इतना कहकर वह उससे दूर हो गई। उसकी सांसें तेज थीं। वह इधर-उधर देखने लगी, घबराई हुई।

उसे डर इस बात का नहीं था कि jihaan उसे धमकी दे रहा है। उसे डर इस बात का था कि jihaan उस धमकी को हकीकत में बदलने में देर नहीं लगाएगा।

जिहान उसकी सख्त रुखसार, घबराई हुई आंखें और फड़फड़ाते होठों को गौर से देख रहा था।

अचानक उसकी हंसी की आवाज पूरे कमरे में गूंज उठी।

इबादत घूमकर उसे देखने लगी। वह बिना वजह हंस रहा था।

इबादत ने भौंहें चढ़ाते हुए कहा,

"आप अब हंस क्यों रहे हैं? मैंने कोई जोक नहीं मारा।"

जिहान ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा,

"चलो मेरे साथ... मुझे तुम्हें कहीं लेकर जाना है।"

इबादत ने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया, सिर नफी में हिलाते हुए बोली,

"मुझे... मुझे आपके साथ कहीं नहीं जाना। छोड़िए मेरा हाथ!"पर जिहान मानने वालों में से कहां था। उसकी ज़िद हमेशा सबसे ऊपर रहती थी।

वह आगे की तरफ बढ़ा। इबादत बस उसके हाथ पर मारते रह गई।

वह चीखना चाहती थी, पर इससे पहले कि उसकी आवाज़ बाहर निकलती,

जिहान ने उसके होठों पर हाथ रख दिया और तुरंत उसका मुंह कैद कर लिया।

वह जबरदस्ती उसे खींचते हुए फार्महाउस से बाहर ले आया।

जबरदस्ती इबादत को पैसेंजर सीट पर बैठाया और खुद ड्राइविंग सीट पर आकर बैठ गया।

उसने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया।

इबादत बार-बार दरवाज़ा खोलने की कोशिश कर रही थी,

पर हर बार नाकाम हो रही थी।jihaan उसे खुद से दूर जाने का एक पल का भी मौका नहीं दे रहा था।

कुछ देर ड्राइव करने के बाद,

वह फार्महाउस से थोड़ी दूरी पर ही पहुंच चुका था।

इबादत गुस्से और डर में उससे कह रही थी,

"मेरा हाथ छोड़ो! मुझे आपके साथ कहीं भी नहीं जाना।

आपको मेरी बात समझ में नहीं आ रही है क्या?"

जिहान ने सर घुमाकर उसकी तरफ देखा।

फिर अचानक गाड़ी को साइड में रोक दिया।

इबादत रुकी हुई गाड़ी को देख हैरान रह गई।

वह छोटी-सी आंखों से उसे घूरने लगी।

Jihaan खामोश था। उसने हल्के से अपना सर टेढ़ा किया।

उसका एक हाथ विंडो पर टिका हुआ था,

दूसरे हाथ की दो उंगलियां स्टेयरिंग पर रखी हुई थीं।

उसके बाल थोड़े बिखरे हुए थे,

जो हल्के से उसके माथे पर गिर रहे थे।

उस पल वह बेहद हसीन और खतरनाक लग रहा था।

वह वैसे ही उसे ठंडी निगाहों से देखते हुए बोला,

"अगर तुम्हें अपनी सीट पर बैठने में इतनी दिक्कत महसूस हो रही है,

तो तुम मुझे कह सकती हो।

मैं तुम्हें आराम से अपनी गोद में बिठा सकता हूं...

और मुझे इसमें कोई दिक्कत भी नहीं होगी, बेबी एलिफेंट।"

बोलते हुए उसने अपनी lep की तरफ इशारा कर दिया।

इबादत उसकी तरफ देखने लगी।

उसके पैरों की ओर जाते ही उसका चेहरा गुस्से से लाल हो उठा।

वह हाथ उठाते हुए, गुस्से में चिल्लाकर बोली—

"शट अप, ब्लडी इडियट!"

जिहान हल्की मुस्कान के साथ बोला,

"Same to you, बेबी एलिफेंट।

लेकिन तुम मुझे अपने डैडी बनने पर मजबूर मत करना।

क्योंकि बच्चे ही तो गोद में बैठते हैं...

और वैसे भी गोद में बैठने के लिए तुम अभी कुछ ज़्यादा बड़ी तो हुई नहीं हो।"

उसकी टेढ़ी मुस्कान और आंखों की चमक पास आती चली गई।

इबादत का तो जैसे खून खौल उठा।

वह बस दांत पीसते हुए उसे घूरती रह गई।

यह आदमी हर बार उसके साथ इतनी डिटेल से कैसे खेल सकता था?

आखिरकार, बिना कुछ कहे वह चुपचाप जाकर अपनी सीट पर बैठ गई। Jihaan से बात करना अपने आप को दीवार से टकराने जैसा था।

जीहां ने उसे खामोश देखकर एक बार फिर इंजन स्टार्ट कर दिया।

इबादत का चेहरा दर से ही फीका पड़ गया था। उसकी नज़रें चारों तरफ घूम रही थीं। उसने अपने दुपट्टे को साइड से लिया और अपने हाथ को हल्के से दुपट्टे से ढक लिया।

Jihaan, जो अभी सिर्फ गाड़ी का दरवाज़ा बंद कर रहा था और उसके लिए खोल रहा था, उसकी हरकत पर इबादत की आँखें सिकुड़ गईं।

उसने उसके हाथों की तरफ देखा। वह अपने दोनों हाथों को लगातार जोड़ते हुए, उंगलियों को आपस में मिला रही थी। उसकी उंगलियाँ सुर्ख पड़ रही थीं। पर मंज़र वही था वह बार-बार आसपास के लोगों को देख रही थी।

वह भीड़, वह मज़मा… उसे ऐसा लग रहा था जैसे ख्वाब देख रही हो। जिससे उसे खौफ आ रहा हो

Jihaan, पूरे हक़ से उसने उसकी गोद में रखे हुए नाज़ुक से हाथ को पकड़ा और अपने बड़े से हाथ में ले लिया। फिर पूरे हक़ से उसे गाड़ी से उतारते हुए कहा

“तुम्हें इन लोगों से घबराने की ज़रूरत हीं है। मैं हूँ न तुम्हारे साथ। तुम्हारे लिए मैं ही काफ़ी हूँ।”

इबादत फिर भी उसे देख तक नहीं रही थी। उसकी नज़रें इधर-उधर भटक रही थीं। वह हकलाते हुए बोली

“आप मुझे ऐसे ही यहाँ ले आए… मुझे मेरी चादर तो लेने देते। आप ऐसा कर भी कैसे सकते हैं? लोग कैसे देख रहे हैं मुझे…”

वह बुरी तरह डरी हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसे देख लेगा, तो उसी वक़्त उस पर आज़ाब नाज़िल हो जाएगा।

जीहाँ, जो उसके ठीक सामने खड़ा था… उसके खड़े होने की वजह से इबादत का नाज़ुक वजूद उसकी मज़बूत पर्सनालिटी के आगे पूरी तरह से छिप चुका था। वह किसी को नज़र तक नहीं आ रही थी।

जीहाँ, एक हाथ गाड़ी के ऊपर रखे हुए, उसके चेहरे पर झुककर अजीब से अंदाज़ में उसने कहा

“औरत का पर्दा उसका शौहर होता है… और मेरी मौजूदगी में तुम्हें किसी दूसरे पर्दे की ज़रूरत नहीं। क्योंकि तुम्हारी तरफ उठने वाली हर निगाह को मैं निकाल दूँगा। तुम्हें बस मेरे साथ रहना है।”

बोलते हुए उसने उसका हाथ मजबूती से थामा हुआ था। इबादत, जो डरी हुई इधर-उधर देख रही थी, उसकी नज़रें एक पल के लिए ठहर गईं।

वह आहिस्ता से अपनी नज़र उठाकर उसे देखने लगी। जीहाँ, उसकी सिल्वर-ग्रे आँखें उसे अपने चेहरे पर ही टिकी हुई महसूस हुईं।

वह एकटक उसे देख रही थी। वह पलकों को झुकाना भूल गई थी। पर जिहान की नज़रों की शिद्दत ऐसी थी कि इबादत उसकी आँखों में ज़्यादा देर तक देख नहीं पाई और उसकी पलके खुद-ब-खुद झुक गईं।

क्या था वह एहसास?

खबर नहीं… पर वह कितनी खूबसूरत लग रही थी। शर्म से झुकी हुई, पर्दे के पीछे छिपी नज़रें।

गाड़ी पर रखा हुआ हाथ, इबादत के सिर के पीछे आया। और उसके माथे पर, उसने शिद्दत से अपने सख़्त होंठ रख दिए।

इबादत की आँखें बंद थीं। उसे महफ़ूज़ महसूस हो रहा था… जैसे वह किसी ऐसे इंसान के पास है जहाँ से किसी चीज़ से डरने की ज़रूरत नहीं।

पर वह अनजान नहीं थी कि यही वही शख़्स था, जिसकी वजह से वह इस हालत में थी।

तुरंत उसने उसके सीने पर हाथ रखा और खुद से दूर धकेलते हुए अपने अंदाज़ में बोली

“आप मुझे यहाँ किस लिए लेकर आए हैं?”

उसका अंदाज़ अगले ही लम्हे बदल गया। Jihaan, उसकी नज़रें हल्के से उठीं और उसे देखते हुए, उसका हाथ पकड़कर अंदर की तरफ कदम बढ़ाते हुए बोला

“भूख लग रही है… मुझे तो बस अकेले आना का मन नहीं था। इसलिए सोचा, तुम्हें ही उठा लाऊँ। इतना सब कर ही सकते हो न तुम? आफ्टर ऑल, बीवी जो हो मेरी।”

इबादत ने अपनी आँखें मजबूती से बंद कर लीं। वह कदम-दर-कदम उसके साथ चल रही थी, पर उसने अपनी नज़रें बंद ही रखीं।

वह नफ़रत का दावा कर रही थी… इज़हार-ए-नफ़रत का ऐलान कर चुकी थी। मगर न जाने यह कैसा एहसास था… कि वह आँखें बंद किए, कदम से कदम मिलाकर उसके साथ चल रही थी।

जिहान की नज़रें उसी पर टिकी हुई थीं। लाखों लोग आसपास मौजूद थे, इतने प्यारे से नज़ारे को देख सकते थे… मगर जिहान की मौजूदगी में किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि उसकी तरफ नज़र उठा सके।एक मर्द की शख़्सियत ही ऐसी होनी चाहिए कि उसके होने पर उसकी बीवी पर कोई नज़र न उठ सके।

कुछ हालात ऐसे ही थे। जहाँ जिहान की मौजूदगी में इबादत महफ़ूज़ महसूस कर रही थी, वहीं लोगों की नज़रें भी उस पर नहीं उठ रही थीं।

वह उसे सीधे एक प्राइवेट रूम के अंदर ले आया। यह एक फाइव-स्टार लग्ज़री होटल था।

वह आराम से इबादत को उसकी सीट पर बैठाता है। इबादत ने चारों तरफ नज़र डाली। पूरी जगह खाली थी।

सिर्फ़ ग्लास विंडो थीं, जो पूरी दीवार को ढक रही थीं। उनके ठीक सामने बहुत ही खूबसूरत सा गार्डन सजाया गया था। वह नज़ारा बेहद दिलकश था।

इबादत वह सब देख रही थी और फिर चुपचाप, खामोशी से अपनी चेयर पर बैठ गई।

उसे बस किसी भी तरह यहाँ से निकलना था। न तो उसे खामोशी ज़्यादा देर तक पसंद आती थी और न ही लोगों की चहल-पहल।

उसे बस अपने अपनों के आसपास रहना अच्छा लगता था। या यूँ कहें, उसने अपने लिए कुछ दायरे बना लिए थे।

Hello cutie to sab se pehle ki akhir ibadat ko hua kya ha aghr ye chij pta chal gai to samjh lena story apne end pr hai jo ki abhi nahi hai or second ruksati ki baat to wo bhi pr usse pehle bhi bahut kuch hai jise clear Krna bahut jaruri to ye dono chij hi thode time ke baad hogi to bs saber rakhiye sab kuch dhime dhime hoga pr usse pehle jihaan ki jalan or gusse se bhare kuch seen hai jiske baad hi ibadat kuch clear kregi kul mila kr bhut kuch baki hai abhi story mei to bs read kriye comment kriye or mje kriye sab kuch hoga pr ek time pr or ha kl do episode diye the to comment km hue hai esliye ab ek hi episode ayega ☺️

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