चाहत भीगी पलकें उठा कर एक बार अव्वेयान को देखती है । अगर उसकी जगह कोई और होता, तो एक बार उस बेचारी पर रहम खा जाता ।
उस अंधेरे कमरे में एक - दूसरे को ठीक से देखा तक नहीं जा रहा था, पर फिर भी मोमबत्ती की हल्की रोशनी थी, जिससे वह दोनों एक - दूसरे की चमकती हुई आंखें देख रहे थे ।
जहां चाहत की आंखें गिली हो चुकी थीं, तो वहीं अव्वेयान की आंखें बहुत ही गहरी थीं । अंधेरे कमरे में भी चाहत से अव्वेयान की आंखें नजर खुद पर बर्दाश्त नहीं हो रही थीं ।
वह दोनों एक लम्हे के लिए बस एक - दूसरे को देख रहे थे । उन दोनों की नजरें आपस में उलझ चुकी थीं । तभी एक ठंडी हवा का झोंका चाहत को छू कर चला जाता है, जिसके साथ ही जल रही एक छोटी - सी मोमबत्ती भी बुझ जाती है, और वह पूरा कमरा अंधेरे से भर जाता है ।
चाहत को अपना शरीर अकड़ता हुआ महसूस हो रहा था । अव्वेयान उसके बालों को बहुत ही बेरहमी से पकड़ते हुए खींच देता है । अह्ह्ह्ह
चाहत की चीख निकल जाती है ।
अव्वेयान उसे अपने और नजदीक खींचते हुए बिल्कुल उसके चेहरे पर झुक जाता है । चाहत की आंखों से उसके चमकीले आंसू गिर रहे थे । वह गहरी सांस ले रही थी । वह बहुत ही ज्यादा , कमजोर हो चुकी थी ।
उसने अब अव्वेयान को खुद से दूर करने की सारी कोशिश बंद कर दी थी । बस उसकी धीमी - धीमी दबी हुई सिसकियों का शोर उसे कमरे में सुनाई दे रहा था ।
अव्वेयान बिल्कुल उसके होठों के खिलाफ जाकर गहरी आवाज में कहता है, " तुम्हें सुनाई नहीं दिया है, मैंने तुमसे क्या करने के लिए कहा है ?"
चाहत अपने कांपते हुए हाथ धीरे से उसकी बेल्ट पर रख देती है । उसे खोलने लगती है, पर उसके हाथ इतनी ज्यादा कांप रहे थे कि वह ठीक से कर ही नहीं पा रही थी ।
अव्वेयान अगले ही पल उसके नाजुक गुलाबी हो चुकी उंगलियों के ऊपर अपनी उंगलियां दबा देता है । चाहत अपनी आंखें कस के मीच लेती है । उसे अव्वेयान के इरादे का एहसास हो रहा था ।
वह उसकी उन आंसुओं को देखते हुए खुद से कहता है, " तुम्हारे इन मगरमच्छ के आंसू से मुझे रत्ती भर फर्क नहीं पड़ता । मैं तुम्हारे रोम - रोम में खुद को इस कदर बस दूंगा कि तुम कभी भी मेरे वजूद को खुद से मिटा नहीं पाओगी ।"
फिर कुछ पल रुक कर चाहत के चेहरे को गौर से देखते हुए, वह बड़बड़ाता है, " घीन आती है मुझे इस मासूमियत से, इस मासूमियत भरे हुए चेहरे से, जिसमें सिर्फ मासूमियत है, पर उनके खून में हमेशा दगाबाजी होती है ।"
बोलते हुए उसकी पकड़ चाहत के जबड़े पर मजबूत हो जाती है । आह्ह्ह्ह्ह चाहत की चीख निकल जाती है । उसका पूरा शरीर बर्फ की ठंड से जकड़ा चुका था । उसे बहुत तेज ठंड लग रही थी, और वह उसका शरीर किसी भट्टी की तरह तप रहा था । अव्वेयान की आंखों में बिल्कुल भी हमदर्दी नहीं थी ।
वह अगले ही पल उसे सोफे पर लेटा देता है और तुरंत उसके ऊपर जाकर उसके दोनों हाथों को पकड़ते हुए, उसके हाथ को सोफे पर दबा देता है ।
चाहत की आंखें खुल नहीं रही थीं, लेकिन वह साफ महसूस कर पा रही थी कि उसके साथ क्या - क्या हो रहा है । वह अव्वेयान के हाथों को अपने शरीर पर रेंगता हुआ महसूस कर रही थी । उसकी आंखें बंद हो चुकी थीं । आंखों से धीरे - धीरे आंसू निकल रहे थे । उसकी ब्रिथलेस हो चुकी दबी - दबी सिसकियां अव्वेयान के कानों में किसी मधुर संगीत की तरह बज रही थीं ।
वह चाहत के शरीर को तो एक टक घूर रहा था । भले ही अंधेरा था, पर उसके शरीर का अट्रैक्टिव और परफेक्ट बॉडी इतना परफेक्ट था कि किसी का भी दिल पिघल जाए । इस बात को तो अभियान खुद भी ना कार नहीं सकता था ।
अव्वेयान उसके कान के पास आकर बहुत ही गहरी आवाज में कहता है, " आज मैं तुम्हें पूरी तरीके से अपना बना लूंगा ।"
चाहत की आंखों से आंसू का दरिया बह पड़ता है । और वो कहती है, " आपने मुझसे शादी की थी, और आप मेरे साथ यह सब करके अपने पति होने का हक लेना चाहते हैं ?"
बोलते हुए वह गहरी सांस लेने लगती है । अव्वेयान की आंखें उस पर गहरी हो जाती हैं । उसके जबड़े मजबूत हो जाते हैं । वह चाहत के गाल को कस के खींचते हुए बहुत ही बेरहम आवाज में कहता है, " क्या तुम्हें सच में लगता है कि मैं उस शादी को मानता हूं ? तुम सिर्फ और सिर्फ मेरी नजर में मेरी वह पपेट हो, जिसके पास मैं जब चाहे तब आ सकता हूं, जो चाहे वह कर सकता हूं, और मुझे रोकने वाली तुम कोई नहीं हो ।"
बोलते हुए वह अपने होंठ उसके होंठ पर रख देता है और उसे गहराई से चूमता है । चाहत के होंठ अव्वेयान के होंठों से उलझ चुके थे । उसकी आंखें अगले ही पल बड़ी हो जाती हैं । उसे कुछ धुंधली परछाइयां महसूस होने लगती हैं । वह अपने ख्यालों को झटककर एक बार फिर से चाहत के होठों को बहुत ही बेदर्दी से चूमते हुए काटने लगता है ।
उसका हाथ चाहत के पूरे शरीर पर घूम रहा था, जैसे वह उसके बदन को एक्सप्लोर कर रहा हो । वह अपने हाथ को हल्का - सा नीचे लेकर जाता है ।
आआह्ह्ह्ह्ह
चाहत चीखती है । उसकी आंखें हैरानी से बड़ी हो जाती हैं, और अगले ही पल चाहत की चीखें उस कमरे में गूंजने लगती हैं । अव्वेयान और वह दोनों एक हो चुके थे ।
अव्वेयान बहुत ही ज्यादा उसके साथ जानवरों की तरह स्लो कर रहा था । वह उसे किसी जानवर की तरह लपक चुका था, जैसे वह कोई भेड़िया हो और चाहत उसके लिए कोई बकरी, जो उसकी भूख शांत करेगी । पर अव्वेयान उसे पर हावी होता चला जा रहा था । चाहत ने अपनी सारी कोशिश करना बंद कर दी थी ।
कुछ ही देर में अव्वेयान का पूरा शरीर पसीने से लथपथ हो चुका था, और उसकी आंखें बहुत ही ज्यादा गहरी थीं । वह अपने जबड़े भिचते हुए चाहत के कान के पास आकर, दांत पीसते हुए कहता है, " You must not be virgin
चाहत, जो बेहोश हो चुकी थी, उसे अव्वेयान की कोई बात सुनाई नहीं देती । वहीं अव्वेयान एक पल के लिए उसे दूर कर देता है और चाहत को देखने लगता है । फिर एक बार फिर से वह उसके ऊपर हावी होता चला जा रहा था ।
उसकी यह चीज जब से उसने महसूस की थी कि चाहत वर्जिन नहीं है, उसे बहुत ही ज्यादा गुस्सा आ रहा था और कुछ अजीब - सा महसूस हो रहा था । ना जाने वह क्या था, पर उसकी आंखें गुस्से से लाल हो चुकी थीं । अभियान जानवर की तरह उसके ऊपर हावी हो चुका था
।
सुबह का वक्त,
पोर्च में कुछ गाड़ियों के रुकने की आवाज होती है, जिसके साथ ही कुछ लोग अंदर की तरफ आ जाते हैं । उन सभी के चेहरे पर एक गर्व और घमंड झलक रहा था ।
तभी एक अधेड़ उम्र की औरत, जो हाथ में डंडा लिए अंदर आ रही थी, उसके चेहरे पर एक अलग’सी चमक थी, एक गुरूर था । वह जैसे ही घर में दाखिल होती है, उनकी नजर सोफे पर सो रही चाहत पर पड़ जाती है । उनका चेहरा गुस्से से तमतमा जाता है ।
वह आगे जाकर लगभग कुछ देर चाहत को देखते हैं, और अगले ही पल एक जोरदार आवाज लिविंग हॉल में गूंज उठती है ।
चाहत, जो वहां पर खुद में सिमट कर सो रही थी, उसकी आंखें एकदम से खुल जाती हैं । उसका शरीर भट्टी की तरह तप रहा था, और उसका पूरा चेहरा एकदम लाल हो चुका था । वह अपने गाल पर हाथ रख लेती है, और उसकी आंखों में आंसू आ चुके थे ।
रुक्मणी जी उसे कंधे पर हाथ रखकर सीधा खड़ा करते हुए झंझोड़कर गुस्से भरी आवाज में कहती हैं, " यह कैसी हालत बना रखी है तुमने ? किसके साथ रात गुजार कर आई हो तुम ? हां, तुम्हें देखकर कोई भी कह सकता है कि तुम रात भर हमारी गैर - मौजूदगी में यहां पर कैसे हरकतें कर रही होगी! बताओ, किसके साथ थी ? हमारे गार्डों के साथ या हमारे वॉचमेन के साथ ?"
चाहत की आंखों से बेहिसाब आंसू फूट पड़ते हैं । वह रोने लगती है । तभी एक औरत, जिसने बहुत ही क्लासिक साड़ी पहनी हुई थी और गले में हार पहन रखा था, पास आते हुए बहुत ही अजीब - सी मुस्कुराहट के साथ उसे देखते हुए कहती है, " तुम्हें देखकर तो ऐसा लग रहा है, जैसे अभी - अभी किसी ने तुम्हें छोड़ दिया है, और तुम यहां आकर सुबह…. शर्म नहीं आती ? क्या बिल्कुल भी ? तुम पर तो थूकने तक का मन नहीं कर रहा है



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