जिहान कुछ देर तक उसे देखता रहा। फिर उसकी तरफ बढ़ते हुए बोला
“पहली और आख़िरी बार पूछ रहा हूँ… तुम तो जानती हो मुझे। कुछ खाना है तो बता दो। अगर नहीं, तो इंकार में सिर हिला दो।”
उसने कुछ नहीं कहा था।Jihaan, उसने एक नज़र इबादत पर डाली और फिर वेटर की तरफ इशारा किया, जो उसके सामने ही खड़ा था।
वह मेन्यू की तरफ देखते हुए बोला
“एक ग्रिल सैंडविच, चीज़ पास्ता, कोल्ड कॉफी, स्वीट कॉर्न, बटरस्कॉच केक, चिकन फ्राई, चिकन रोल, चिकन मोमोज और फ्राइज़ के साथ एक्स्ट्रा पनीर टिक्का।
एक बटरस्कॉच आइसक्रीम, वैनिला केक और लास्ट में एक सॉफ्ट ड्रिंक भी ले आना।”
इतना बोलकर उसने अपने फोन को निकाला और स्क्रॉल करने लगा।
वहीं इबादत चारों तरफ देख रही थी। उसका ध्यान किसी चीज़ पर नहीं था।
कुछ देर बाद वेटर आकर पूरा खाना टेबल पर सजा देता है।
इबादत ने एक नज़र खाने पर डाली। उसके मुँह में हल्का-सा सलाइवा आ गया। मुँह में पानी भर आया था, पर उसने सबको नज़रअंदाज़ कर दिया और जिहान की तरफ देखने लगी।
जिहान आराम से बिरयानी निकालकर खाना शुरू कर चुका था। उसने एक बार भी इबादत से नहीं पूछा।
इबादत अब उसे घूरने लगी थी। पर जीहाँ, वह जिहान था ना… भला कैसे अपनी तीखी तलवार जैसी ज़ुबान को दोबारा तकल्लुफ़ में डालता।
उसने थोड़ी-सी बिरयानी खाई और फिर थोड़ा पास्ता। उसके बाद अपने मुँह को टिश्यू पेपर से साफ़ करते हुए बोला
“चलो, मेरा हो गया।”इबादत की आँखें हैरानी से बड़ी हो गई थीं।
वह बड़ी-बड़ी आँखों से उसे देख रही थी।
क्या मतलब? उसने यह सारा खाना… यह सारा khana yu ही वेस्ट कर दिया?
जीहां उसकी इन नजरों को समझते हुए उसकी तरफ देखते हुए वअजीब से अंदाज़ में बोला
“ओह कम ऑन… तुम्हें नहीं खाना तो मत खाओ। मेरा पेट फुल हो गया है तो मैं क्या करूँ? मुझे पसंद नहीं आया था, दैट्स इट। और मैं पे कर रहा हूँ न, तो तुम इतना क्यों भड़क रही हो?”
इबादत उसकी तरफ देखती रही और अपने दाँत भींचने लगी।
“या खुदाया…” उसने सिर्फ़ अपने मन में यही कहा।
फिर उसने खुद जिहान के सामने रखी हुई प्लेट अपनी तरफ खींची और खाना शुरू कर दिया।
उसने जिहान की तरफ एक नज़र भी नहीं डाली, न ही कुछ कहा। वह बस एक के बाद एक बड़े-बड़े बाइट्स लेती जा रही थी।
कभी पास्ता खाती, कभी मोमोज। कभी डेज़र्ट की तरह आइसक्रीम और केक। बस लगातार खाती ही जा रही थी।
जिहान वहीं बैठा अपने सर को हाथ पर टिकाए, उसे देख रहा था। उसकी नज़रें इबादत पर टिकी थीं।
इबादत उसकी नज़रें खुद पर महसूस कर रही थी, पर उसने एक बार भी सिर उठाकर उसे नहीं देखा।
खाते-खाते जिहान बोला
“मेरे इंपॉर्टेंट कॉल है। यही रहना, कहीं जाना मत। पाँच मिनट में आता हूँ।”
इबादत के हाथ रुक गए। वह वैसे ही नज़र उठाकर उसे देखने लगी।
उसके मुँह में नूडल्स भरे हुए थे। कुछ नूडल्स उसके होंठों से बाहर लटक रहे थे। उसका छोटा-सा मुँह गुब्बारे की तरह गोल हो गया था।
वह वाक़ई बहुत क्यूट लग रही थी।
Jihaan, उसने एक नज़र इबादत पर डाली और उसके सर को हल्के से थपथपाते हुए बाहर चला गया।
इबादत, जो अभी तक पूरे मज़े से खाना एंजॉय कर रही थी, अब जल्दी-जल्दी खाने लगी। उसकी नज़रें बार-बार चारों तरफ घूम रही थीं।
उसे इन सुनसान दीवारों से भी खौफ़ आने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे अभी कोई आएगा और उसे पकड़ लेगा।
उसके माथे पर पसीने की बूंदें चमकने लगीं। उसने जल्दी से रखी हुई कोल्ड ड्रिंक उठाई और एक ही सांस में पी गई।
इसके बाद वह अपनी जगह से खड़ी हो गई। जिहान को देखने के लिए जैसे ही कमरे से बाहर निकली, उसकी नज़र वहां मौजूद दो लड़कों पर पड़ी।
वे कुछ दूरी पर बैठे हुए थे और बीच में लगी हुई ग्लास विंडो से उसे घूर रहे थे।
वह उनकी नज़रों को काफी देर से महसूस कर रही थी। उसी खौफ़ से वह तुरंत उठकर बाहर आई थी।
पर जिहान को आसपास कहीं न देखकर, वह और ज़्यादा घबरा गई।
जल्दी से वापस कमरे में आकर, दरवाज़ा बंद कर दिया और अपनी सीट पर बैठ गई।
वह तिरछी नज़रों से बार-बार बाहर देख रही थी। उन लड़कों की नज़रें उसे कुछ ठीक नहीं लग रही थीं।
ऐसा महसूस हो रहा था मानो उनकी नज़रों में कोई अजीब-सा इरादा छिपा है।
इबादत ने घबराकर अपना दुपट्टा और कसकर खुद के चारों ओर लपेट लिया।उसका चेहरा डर से पीला पड़ गया था। वह खुद को संभालने की कोशिश कर रही थी कि तभी उसे ऐसा लगा, जैसे किसी ने अपनी सख़्त उंगलियाँ उसके कंधे पर रख दी हों।
धीरे-धीरे नज़र उठाकर देखा तो उसकी आँखें डर से भरी हुई थीं। जैसे ही उसकी नज़र जिहान पर पड़ी, वह एकदम सख़्त होकर खड़ी हो गई।
तुरंत जिहान ने उसे सीने से लगा लिया। इबादत डरते हुए कह रही थी
“घर… घर चलो। मुझे घर जाना है। मुझे यहाँ नहीं रुकना।”
जिहान, जिसके हाथ अभी जेब में थे, एकदम से ठिठक गया। उसने धीरे से अपना हाथ उसके पीठ पर रखा और हल्के से थपथपाया।
उसे समझ नहीं आया कि आखिर इबादत डर किस बात से रही थी उसके दूर जाने से, या फिर यहाँ सचमुच कुछ हुआ था?
वो बिना कुछ कहे, पूरे हक़ से उसका हाथ पकड़कर वह उसे बाहर की तरफ ले जाने लगा।
“रिलैक्स… कोई नहीं। मैं हूँ न।” कहते हुए वह उसे बाहर ला रहा था।
तभी उसकी नज़र टेबल पर बैठे हुए उन दो आदमियों पर पड़ी, जो पहले से ही इबादत को घूर रहे थे।
इबादत तुरंत जिहान के पीछे छिप गई।
जिहान ने एक नज़र इबादत पर डाली, फिर उसका हाथ कसकर उसकी कमर में डालकर उसे अपने और करीब कर लिया।
उसकी जानलेवा नज़रें अब उन दोनों आदमियों की तरफ घूम चुकी थीं।
उसकी आँखें, जो अभी तक ठंडी थीं, उन आदमियों की निगाहें देखते ही लाल हो गईं।
वह उन्हें सिर्फ़ अपनी आँखों से ही जानलेवा इशारा कर चुका था।
यह सोचते ही उन दोनों आदमियों की नज़रें खुद-ब-खुद झुक गईं
, जिहान इबादत को लाकर गाड़ी में बैठा देता है और खुद दूसरी साइड जाकर ड्राइवर सीट पर बैठ जाता है।
इबादत डरी हुई थी। वह बाहर की तरफ देख रही थी। उसने जिहान से कुछ भी नहीं कहा था।
Jihaan, उसकी खामोशी पर उसकी तरफ झुकने लगा।
इबादत उसे देख तक नहीं रही थी। लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ कि जिहान बेहद करीब आ चुका है, उसने नज़र उठाकर उसकी तरफ देखा।
उन दोनों के होंठों के बीच हल्का-सा फासला था। अगर कोई ज़रा-सा भी हिलता, तो दोनों के होंठ आपस में छू सकते थे।
इबादत एकदम से पीछे हट गई।
जिहान उसे डरते हुए देख रहा था। उसकी आँखें गहरी और ठंडी थीं। उनमें इतनी गहराई उतर आई थी कि कहना मुश्किल था वह सोच क्या रहा है।
वह बस इबादत के नाज़ुक वजूद को देख रहा था। उसका चेहरा डर के मारे लाल पड़ चुका था।
उसकी आँखों में खौफ़ था, होंठ डर से काँप रहे थे, और माथे पर ठंडा पसीना झलक रहा था।
जिहान ने झुककर उसकी सीट बेल्ट लगाई। फिर उसके माथे पर आहिस्ता से अपना अंगूठा रख दिया।
इबादत ने नज़र उठाकर ऊपर देखा।
जीहाँ, बिना कुछ कहे, खामोशी से अपनी जगह पर वापस आकर बैठ गया और गाड़ी स्टार्ट कर दी।
उन दोनों के बीच गहरी खामोशी छा गई थी।इबादत बाहर की तरफ देख रही थी। ठंडी हवाएँ और खूबसूरत नज़ारे देखते-देखते वह गहरी नींद में जा चुकी थी।
जीहाँ, जो पहले स्पीड से गाड़ी चला रहा था, अब उसने स्पीड बहुत स्लो कर दी। कहीं नींद में इबादत की आराम खराब न हो जाए यही फिक्र उसे लगी हुई थी।
कुछ देर बाद उसकी गाड़ी फ़ार्महाउस के पास आकर रुकी। उसने इबादत की तरफ का दरवाज़ा खोला।
इबादत गहरी नींद में थी। उसका दुपट्टा सिर से खिसक चुका था। उसके लंबे ज़ुल्फ़ें चेहरे पर आ रही थीं। मासूम सा चेहरा नींद में भी डरा हुआ लग रहा था।
वह आहिस्ता से उसका सिर थामकर तुरंत अपनी बाहों में उठा लेता है और अंदर की तरफ कदम बढ़ा देता है।
उसने कुछ भी नहीं कहा। खामोशी से इबादत को उसके कमरे में लाकर, बेड पर लिटा दिया। अच्छे से ब्लैंकेट ओढ़ाकर, कमरे से बाहर चला गया।
Next morning,
इबादत की आँखें बहुत आहिस्ता से खुलीं। सूरज निकल चुका था।
जब उसके कानों में कोई आवाज़ गूँजी, तो वह एकदम से चौक कर उठ बैठी।
इबादत के लिए तो tahajud की नमाज़ कभी छूटी नहीं थी, मगर आज की रात वह कैसे इतनी गहरी नींद में सो गई… उसे अहसास तक नहीं हुआ।
उसे लगा जैसे कुछ ग़लत है।
इधर-उधर देखते हुए, कमरे को खाली पाया। अकेलेपन का एहसास होते ही उसकी ज़ोरदार चीख निकल गई।उसके चिल्लाने से घर के सभी लोग दौड़ते हुए कमरे में आए।
इबादत, जो दरवाज़ा खोल रही थी, बुरी तरह से सामने खड़े जिहान से टकरा गई। उसका सर सीधा जिहान के सीने पर लगा।
उसने अपना चेहरा दोनों हाथों से ढक लिया।
जिहान उसके हाथ पकड़ते हुए बोला,
"तुम्हें क्या हुआ? तुम इतनी तेज़ क्यों चीखी?"
इबादत, जो खुद को अकेला महसूस कर बुरी तरह घबरा गई थी, अब और तेज़ी से अपने चेहरे पर चोट का अहसास करने लगी।
उसने तुरंत जिहान को दूर धकेला और उस पर चिल्लाते हुए कहा,
"आपका दिमाग खराब हो गया है क्या? इस तरीके से दरवाज़े के सामने कौन खड़ा होता है?"
बोलते हुए उसने मुश्किल से सांस ली। उसकी नाक में तेज़ दर्द हो रहा था।
जिहान ने आँखें गोल-गोल घुमाईं।
वहीं मेहमाल बेगम, जो उसके चिल्लाने से सीधा ऊपर आई थीं, उसे घूरते हुए बोलीं,
"तुम इतना चिल्ला क्यों रही हो?"
इबादत तुरंत उनके हाथ पकड़कर उन्हें कमरे के अंदर ले आई और बोली,
"आप मुझे अकेला क्यों छोड़ गईं? आपको पता है ना, मैं अकेले नहीं सो पाती। आप कहाँ थीं?"
मेहमाल बेगम परेशान होकर कहती हैं,
"बेवकूफ़ लड़की, तुम ही तो खुद यहाँ पर सो रही थी।"इबादत को एहसास हुआ कि वह तो गाड़ी में ही सो गई थी।
पर वह अपने कमरे में कब आई?
उसने जिहान की तरफ देखा।
जिहान ने उसे घूरकर गोल घूमती आँखों से देखा और टेढ़ी मुस्कान के साथ बोला,
"छोटी अम्मी , मेरा ब्रेकफ़ास्ट जल्दी से रेडी कर दीजिए।
मुझे कॉलेज के लिए लेट हो रहा है।
वहीं से मैं ऑफिस जाऊँगा।"
इबादत उसे घूरने लगी।
मेहमाल बैग जाने ही वालो थी कि इबादत ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"मम्मी, आप कहाँ जा रही हैं?
रुकिए ना, मुझे भी कॉलेज के लिए लेट हो रहा है।
मैं रेडी कैसे होऊँगी?"
महमाल बेगम उसे घूरते हुए बोलीं,
"जिहान है ना, बगल वाला ही रूम है।
इतना घबराने की ज़रूरत नहीं है।
तुम्हें कोई भूत खाने नहीं जाएगा।
अब जल्दी से तैयार होकर आ जाओ, ठीक है?"
इबादत उनकी तरफ देखती रह गई।
वह मजबूर हो चुकी थी।
जीहाँ, उनके जाने के बाद एक कदम इबादत की तरफ बढ़ा देता है ।
इबादत उसे अपनी तरफ आते देख पीछे हट गई।
जिहान दो कदम और आगे आया।
उसकी हरकत पर इबादत सहमकर उसे घूरने लगी।
वह एक कदम और पीछे हटने ही वाली थी कि जिहान ने तुरंत उसकी कलाई पकड़ ली।



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