09

Torcher

रात का वक्त,

अग्निहोत्री मेंशन,

आज भी घर में काफी गहरी शांति छाई हुई थी, पर इस शांति के बीच बहुत ही मासूमियत से भरी हुई किसी के खिल - खिलाने की आवाज आ रही थी ।

तभी घर के गाड़ी पोर्च में एक चमचमाती हुई गाड़ी आकर रुकती है । उसके साथ ही गेट तुरंत खुलता है, और एक शख्स अपनी रॉयल पर्सनालिटी के साथ बाहर आता है । उसके चमचमाते कदम आगे की तरफ बढ़ रहे थे ।

वह कोई और नहीं, अववेयान था, जो अंदर की तरफ तेजी से बढ़ रहा था । उसके चेहरे पर कोल्डनेस बरकरार थी, आंखें बहुत ही ज्यादा गहरी थी । बाल उसके माथे पर झूल रहे थे और कुछ पानी की बूंदें उसके चेहरे पर लगी हुई थीं ।

उसी के पीछे कियान चल रहा था । कियान ने उसे इतनी तेजी से जाते हुए देखा । उसकी नजर डाइनिंग टेबल पर चली जाती है । उसे ऐसा लग रहा था, जैसे कोई वहां मौजूद है, पर वहां किसी को ना देखकर वह सीधा अपने कमरे की तरफ बढ़ जाता है ।

वहीं अभियान सीधा आर्यन के कमरे की तरफ कदम बढ़ाता है । उसकी नजर सीधा आर्यन पर जाती है, जो अपने चेहरे पर प्यारी - सी स्माइल लिए बार - बार एक छोटे से बॉक्स को हिट कर रहा था ।

और उसके सामने चाहत बैठी थी, जिसके चेहरे पर बहुत ही प्यारी - सी मुस्कुराहट थी । वह भी बार - बार एक छोटे से प्लास्टिक के बॉक्स को हिट कर रही थी ।

अववेयान गौर से दोनों को देखने लगता है । उसकी नजर चाहत पर कुछ गहरी हो जाती है । तभी उसे आर्यन की बहुत ही मीठी और महीन आवाज सुनाई देती है ।

अववेयान आर्यन की तरफ देखने लगता है, जिसके हाथ में अंडा चिपका हुआ था । वहीं चाहत खिलखिलाकर हंस रही थी । आर्यन के चेहरे के एक्सप्रेशन बहुत ही बुरे थे ।

और चाहत हंसते हुए एक नैपकिन उठाकर आर्यन के छोटे से हाथ को पकड़कर उसे साफ करती है और कहती है, " देखा, मैंने कहा था ना कि मैं जीत जाऊंगी, और तुम हार गए ।"

बोलते हुए वह हंसने लगती है । आर्यन के चेहरे पर गुस्सा उतर आता है, उसकी आंखें लाल हो जाती हैं और वह फिर से एक अंडा उठाता है और टेबल के बीचो - बीच रखते हुए कहता है, " एंजेल, अब मैं आपको पक्का हरा दूंगा ।” और वह एक प्लास्टिक के बॉक्स से अंडे को ढक देता है ।

चाहत उसकी बात पर उसके गालों को खींचते हुए कहती है, " नहीं, अब बस बहुत हुआ । अब चलो, मैं तुम्हारे लिए ओट्स लेकर आती हूँ । तुमने कुछ खाया नहीं है ना ? और फिर दवाई भी लेनी है ।"

जल्दी से उसका हाथ पकड़ते हुए, वह एक छोटे से जिद्दी बच्चे की तरह जिद करते हुए कहता है, " नहीं, पहले गेम पूरा होगा ।"

चाहत उसकी बात पर हार मान लेती है, और फिर वो दोनों एक बार फिर से डिब्बे को हिट करने लगते हैं । आर्यन जल्दी से अपने दोनों हाथों से प्लास्टिक के डिब्बे को हटा देता है और इस बार अंडा सीधा चाहत के हाथ पर लग जाता है । उसका हाथ पूरी तरह से गीला हो चुका था ।

आर्यन के चेहरे पर विनिंग स्माइल आ गई थी । वह जल्दी से खड़े होकर चाहत के पास आता है और अपनी छोटी - छोटी बाहें उसके गले में डालकर प्यार से उसके गाल पर किस करते हुए कहता है, " मैं जीत गया एंजेल, मैं जीत गया! देखा ना, मैंने आपको हरा दिया । आर्यन स्ट्रॉन्ग बॉय है!"

चाहत झूठ - नाराजगी का उदासी से उसे देखती है, और आर्यन प्यार से उसके गालों को खींचकर उसके गाल पर किस कर लेता है । वह उसे अपनी बाहों में जकड़ लेती है, और वो दोनों इस वक्त किसी मां - बेटे से कम नहीं लग रहे थे ।

चाहत उसे अपनी गोद में उठाने लगती है, पर उसे आंखों के सामने थोड़ा अंधेरा - सा महसूस होने लगता है । उसके पैर हल्के से लड़खड़ाते हैं ।

पर वह जल्दी से आर्यन को संभालते हुए उसे बेड पर बैठा देती है और कहती है, " अच्छा ठीक है, अब मैं आपके लिए ओट्स लेकर आती हूँ, उसके बाद आप अच्छे से सोएंगे ।"

आर्यन छोटे बच्चों की तरह हां मे सिर हिला देता है ।

चाहत जैसे ही पीछे पलटती है, उसकी नजर सीधा अववेयान की ओशियन ब्लू आंखों से टकराती है । उसके चेहरे की सारी खुशी गायब हो जाती है, और वह जल्दी से अपनी नजर नीचे कर लेती है । वह अपने दुपट्टे को ठीक करने लगती है ।

ये देखकर अववेयान की आंखें छोटी हो जाती हैं, और वह कमरे के अंदर की तरफ कदम बढ़ाता है । चाहत को पूरे कमरे में ठंड का एहसास होता है ।

अववेयान का औरा बहुत ही डोमिनेटिंग और डार्क था । चाहत अपना सिर एकदम नीचे कर लेती है उसे अपना गला सूखता हुआ महसूस होने लगता है ।

अववेयान बिल्कुल उसके नजदीक आ जाता है । चाहत अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिलती । अववेयान उसके हाथ को हल्का - सा टच करते हुए सीधा आर्यन के पास आ जाता है ।

आर्यन, जिसके चेहरे पर कुछ पल पहले खुशी थी, अब उसका चेहरा एकदम एक्सप्रेशन लेस हो चुका था । वह बिना कुछ कहे वैसे ही खामोशी से बैठा रहता है ।

चाहत पीछे की तरफ कदम बढ़ाती है कि तभी आर्यन उसका दुपट्टा पकड़ लेता है । चाहत डर से आर्यन की तरफ पलटती है, और आर्यन जल्दी से अपना सिर झुका लेता है ।

चाहत घबराई हुई अववेयान की तरफ देखती है, और अववेयान उन दोनों की आंखों मिचौली देख रहा था ।

वह आर्यन के सिर को सहलाते हुए उसके माथे पर हल्के से अपने होंठ रखता है और शांत आवाज में कहता है, " तुम रेस्ट करो । मैं तुमसे मॉर्निंग में मिलूंगा, उसके बाद हम दोनों वॉक पर चलेंगे ।"

आर्यन उसकी बात का कोई जवाब नहीं देता और अपना चेहरा फेर लेता है । अववेयान अपनी जगह से खड़ा हो जाता है और चाहत की तरफ देखते हुए कहता है, " मेरे लिए कॉफी लेकर आओ ।"

चाहत जल्दी से अपना सिर हिला देती है । अववेयान सीधा अपने कमरे की तरफ कदम बढ़ाता है । उसके चेहरे पर गुस्सा साफ जाहिर हो रहा था ।

चाहत कॉफी बनाने के लिए रसोई की तरफ बढ़ती है । तभी उसके कानों में लैंडलाइन के रिंग करनी की आवाज सुनाई देती है । वह इधर - उधर देखती है, पर घर पर कोई नहीं था, इसलिए वह धीरे कदमों से सीधा लैंडलाइन के पास जाती है और फोन उठाकर कान से लगाती है । दूसरी तरफ से लगभग चिल्लाने की आवाज आ रही थी ।

चाहत एकदम घबरा जाती है । दूसरी तरफ से एक औरत चिल्लाते हुए कहती है, " हम लोग कल घर आ रहे हैं, और अगर ज़रा - सी भी कोई भी चीज़ इधर - उधर हुई, या घर में सफाई नहीं हुई, तो इस बार मैं तुम्हें घर से धक्के मारकर निकाल दूंगी । समझी तुम ? और हां, जितना कहा गया था, उतना ही करना । अगर तुमने हमारे घर में मौजूदगी में एक निवाला खाना भी खाया होगा, तो मैं तुम्हारे गले में हाथ डालकर उसे निकालूंगी!"

चाहत की आवाज हलक मे अटक जाती ही और उसके चेहरे पर घबराहट छा जाती है । और वो कहती हैं, " फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है । मैं कुछ भी नहीं खाऊंगी, जब आप लोग आएंगे, तभी कुछ खाऊंगी ।"

बोलते हुए, वह अपना हाथ पेट पर रख लेती है । उसे बहुत तेज भूख लग रही थी । दादी कुछ देर उसे खरी - खोटी सुनाती हैं और फिर फोन डिस्कनेक्ट कर देती हैं ।

चाहत की आंखों से आंसू निकलकर गालों पर लुढ़क जाते हैं । आज तीसरा दिन था, उसने एक निवाला भी नहीं खाया था । वह केवल पानी पीकर ही काम चला रही थी ।

धीरे - धीरे कदम बढ़ाते हुए वह आगे की ओर बढ़ती है कि अचानक किसी से टकरा जाती है । उसने ध्यान नहीं दिया था कि सामने कोई आ रहा है ।

वह शख्स उसे कमर से पकड़कर संभालते हुए ठीक से खड़ा कर देता है । चाहत धीरे से अपनी नजर उठाती है और सामने कियान को खड़ा देखती है, जो उसे ही देख रहा था । घबराकर, वह अपने कदम पीछे लेने लगती है कि फिर से उसके पैर लड़खड़ा जाते हैं ।

कियान उसे ठीक से खड़ा करते हुए धीमी आवाज में कहता है, " तुम बार - बार गिरती - पड़ती क्यों रहती हो ? क्या तुम कुछ खाती - पीती नहीं हो ? इतनी कमजोर क्यों लग रही हो ? मेरे लिए काॅफी लेकर आओ, मैं तुम्हारे लिए कुछ मेडिसिन्स लिख देता हूं, ताकि तुम्हारे अंदर एनर्जी बनी रहे ।"

चाहत सिर हिलाकर सहमति जताती है और किचन की ओर चली जाती है ।

वहीं, कियान, जिसकी आंखों में चाहत का चेहरा बस चुका था, अपने सिर पर हाथ रखकर खुद से कहता है, " इस लड़की को तो मैंने कहीं देखा है, पर कहां देखा ? डैम इट! मुझे याद क्यों नहीं आ रहा ?"

वह गहरी सांस भरता है और सीधा ऊपर की ओर अपने कदम बढ़ा देता है ।

दोनों इस बात से अनजान थे कि किसी की जानलेवा नजरें उन पर टिकी हुई थीं ।

चाहत जल्दी से ओट्स बनाकर पहले आर्यन को कमरे में खिलाती है और उसे सुला देती है । फिर कुछ देर बाद वापस किचन में जाती है और दो कप कॉफी लेकर सीधा अभियान के कमरे की ओर कदम बढ़ा देती है ।

जैसे ही वह अभियान के कमरे में आती है, उसे अजीब - सा डर महसूस होने लगता है । ऐसा लग रहा था, जैसे कमरे से कोई डरावनी आहट निकल रही हो ।

वह धीमे कदमों से दरवाजा लॉक करती है । अंदर से बेहद डरावनी, दिल दहलाने वाली आवाज उसके कानों में पड़ती है, " कम इन, चाहत ।"

धीमी आवाज के साथ दरवाजा खोलते ही हल्की - सी आवाज होती है और दरवाजा खुल जाता है । अंदर का कमरा पूरी तरह से अंधेरे में डूबा हुआ था ।

चाहत को डर लगने लगा । उसके हाथ कांपने लगे थे । बाहर की हल्की रोशनी ही कमरे में दाखिल हो रही थी । कमरे के अंदर बस एक डिमां लाइट जल रही थी ।

वह कांपते कदमों से अंदर की ओर बढ़ती है । एक कॉफी का मग उठाकर सीधा कॉफी टेबल पर रख देती है और वहां से जाने लगती है ।

तभी अववेयान की डरावनी आवाज सुनाई देती है, " जब तक मैं ना कहूं, तुम इस जगह से हिल भी नहीं सकती ।"

चाहत वहीं रुक जाती है, उसकी सांसें थमने लगती हैं । कमरा पूरी तरह से डरावने माहौल से भरा हुआ था । वह ठीक से सांस भी नहीं ले पा रही थी ।

अभियान की नजरें उस पर टिकी थीं । वह गहरी आवाज में कहता है, " टर्न अराउंड ।"

चाहत बहुत धीमी गति से उसकी तरफ मुड़ती है । अभियान कॉफी का कप उठाकर अपने होठों से लगाता है और एक सिप लेता है । उसकी आंखें गहरी हो जाती हैं । अगले ही पल, बहुत तेज आवाज कमरे में गूंज उठती है ।

चाहत का शरीर कांपने लगता है । अववेयान ने कॉफी का कप जोर से फर्श पर पटक दिया था । गर्म कॉफी की छींटें चाहत के पैरों से छूकर गुजर गईं । उसने अपनी आंखें मजबूती से बंद कर लीं । उसके हाथ में अभी भी कॉफी की ट्रे थी, और उस ट्रे की खनक कमरे में गूंज रही थी ।

अभियान अपनी जगह से उठकर उसके सामने आ जाता है और उसकी आंखों में झांकते हुए कहता है, " क्या यह कॉफी तुमने बनाई है ?"

चाहत घबराते हुए कहती है, " सॉरी... सॉरी... मुझे…” बोलते - बोलते उसकी आवाज थम जाती है ।

अभियान उसकी गर्दन पर हाथ रखकर उसे मजबूती से दबाते हुए कहता है, " मैं ब्लैक कॉफी पीता हूं, न कि यह बकवास । कितनी चीनी डाली है तुमने इसमें ?"

चाहत की आंखों में नमी आ जाती है । कमरे में भले ही अंधेरा था, लेकिन अववेयान उसकी आंखों को देख पा रहा था ।

अभियान की आंखें जितनी गहरी थीं, उतना ही ज्यादा डर चाहत को लग रहा था । वह अपनी फड़फड़ाती आवाज में कहती है, " गलती से हो गया... मैं... आइंदा ध्यान रखूंगी ।"

अववेयान उसकी ओर कदम बढ़ाने लगता है । चाहत घबराकर पीछे हटने की कोशिश करती है । अववेयान उसके बेहद करीब आ जाता है ।

चाहत अपना चेहरा छुड़ाने की कोशिश करती है, लेकिन उसके जबड़े में इतना तेज दर्द हो रहा था, जैसे अभी टूट कर बिखर जाएगा ।

अभियान उसके चेहरे को बेदर्दी से दबाते हुए गहरी आवाज में कहता है, " जब तुम्हें दूसरों के करीब जाने से फुरसत मिलेगी, तभी तो कुछ सीख पाओगी । ह्म्म ?"

चाहत हैरानी से उसे देखने लगती है । उसे समझ नहीं आ रहा था कि अभियान किस बारे में बात कर रहा है ।

अभियान उसके और करीब आता है कि तभी चाहत के हाथ में पकड़ी ट्रे बीच में आ जाती है । अभियान की आंखें छोटी हो जाती हैं और वह ट्रे की ओर देखता है । उसकी आंखों के सामने फिर से कियान का चेहरा आ जाता है, और वह चाहत को घूरते हुए ट्रे को जोर से जमीन पर पटक देता है ।

चाहत का चेहरा आंसुओं से भीग जाता है । वह घबराते हुए कहती है, " सॉरी... सॉरी... मैं आगे से ध्यान रखूंगी ।"

अभियान उसके कान के पास जाकर बेहद ठंडी आवाज में कहता है, " अववेयान अग्निहोत्री किसी की गलतियों को माफ नहीं करता । पर तुमसे मुझे कीमत वसूल करनी है । अगर तुम्हारी यही हरकतें रहीं, तो मैं जबरदस्ती तुमसे कीमत वसूल लूंगा । और तुम तो जानती ही हो कि मेरी कीमत क्या होती है और मैं इसे किस तरह वसूल करता हूं ।"

बोलते हुए वह उसके कान के पास आ जाता है । चाहत सांस लेना भूल चुकी थी, उसने अपनी सांस रोक ली थी ।

अभियान की गहरी सांसों को वह अपने वजूद पर महसूस कर पा रही थी । डर से उसका पूरा शरीर कांपने लगता है, और उसकी आंखों में आंसू भर जाते हैं ।

वह अभियान को खुद से दूर नहीं कर पा रही थी । तभी उसके कानों में एक बार फिर से अभियान की बेहद ठंडी और डरावनी आवाज गूंजती है ।

Write a comment ...

Write a comment ...