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Do what I said,

चाहत, अव्वेयान के बेहद करीब खड़ी थी । उन दोनों की सांसें आपस में घुल रही थीं । चाहत ने अपनी नजरें नीचे कर रखी थीं ।

अव्वेयान धीरे से उसका हाथ पकड़ता है और अचानक से उसे अपनी ओर खींच लेता है । चाहत सीधी उसके सख्त सीने से जा लगती है, उसकी हल्की - सी सिसकी निकल जाती है । उसके नाजुक - से सीने में दर्द की तेज लहर दौड़ जाती है ।

अव्वेयान उसके चेहरे पर झुके हुए बालों को आहिस्ता से कान के पीछे करते हुए बहुत ही डॉमिनेंट आवाज में कहता है, " तुमने पहले मेरा वह सबसे कीमती वास तोड़ा था, जिसे मैंने फ्रांस से खरीदा था । उसकी कीमत इतनी थी कि तुम अपनी पूरी जिंदगी भी मेरी गुलामी करोगी, तब भी उसे नहीं चुका पाओगी । और आज फिर तुमने सबसे एंटीक और सबसे महंगी चीज को तोड़ दिया । जिसे मैंने इटली से खरीदा था ।"

चाहत की आंखें बड़ी हो जाती हैं । वह अपनी बड़ी - बड़ी पलकों को झुकाते हुए घबराई हुई आवाज में कहती है, " पर मैंने... मैंने जानबूझकर नहीं किया, वह तो... वह तो अपने आप ही... तोड़ गया ।" उसके शब्द गले में ही अटक जाते हैं ।

अव्वेयान सीधा उसकी गर्दन पर हाथ रखता है और उसके नाजुक से गले को दबा देता है । चाहत के नाजुक होंठ बाहर आ जाते हैं, और वह खुद को छुड़ाने की कोशिश करने लगती है । उसे अपने जबड़े में तेज दर्द महसूस हो रहा था ।

अव्वेयान उसके जबड़े को मजबूती से दबाते हुए कहता है, " बहुत ज्यादा बोलने लगी हो तुम मेरे सामने!"

चाहत जल्दी से अपनी नजरें नीचे कर लेती है । उसे बहुत ज्यादा डर लग रहा था । अभियान की नजरें चाहत की नाजुक कमर पर जाकर ठहर जाती हैं । उसके सामने फिर से कियान का चेहरा घूम जाता है, और उसकी आंखों में गुस्सा दिखने लगता है ।

चाहत अपने नाजुक से हाथों को अव्वेयान के सीने पर रखकर उसे दूर करने की कोशिश करती है । वह दर्द से कराह उठती है और डरी हुई आवाज में कहती है, " छोड़िए मुझे... दर्द हो रहा है ।"

अव्वेयान तुरंत उसके होठों पर अपनी उंगली रख देता है । चाहत की एक और सिसकी निकल जाती है । अभियान अपना हाथ उसकी कमर पर रखते हुए उसे और करीब खींचता है ।

चाहत का नाजुक सीना अव्वेयान के सख्त सीने से जा लगता है, और उसके सीने में दर्द की तेज लहर महसूस होती है । चाहत ने अभी तक एक बार भी उसकी आंखों में नजर नहीं मिलाई थी । उसकी नजरें झुकी हुई थीं ।

अव्वेयान उसके कान के पास झुककर गहरी आवाज में कहता है, " तुम्हारी तो इतनी औकात भी नहीं कि तुम मेरे पैसे लौटा सको । पर हां, मुझे अपने पैसे वसूल करना बहुत अच्छे से आता है । और आज से तुम हर रात मेरे बिस्तर पर रहोगी, जब तक मैं अपनी कीमत वसूल नहीं कर लेता ।"

चाहत का दिल धक सा रह जाता है । उसकी धड़कन जैसे एक पल के लिए रुक जाती है । वह खुद को छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहती है, " यह... आप कैसे बातें कर रहे हैं ? आप ऐसा नहीं कर सकते मेरे साथ..."

उसकी आवाज घबराहट से टूट रही थी, जैसे उसे ठीक से सांस भी नहीं आ रही हो ।

अव्वेयान की आंखों में गुस्सा उतर आया था । उसकी नजर बार - बार चाहत की कमर पर जा रही थी, जहां ज्ञान का हाथ था ।

अचानक वह पलटता है और उसे अपनी बाहों में उठाकर सीधा बाथरूम में ले आता है । चाहत जल्दी से वहां से भागने की कोशिश करती है, लेकिन अभियान तुरंत उसकी बाजू पकड़कर उसे दीवार के खिलाफ खड़ा कर देता है । उसके दोनों हाथों को ऊपर उठाकर एक पतली सी रस्सी से बांध देता है ।

चाहत घबराते हुए अपने हाथों को छुड़ाने की नाकाम कोशिश करती है और कहती है, " आप मेरे हाथों में यह क्या कर रहे हैं ? मुझे आर्यन के पास जाना है, वह अकेले नहीं सो पाता । प्लीज, मुझे जाने दीजिए ।"

अव्वेयान उसकी बात अनसुनी करते हुए उसके होंठों पर उंगली रखकर कहता है, " आज रात आर्यन को कोई परेशानी नहीं होगी, और आज तुम्हारा ध्यान सिर्फ मुझ पर होगा ।"

बोलते ही अव्वेयान अपने हाथों को उसके कमर के पीछे ले जाता है और उसकी फ्रॉक को एक ही बार में खोल देता है । चाहत जल्दी से दीवार से चिपक जाती है ।

उसे दीवार पर लगे ठंडे पत्थर का एहसास हो रहा था, और उसका पूरा शरीर ठंड से कांपने लगा । पहले से ही बाथरूम में बर्फ की बड़ी सिल्ली लगी हुई थी, और ऊपर से वह ग्लास वॉल जो उसे और ज्यादा ठंड का एहसास करवा रही थी ।

अव्वेयान आगे बढ़ता है और बहुत ही आहिस्ता से उसके शरीर से फ्रॉक को अलग कर देता है । चाहत चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही थी । उसकी आंखों से आंसू बहने लगे थे । अव्वेयान उसे बर्फ की सिल पर बैठा देता है ।

चाहत तुरंत उठते हुए कहती है, " आप... आप क्या कर रहे हैं ? प्लीज, मुझे जाने दीजिए ।"

वह उसकी तरफ नजरें भी नहीं उठा पा रही थी । वह केवल एक काले रंग की इनरवियर और सफेद पैंट पहने हुए उसके सामने खड़ी थी ।

अव्वेयान बिना नजर हटाए उसे देख रहा था । उसकी नजरें चाहत की ओवरट हुई बॉडी पर टिकी हुई थीं । उसके खूबसूरत बदन पर काले रंग की इनरवियर बहुत ही आकर्षक लग रही थी, और उसकी पतली कमर जो डर के कारण धीरे - धीरे सांसें ले रही थी, उसके नाभि पर लगे छोटे से नीले डायमंड ने उसकी कमर की खूबसूरती को और भी बढ़ा दिया था ।

अव्वेयान उसकी कमर पर अपना हाथ रखता है और धीरे - धीरे उसकी उंगलियों से उसकी स्किन को महसूस करते हुए बहुत ही बेरहम आवाज में कहता है, " यहीं पर छुआ था ना उसने तुम्हें ?"

बोलते हुए वह उसकी कमर को बहुत ही बुरी तरह से मसल देता है । चाहत का रोना फूट पड़ता है । वह उसके सामने गिड़गिड़ाते हुए कहती है, " प्लीज... ऐसा मत करो..."

लेकिन अव्वेयान उस पर कोई ध्यान नहीं देता ।

अगले ही पल अव्वेयान अपना हाथ पीछे ले जाता है और सीधा चाहत के पेट पर उसे रखकर, उसकी पैंट को खींचने लगता है ।

चाहत की हैरानी का कोई ठीकाना नहीं था । उसका दिल जोर - जोर से धड़क रहा था, डर, आंसू, दर्द और कमजोरी उसके सारे इमोशंस को घेर रहे थे । वह रोते हुए अव्वेयान से गिड़गिड़ाती रहती है, " प्लीज... मुझे जाने दीजिए... ।"

अव्वेयान उसे एक नजर देखता है और फिर हंसते हुए कहता है, " अगर तुम चाहती हो कि मैं तुम्हारे नजदीक न आऊं, तो चुपचाप जाकर उस बर्फ की सिली पर लेट जाओ । जब तक मैं न कहूं, तुम उससे एक पल के लिए भी नहीं हटोगी ।"

चाहत, जो अब थोड़ी सी होश में आई थी, धीरे - धीरे कदम बढ़ाते हुए बर्फ की सिली की तरफ चलने लगती है । उसके पैर लड़खड़ा रहे थे ।

अव्वेयान उसकी हर हरकत को ध्यान से देख रहा था । वह केवल एक ब्लैक कलर की इनरवियर में थी, उसके सफेद कंधे, पतली - सी खूबसूरत कमर और लम्बे खूबसूरत पैर, जो एकदम परफेक्ट लग रहे थे, अभियान को मदहोश कर रहे थे ।

चाहत जैसे ही बर्फ की सिली पर कदम रखती है, ठंड से उसके पैर अकड़ने लगते हैं । वह जल्दी से कदम पीछे खींचते हुए कहती है, " आप... ऐसा क्यों कर रहे हैं ? अगर मैं बीमार हो गई, तो बच्चों को कौन संभालेगा ?"

उसकी आवाज में डर और असहायता साफ झलक रही थी । अव्वेयान उसकी तरफ देखते हुए सीधा उसके सामने खड़ा हो जाता है और अपने दोनों हाथ सीने पर बांधते हुए कहता है, " ठीक है, अगर तुम्हें यह नहीं करना, तो मेरे पास मेरी सबसे पसंदीदा सजा है ।"

चाहत उसकी तरफ देखने लगती है, उसकी आंखों में एक उम्मीद की हल्की सी उम्मीद चमकने लगती है । लेकिन अव्वेयान के चेहरे पर डेविलिश मुस्कान फैल जाती है ।

वह धीरे - धीरे कदम बढ़ाते हुए उसके पास आता है और अपना हाथ उसके चेहरे से ले जाते हुए कंधे पर रखता है । धीरे - धीरे उसके इनरवियर तक पहुंचते हुए वह कहता है, " इसे उतार दो और पूरी तरह से मेरे आगोश में आ जाओ ।"

चाहत, जिसे यह मंजूर नहीं था, तुरंत अव्वेयान का हाथ झटक देती है । अव्वेयान की आंखें गुस्से से लाल हो जाती हैं, और उसके चेहरे पर एक डरावनी मुस्कान फैल जाती है ।

चाहत धीरे - धीरे बर्फ की सिली के पास जाती है और एक बार फिर पैर रखती है । ठंड उसे बुरी तरह महसूस हो रही थी । वह अपनी आंखें कसकर बंद कर लेती है ।

अव्वेयान एक नजर उस पर डालता है और फिर एक बटन दबा देता है । अचानक से बाथरूम का टेंपरेचर और गिर जाता है । चाहत को ठंड का एहसास और ज्यादा होने लगता है । वह धीरे से बर्फ की सिली पर बैठ जाती है ।

अव्वेयान उसके नजदीक आता है, और उसके कंधे पकड़ कर बहुत ही बेदर्दी से सिली पर धकेलते हुए उसे लेटाता है ।

चाहत अपने पैरों को ऊपर खींचने की कोशिश करती है, लेकिन अव्वेयान तुरंत उसके नाजुक पैरों को पकड़कर उन्हें सिली से बांध देता है ।

चाहत की सांसे तेज हो रही थीं । ठंड से उसका शरीर कांप रहा था । वह अपने दोनों हाथों को आपस में जोड़कर रगड़ने लगती है, ताकि कुछ गर्मी महसूस हो सके ।

लेकिन उसके पैरों को जितना वह खींचने की कोशिश कर रही थी, उतना ही दर्द बढ़ रहा था । अभियान ने उसके पैरों को इतनी मजबूती से बांध दिया था कि वह हिल भी नहीं पा रही थी ।

अव्वेयान, जिसकी आंखों में अब इंसानियत की कोई झलक नहीं बची थी, चाहत के सामने खड़ा हो जाता है । वह उसके पास बैठते हुए उसके गालों को अंगूठे से सहलाता है और कहता है, " इतना दर्द क्यों सह रही हो ? तुम जानती हो कि आज नहीं तो कल, तुम्हें मेरा ही होना है । और जब मैं तुम्हारे पास आऊंगा, तो तुम्हें मुझसे दूर जाने की कोई जगह नहीं मिलेगी । यह दिन बहुत जल्द आएगा ।"

यह कहते हुए वह उसके हाथ को उसके सीने से अलग करता है और उसे भी साइड से बांध देता है । चाहत जल्दी से करवट बदलते हुए एक तरफ को हो जाती है, लेकिन अव्वेयान उसके दूसरे हाथ को भी खींचते हुए बांध देता है ।

अब चाहत पूरी तरह से लाचार, बिना कपड़ों के, उसके सामने बंधी हुई थी । अव्वेयान ने उसके हाथ और पैर इतने मजबूती से बांध दिए थे कि चाहत चाहकर भी हिल भी नहीं पा रही थी ।

अव्वेयान अपनी तपती हुई नजरों से उसे ऊपर से नीचे तक देखता है । वह उसकी हर एक कर्व को निहार रहा था ।

उसके कदम धीरे - धीरे लाइट ऑफ करने की ओर बढ़ते हैं कि तभी चाहत की बहुत ही धीमी और मरी हुई - सी आवाज सुनाई देती है, " प्लीज... लाइट मत बंद करना । मुझे... मुझे अंधेरे से बहुत डर लगता है । प्लीज..."

चाहत के होंठ अब तक सफेद पड़ चुके थे । अव्वेयान एक बार उसकी तरफ देखने लगता है, लेकिन उसके चेहरे पर कोई दया नहीं दिखती ।

बर्फ धीरे - धीरे पिघल रही थी और चाहत का शरीर ठंड से सफेद पड़ने लगा था । मुश्किल से आधा घंटा भी नहीं हुआ था कि चाहत को चक्कर आने लगते हैं ।

अव्वेयान उसकी ओर फिर से बढ़ता है और गहरी आवाज में कहता है, " हार मान लो । तुम कभी भी अव्वेयान अग्निहोत्री से नहीं जीत पाओगी ।"

यह कहते हुए वह उसकी कमर पर हाथ रखता है, और उसकी गरम उंगलियों का टच चाहत को हल्की राहत देता है । लेकिन अगले ही पल, अव्वेयान अपनी उंगलियों को बहुत ही बेदर्दी से उसकी कमर और पेट में धंसा देता है, जिससे चाहत का दर्द और बढ़ जाता है ।

अव्वेयान के हाथ बहुत रफ़ थे, और जैसे ही उसने चाहत के पेट और शरीर को मसलना शुरू किया, चाहत को तेज दर्द महसूस होने लगा । वह अब कुछ भी नहीं कह पा रही थी, बस अपने निचले होंठ को काटते हुए दर्द को सहने की कोशिश कर रही थी ।

अव्वेयान उसके पूरे पेट और कमर को इतनी जोर से रगड़ रहा था कि उसका शरीर लाल पड़ चुका था ।

चाहत, दर्द से तड़पते हुए, कांपते हुए कहती है, " आप... आप क्या कर रहे हैं ? मुझे बहुत तकलीफ़ हो रही है... प्लीज, छोड़ दीजिए मुझे... ऐसा मत करिए... मुझे दर्द हो रहा है ।"

उसकी सांसें इतनी तेज़ चल रही थीं कि उसकी नाजुक सा सीना बार - बार ऊपर - नीचे हो रही थी । उसके सीने में दर्द था, और वह बिल्कुल बेबस महसूस कर रही थी ।

अव्वेयान उसकी ओर झुककर उसके सीने के पास अपना हाथ रखता है और उसे दबाते हुए कहता है, " यह कितनी सॉफ्ट है ।"

चाहत का सीना न तो बहुत बड़ा था, न बहुत छोटा । वह बेहद नाजुक और कोमल थी, जैसे एक छोटी गुड़िया । उसका चेहरा और शरीर ठंड और दर्द की वजह से लाल हो चुके थे । लेकिन फिर भी, वह किसी तरह अपने दर्द और तकलीफ़ को सहते हुए चुपचाप लेटी रही ।

अव्वेयान ने एक नज़र घड़ी पर डाली और उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया । वह चाहत को देखकर, एक - एक करके उसके हाथों को खोलता है और उसे अपनी बाहों में उठा लेता है । चाहत, जिसे अब अपने शरीर में कुछ महसूस होना बंद हो गया था, बस खाली आँखों से उसे देख रही थी ।

अव्वेयान धीरे से अपने हाथों से उसके इनरवियर को खोलता है और उन्हें निकाल देता है । अब चाहत का पूरा शरीर ठंड से कांप रहा था ।

बिना कुछ कहे, अव्वेयान उसे उठाकर कमरे के बाहर ले जाता है । एक नजर बिस्तर पर डालने के बाद, वह उसे सीधे काउच पर लिटा देता है । चाहत काउच पर निढाल पड़ी हुई थी, लेकिन अभियान ने उसे धक्का दे दिया ।

चाहत, जिसे अपने शरीर में कोई जान महसूस नहीं हो रही थी, भीगी हुई पलकों से अभियान की ओर देखती है और कांपते हुए कहती है, " आप... आप क्या कर रहे हैं ? मुझे... मुझे चोट लग गई है ।"

वह अंधेरे में अपने नाजुक हाथों को देखने लगती है । उसकी पतली - पतली उंगलियां गुलाबी पड़ चुकी थीं, और उसके घुटने में दर्द हो रहा था ।

अव्वेयान काउच पर बैठ जाता है, उसके दोनों पैर खुले हुए थे, और चाहत उसके पैरों के बीच में पड़ी हुई थी । अभियान उसे घूरते हुए कहता है, " तुम क्या सोचती हो ? क्या तुम इस तरह से मेरी बात मानकर खुद को सही साबित करना चाहती हो ? तुमसे मैं कीमत वसूल करना चाहता हूं, और तुम मेरे लिए सिर्फ एक छोटी सी पपेट हो । जब चाहूं, जैसे चाहूं, मैं तुम्हें नचा सकता हूं । तो अब जो मुझे करना था, वो मैंने कर लिया । अब बारी तुम्हारी है ।"

चाहत उसकी ओर हैरानी से देखती है, जबकि अव्वेयान की आंखें गुस्से से लाल हो चुकी थीं । चाहत हल्की सी रोशनी में भी अभियान के चेहरे की तपिश को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी । वह अपनी नजरें झुका लेती है ।

अव्वेयान उसे घूरते हुए कहता है, " अब मेरी बेल्ट खोलो ।"

चाहत उसकी बात सुनकर स्तब्ध हो जाती है । वह पहले ही सिर्फ ट्राउज़र पहने था, और अब वह उससे वो भी निकालने के लिए कह रहा था । चाहत की आंखों में भय और असहायता झलक रही थी ।

अव्वेयान उसके होठों पर अपनी उंगली धसाते हुए कहता है, " I don't want to hear your nonsense. Do what I said, quietly.”

"

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