चाहत की आंखों से बेहिसाब आंसू फूट पड़ते हैं । वह रोने लगती है । तभी एक औरत, जिसने बहुत ही क्लासिक साड़ी पहनी हुई थी और गले में हार पहन रखा था, पास आते हुए बहुत ही अजीब - सी मुस्कुराहट के साथ उसे देखते हुए कहती है, " तुम्हें देखकर तो ऐसा लग रहा है, जैसे अभी - अभी किसी ने तुम्हें छोड़ दिया है, और तुम यहां आकर सुबह…. शर्म नहीं आती ? क्या बिल्कुल भी ? तुम पर तो थूकने तक का मन नहीं कर रहा है.
Aage .....
बोलते हुए वह उसी के पैरों के पास थूक देती है । वहीं रुक्मणी जी चाहत का हाथ पकड़कर, बहुत ही बेदर्दी से उसे खींचते हुए कहती हैं, " तुम हमारे घर में रहने लायक नहीं हो! कल हमारे बच्चों का जन्मदिन है, और एक ग्रैंड पार्टी में तुम ना जाने किस - किस पर अपना जाल फेकेगी । तुम इस घर में रहने लायक नहीं हो, तुम्हें यहां से जाना होगा!"
बोलते हुए वह उसे खींचने लगती हैं । चाहत, जिससे चला तक नहीं जा रहा था, उसका सिर घूमने लगता है । वह बस खिंची चली जा रही थी कि तभी कोई उसका हाथ पकड़ लेता है । वह धीरे से अपना सिर टेढ़ा करके देखते हैं, सामने ज्योति जी खड़ी हुई थीं ।
वह उसे बिना किसी एक्सप्रेशन के देख रही थीं । रुक्मणी जी से चाहत का हाथ छुड़ाने हुए कहती हैं, " मां, छोड़ दो ।"
रुक्मणी जी का चेहरा गुस्से से भर जाता है । वह ज्योति जी की तरफ देखते हुए कहती हैं, " तुम्हें समझ में भी आ रहा है तुम क्या कह रही हो ? तुम इस लड़की का तरफदारी कर रही हो! तुम्हें पता भी है, इसमें रात में किसके साथ गुलछड़े उड़ी होगी ? हमारी इज्जत यह मिट्टी में मिलाना चाहती है । हमारे घर में दो - दो पोते हैं, और कल इतने मेहमान आएंगे, तो यह हमें कहीं मुंह दिखाने लायक तक नहीं छोड़ेगी, और तुम इसका पक्ष ले रही हो ? क्या तुम्हें भी इसके साथ - साथ घर से धक्के मारकर निकाल देना चाहिए ?"
एकदम से उन पर चीखती हैं । ज्योति जी बिना किसी एक्सप्रेशन के कुछ देर उन्हें देखती हैं और चाहत को अपने साथ ले जाते हुए कहती हैं, " इसमें उसकी कोई गलती नहीं है ।"
बोलते हुए वह चुपचाप चाहत को अपने साथ ले जाती हैं । चाहत बिना कुछ कहे उनके साथ चल रही थी, और उसकी आंखों से बस धीरे - धीरे आंसू बह रहे थे । बाकी के लोग बिना किसी एक्सप्रेशन के चाहत को देखते हैं और चुपचाप अपने - अपने कमरों में चले जाते हैं ।
वहीं रुक्मणी जी अपनी मुठिया पीसते हुए रह जाती हैं और दांत किटकिटाते हुए कहती हैं, " मैं तुम्हें इस घर में ज्यादा दिन तक टिकने नहीं दूंगी । मेरे पोते पर कब्जा करना चाहती हो, ना ? अपना यह खूबसूरती का जाल देखकर, मैं तुम्हारी इसी खूबसूरती पर ऐसा दाग लगाऊंगी कि तुम कभी मेरे सामने खड़े होने लायक नहीं रहोगी!"
बोलते हुए वह वहां से चली जाती हैं ।
ज्योति जी का कमरा । वह चाहत को लेकर अपने साथ आती हैं और उसके हाथ में एक काले रंग की नॉर्मल - सी कुर्ती और पेंट रखते हुए कहती हैं, " तुम जाओ और जाकर नहा लो ।"
चाहत बिना कुछ कहे बाथरूम में चली जाती है । शावर के नीचे खड़ी हो जाती है । उसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं था । शावर का ठंडा पानी उसके गुलाबी स्किन को धीरे - धीरे भिगो रहा था ।
तभी बाथरूम का दरवाजा एकदम से खुलता है । सामने ज्योति जी, सामने का नजारा देख, एकदम से हैरान हो जाती हैं ।
अभियान बालकनी में खड़े होकर दूर तक फैले जंगल को निहार रहा था । उसके हाथ में सिगार थी, जिसके वह लंबे कश भर रहा था । उसके चेहरे पर कोई भी एक्सप्रेशन मौजूद नहीं था । वह एक टक दूर तक फैले नजारे को अपनी आंखों में समा रहा था । उसकी आंखें अभी भी आग बरसा रही थीं । वह बेहद लाल और संजीदा थीं ।
दरवाजा खुलता है, और दो छोटे - छोटे पैर अंदर दाखिल होते हैं । अभियान बिना किसी हलचल के वैसे ही खड़ा रहता है ।
तभी दो छोटे पैरों उससे लिपट जाते हैं । अभियान सिर झुका कर देखता है, जहां उसकी छोटी - सी प्रिंसेस आंखों में चमक लिए एक टुकुर - टुकुर उसे ही देख रही थी ।
अभियान शिगार को बूट को नीचे फेंकता है और जूते से स्लीपर को मसलते हुए छोटी - सी लड़की को अपनी बाहों में उठाते हुए प्यार से उसके गालों को खींचते हुए कहता है, " प्रिंसेस, आप यहां क्या कर रही हैं ? और आप आई कब ?"
छोटी - सी लड़की अपने दोनों हाथों से अभियान के गले में लटकाते हुए कहती है, " डैड, आपकी प्रिंसेस आपसे नाराज है । आपने एंजेल को परेशान किया है, ना ?"
अभियान के चेहरे पर गुस्सा उतर आता है । तभी वहां पर उसका असिस्टेंट आ जाता है । वह अभियान को देखते हुए कहता है, " बाॅस, हमें निकलना होगा । हम एक घंटे बाद आपका मिस्टर रायचंद के साथ बहुत ही इंपॉर्टेंट मीटिंग है ।"
अभियान सिर हिलाता है । उसका असिस्टेंट छोटी - सी लड़की को अपनी गोद में लेकर वहां से चला जाता है ।
वहीं अभियान अपना हाथ कस के रेलिंग पर मारते हुए कहता है, " चाहत, चाहत, चाहत! मैं तुम्हें छोड़ूंगा नहीं! तुम मेरे ही बच्चों को, मेरे ही सामने, अपना हथियार बनाकर इस्तेमाल कर रही हो, ना ? देखो, अब मैं तुम्हारे साथ क्या करता हूं!उसकी आंखें फिर से गुस्से से भर चुकी थीं ।
ज्योति जी, कमरे में,
वह एक टक चाहत को देख रही थी । उसके शरीर से खून बहते हुए जमीन पर घुल रहा था । उसके पूरे सफेद कपड़ों में दाग थे, स्किन पर जहां - जहां खरोचें और दांतों के निशान थे । उन्हें कुछ अजीब - सा महसूस हुआ । वह अगले ही पल तेजी से अंदर आती हैं और तौलिया उठाकर उसके ऊपर डालते हुए उसे सीधा वहां पर साइड में बैठा देती हैं ।
चाहत, जो अभी तक खामोश थी, उसका रोना फूट जाता है । वह अपने दोनों हाथ ज्योति जी के कमर पर लपेटकर रोना शुरू कर देती है । आज उसके अंदर का सारा दर्द उमड़ कर आ चुका था उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था । उसे इतनी तकलीफ हो रही थी ।
ज्योति जी अपना हाथ उठाती हैं, पर अगले ही पल वह अपना हाथ नीचे कर लेते हैं । उनके चेहरे पर कोई इमोशंस नहीं थे । वह उसके कंधे पकड़कर उसे दूर करते हुए कहते हैं, " तैयार हो जाइए, नाश्ते की तैयारी करनी है अभी तुम्हें ।"
चाहत भीगी हुई पलकों को उठाकर उन्हें देखती है और बिना कुछ कहे कपड़े लेकर दूसरी तरफ चली जाती है । वहीं ज्योति जी एक नजर उसे देखने के बाद बाहर आ जाते हैं । उन्होंने कुछ भी नहीं कहा था ।
कुछ देर बाद चाहत कपड़े बदलकर बाहर आती है । ज्योति जी उसे एक गिलास पानी देते हैं । चाहत चुपचाप वह पानी पी लेती है ।
ज्योति जी उसे देखते हुए पूछती हैं, " तुम ठीक हो ?"
अब चाहत एक नजर उन्हें देखती है और जल्दी से वहां से अपने बालों को पीछे कर जाने लगती है ।
वह जैसे ही दरवाजा खोलकर अपने कदम बाहर रखती है, किसी के चौड़े सीने से टकरा जाती है । उसे पहले ही हल्का चक्कर आ रहा था, और अचानक किसी के टकराने से वह एकदम से लड़खड़ा जाती है । वह शख्स उसे अपनी मजबूत बाहों में संभाल लेता है ।
उसकी नजर चाहत के बेताब, खूबसूरत, गुलाबी हो चुके चेहरे पर जाकर रुक जाती है । चाहत डर के मारे उसे शख्स की शर्ट को मुट्ठियों में भर लेती है । उसने अपनी आंखों को नीचे लिया था । महसूस कर वह धीरे से अपनी आंखें खोलकर सामने देखती है ।
उसका चेहरा एकदम सफेद पड़ चुका था । होठों को फड़फड़ाना लगते हैं । वह शख्स एक टक चाहत को देख रहा था । उसके होठ, उसका खूबसूरत चेहरा, वह बहुत ही ज्यादा एकदम फ्रेश लग रहा था । उसकी आंखें चमक रही थीं और उसकी आंखें बेहद नशीली हो चुकी थीं ।
वहीं सामने खड़ा हुआ शख्स, उसकी नशीली आंखों को देखते हुए अजीब ढंग से कहता है, " लड़के फसाने का बहुत अच्छा तरीका है । अपनी खूबसूरती का जाल फेंको, और लड़के खुद आ जाएएंगे तुम्हारी बाहों में । फिर तुम्हारी पूरी जिंदगी बदल जाएगी ।"
चाहत को अव्वेयान के शब्द अपने सीने में बहुत ही बुरी तरीके से चुभ रहे थे ।



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