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Chahat emotional break down

चाहत लड़खड़ाते लड़खड़ाते बची थी, उसने अपने होठों को बहुत ही कस के बाइट कर लिया था, उसकी आंखें भीग चुकी थी, पर आर्यन की चीख पर खुद को ठीक से खड़ा करती हैं । और भीगी हुई पलकों से उसकी तरफ देख हल्का सा मुस्कुरा देती है । उसने अपने दांतों को बहुत कस के कसा हुआ था , जैसे अपने किसी दर्द को अपने ज़ख्म को अपने अंदर समेटने की कोशिश कर रही हो, पर उसके चेहरे पर दर्द साफ ज़ाहिर हो रहा था, दर्द से सफेद पड़ता चेहरा वह धीरे से अपने होठों को रिहा करती है और गहरी सांस लेने लगती है।।

उसे सांस लेने में बेहद तकलीफ हो रही थी, आर्यन उस के सीने से लगा उसे ही देख रहा था , आर्यन एक नज़र उसे देखता है । उसकी आंखें छोटी हो जाती है। चाहत लड़खड़ाते कदमों से उसके पास आती है और अपना तप्ता हुआ हाथ आर्यन के गालों पर रखते हुए कहती हैं।

" तुम अपने पापा के साथ रहो मैं थोड़ी-थोड़ी देर में आती हू तुम्हारे पास "

बोलते हुए वह पीछे की तरफ पलट जाती है और धीरे-धीरे आगे की तरफ बढ़ने लगती है । उसने एक बार भी मोड़कर आर्यन या फिर अव्वेयान की तरफ नहीं देखा था, और अपना काप्ता हुआ हाथ अपने सीने पे रखती हैं और उसके साथ ही उसके दर्द की वजह से आंसू निकलना शुरू हो जाते हैं ।।

मुश्किल से चलते हुए सीधा सर्वेंट क्वार्टर में आती है और दीवार के सहारे लग कर बैठ जाती हैं । उसके आंसू निकलना शुरू हो चुके थे और उसका पूरा शरीर ठंडा पड़ रहा था, वह कांप रही थी , वह पर बुरी तरीके से किसी का आवाज़ आती है।

" तुम ठीक तो हो ना , तुम रो क्यों रही हो । " चाहत जल्दी से अपने मुंह पर हाथ रख खुद में ही सिकुड़ी हुए , घबराए आवाज़ मे कहती है।

" मैं ठीक हूं , मैं ठीक हूं , बोलते हुए वह खुद में और ज़्यादा सिमट जाते हैं । दर्द से उसकी सांसे बहुत तेज़ हो चुकी थी, काफी देर तक इसी तरह बैठे-बैठे रोती रहती है । उसे अपना दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था, थोड़ी देर बाद अपनी जगह से खड़ी हो धीरे से उस अजीब कमरे के और अंदर की तरफ आती है ।।

जहां सिर्फ एक बहुत ही छोटा सा बेड था जो लकड़ी का था और उसके ऊपर कुछ भी नहीं पढ़ा हुआ था , वह खाली लकड़ी थी , चाहत वहां पर रखे हुए एक छोटे शीशे की तरफ आती है और अपने कांपते ते हुए हाथों से अपने बालों को आगे की तरफ करती है । उसकी नज़र अपनी गर्दन के कुछ इंचेज नीचे जाती है । वह ठीक से देखा तक नहीं पा रही थी , पर वह कुर्ता जो उसने पहना हुआ था, वह पूरी तरीके से उसके शरीर से चिपक चुका था, वह हल्की सी सिसकी लेते हुए अपने कांपता हुए हाथ अपने पीठ पर रखते हैं । और धीरे से उस कुर्ते को अपने शरीर से अलग करने की कोशिश करती है।।

पैर दर्द इतना ज़्यादा था कि उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था , उसका पूरा शरीर दर्द से कांप रहा था, पहले ही उसका शरीर बुखार से तप रहा था और अब यह एक और गहरा ज़ख्म अपने वजूद पर बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे, वह खड़े-खड़े वैसे ही घुटनों के बाल गिर जाती है। जमीन पर खुद में सिमेट्री हुए लेटे हुए रोना शुरू कर देती है।

उसकी आवाज़ में बेहद तड़प थी , वह सिसकते सकते हुए कहते हैं । __ " क्यों हो रहा है मेरे साथ , कितना अच्छा होता कि मैं मर जाते , मैं मर ही जाऊं इस ज़ख्म से प्लीज भगवान जी मुझे अपने पास बुला लीजिए, मुझे से अब दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा, शायद मेरी ही गलती होगी तभी तो मुझे इतना दर्द मिल रहा है। पर मेने किसी का क्या बिगाड़ा है। मेरे से यह दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा, प्लीज... "

बोलते हुए वह वही लेट कर अपनी आंखें बंद कर लेती है । उसकी आंखों की कोणों से लगातार आंसू गिरने लगते हैं। सीने पर हाथ रख वह कुछ बोलने की वापस कोशिश कर रही थी , पर दर्द से उसके मुंह से शब्द नहीं निकल रहे थे , चाहत गहरी गहरी हिचकियां लेते हुए रो रही थी , उसका दर्द उस शांत कमरे में शोर कर रहा था, उसने जो दर्द अपने सीने में इतने वक्त से दबा के रखा था, वह भी आज फूट पड़ा था।।

" अपनी ही बेटी को इस तरीके से रखते हैं । Ded आप क्यों नहीं आ रहे आपने तो कहा था ना कि कुछ भी हो जाए आप मेरे पास आएंगे , कुछ भी हो जाए मैं कहीं भी हूं आप मुझ तक पहुंच जाएंगे , पर अब क्यों नहीं 3 महीने गुज़र गए हैं । और कितना इंतज़ार करूं मैं , अब मुझ से यह दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा, प्लीज डेड आ जाइए ना । "

बोलते हुए वह उठने की कोशिश शुरू कर देती है । अपने हाथ को देखती हे और ऊपर से नीचे तक पूरे हाथ को सहलाते हुए खड़ी होती है और इधर-उधर कुछ ढूंढने लगते हैं । काफी देर तक कुछ ढूंढने के बाद उसके हाथ एक बार फिर रुक जाते हैं । उसका जख्म बार-बार हिलने से और बॉडी मूव करने से रुका हुआ खून फिर से बहाना शुरू हो चुका था, वह अपने दर्द को नज़र अंदाज करती चली जा रहे थे, पर अब उसके बर्दाश्त की इंतहा हो चुकी थी ।।

तभी उसके दरवाज़े पर कोई दस्तक देता है । " वह तुम्हें ढूंढ रहे है जल्दी चलो तुम तो जानती हो ना अगर तुम वहां नहीं पहुंची तो कितना कुछ हो जाएगा, तुम्हें क्या अच्छा लगता है। "

चाहत अपनी आंखों से बहते हुए आंसुओं को साफ करते हुए डर भरी आवाज़ में कहती है। " मैं आ रही हूं , आप... आप चलिए, बोलते हुए वह फिर से अपनी वह वाइट वाली फ्रॉक निकलती है । जिसकी हालत बहुत ही ज़्यादा बुरी हो चुकी थी, वह उन काले कपड़ों में भले ही जा सकती थी पर उसमें खून लग चुका था, अगर कोई उसे देखता तो फिर उस पर न जाने कैसे कैसे इल्ज़ाम लगाता, और वह तो बचपन से ही अपने दर्द को अपने ज़ख्मों को अपने अंदर समेटना सीख चुकी थी।।

वह भी उस उम्र में जब बच्चे को यह भी नहीं पता होता कि हंसना और मुस्कुराना उसकी जिंदगी का सबसे अहम चीज होती है । वह सफेद रंग की ड्रेस को निकलती हैं और हल्की सी झूठी मुस्कुराहट के साथ कहती है । _" मेरी ज़िंदगी भी तो तुम्हारी तरह हो गई है ना... बिल्कुल कोई रंग ही नहीं बचा एक रंग है और वह भी बहुत प्यार है । " बोलते हुए उसकी आंखों के सामने आर्यन का चेहरा आ जाता है ।

कुछ देर बाद,

सभी लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए हैं। चाहत धीमी कदमो से उनके पास आती हैं और एक-एक करके सबको ब्रेकफास्ट सर्वे करने लगती है । सबको सर्वे करने के बाद वह कुछ दूरी बनाकर अपना सर झुका कर खड़ी हो जाती है। रुक्मणी जी जैसे ही एक बाइट लेती है उनका चेहरा गुस्से से भर जाता है । वह चिल्लाते हुए चाहत को अपने पास बुलाती हैं। चाहत की हालत खराब हो जाती है । उनके चिल्लाने भर से वह अपना सर झुकाते हुए उनके पास आते हैं । रुक्मणी जी खड़े होकर उसके गाल पर खींचकर थप्पड़ जाते हुए कहती है ।।

" क्यों यह खाना बनाया है तुमने.. खीर में चीनी की जगह नमक भर दिया है और यह कोई सब्जी है । इसमें कितना नमक है और मिर्च का तो स्वाद ही नहीं आ रहा , तुम्हारे मां-बाप ने तुम्हें कुछ सिखाया भी है कि बस पैदा करके छोड़ दिया है। ना जाने किस मनहूस घड़ी में तुम हमारे घर में आई थी , अब कितनी डेट हो तुम, मैं तुमसे सवाल कर रही हूं तो तुम्हारे मुंह से जवाब तक नहीं निकल रहा । "

बोलते हुए उसके जबड़े को कस कर दबा देती है । चाहत कि चींख निकल जाती है। उसकी आंखों से आंसू निकलना शुरू हो जाते हैं। वहां मौजूद दो लोगों के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कुराहट खिल जाते हैं। तो वही ज्योति जी ख़ामोश नज़रों से चाहत को देख रही थी , जो कुछ कहा ही नहीं रही थी , रुक्मणी जी उसे खुद से दूर करते हुए ।।

अब तुमसे बोला जाएगा कि नहीं, बोला जाएगा.. " बोलते हुए वह अपनी छड़ी उठाकर चाहत की पीठ पर मार देती है । चाहत जमीन पर गिर जाते हैं। उसे अपने जख्म पर तेज़ दर्द की लहर महसूस हो रहे थे, उसके उस सफेद ड्रेस में हल्के-हल्के खून के दाग लग जाते हैं। वह धीरे से खड़े होकर सिसकते हुए कहती है।

" मैं सच में... सच में बहुत-बहुत ध्यान से बनाया था दादी जी, मेरी.. मेरी गलती नहीं है। मैंने एक-एक चीज बिल्कुल वैसे ही बनायी थी, आप.. आप चाहे तो किचन में चलकर चलकर देख सकते हैं। मैंने सिर्फ वही.. वही सामान डाला था, मुझे... मुझे सच में नहीं पता कि यह कैसे.. कैसे.. हो गया ।"

बोलते हुए उसके आंखों से आंसू निकलने लगते हैं । उसका दिल फट रहा था, वहीं ज्योति जी अपनी नज़रें नीचे कर लेती है और चुपचाप अपने खाने पर ध्यान देने लगते हैं । वहीं कुछ लोगों के चेहरे पर बहुत ही ज़्यादा गुस्सा था , वह बुरी तरीके से रुक्मणी जी को देख रहे थे, बिल्कुल तभी वहां पर एक बाहरी आवाज़ पूछती है ।।

" क्या हो रहा है यहां पर सभी लोग सामने की तरफ देखते हैं । "

जहां पर अव्वेयान अपने कोर्ट के बटन ठीक करते हुए उस तरफ आ रहा था, रुक्मणी जी की पकड़ उनकी डंडे पर मजबूत हो जाती है। वह चुपचाप अपनी जगह पर बैठते हुए कहते हैं। _ " कुछ नहीं आओ नाश्ता करो, तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहे थे , चाहत अपनी जगह से धीरे-धीरे उठ जाते हैं । उसके कपड़ों पर कुछ खून के छीटे लग चुके थे , वह अपने लोअर लिप को व्हाइट करते हुए वहां पर सर झुका कर खड़ी हो जाती है ।।

तभी उसके कानों में रुक्मणी जी की तेज़ आवाज पड़ती है । _ " वहां क्या रानियां की तरह खड़ी हो सर्व नहीं कर जा रहा है । तुमसे खाना " चाहत धीरे कदमों से अव्वेयान के पास आते हैं और उसके प्लेट में खाना सर्वे करने के जैसे ही आगे बढ़ती , रुक्मणी जी अपना डंडा आगे कर देते हैं। जिसके साथ चाहत के हाथ में वह सूप का बोल सीधा अव्वेयान के कपड़ों में जाकर गिरता है । वह एकदम घबरा जाती है।।

वह जल्दी से अपना हाथ में पकड़े हुए बाल को साइड में रखती है और नैपकिन उठाकर उसके कपड़ों को साफ करने लगते हैं । उसके हाथ बुरी तरीके से कांप रहे थे ,अव्वेयान अपनी जगह से खड़ा हो चुका था, वही बाकी लोग एकदम बड़ी-बड़ी आंखों से चाहत को घूर रहे थे, कुछ के चेहरे पर तो गहरी मुस्कुराहट थी, तो कुछ के चेहरों की हवाइयां उड़ चुकी थी, उन सभी में से कुछ कुछ को चाहत के लिए डर लग रहा था, तो कुछ को मज़ा आ रहा था।।

रुक्मणी जी इस पर चिल्लाते हुए कहते हैं । " कैसी लड़की हो तुम , तुम्हें कुछ काम करना नहीं आता है ठीक से... उसे कितनी इंपॉर्टेंट मीटिंग में जाना था, और तुमने सुबह-सुबह ही उसका दिन बर्बाद कर दिया । "

चाहत अपने हाथ में पकड़े हुए नैपकिन को जल्दी से उसके कपड़ों पर रगड़ते हुए घबराई हुई आवाज़ में कहती हैं । _ " वह अभी-अभी साफ हो जाएगा,

मैं करती हूं ना.. "

वह सिसकते हुए उसके कपड़ों को साफ करने लगती है । उसकी आंखों से आंसू निकलना शुरू हो चुके थे , अव्वेयान जो खड़ा था वह एकदम उसके चेहरे पर झुक जाता है और उसके चेहरे को निहारने लगता है । चाहत की झुकी हुई पलके जो एकदम भीग चुकी थी, उसकी लाल हो चुकी नाक जो बहुत ही ज़्यादा लाल थी , इतनी की कभी भी उसमें से खून निकल सकता था , उसके फड़फड़ाते हुए होंठ जिसे वह बार-बार व्हाइट कर रही थी, उसका चेहरा देखकर साफ लग रहा था वह किसी भी वक्त रो सकती है ।।

उसके सफेद पढ़ते हाथ जो बुरी तरीके से कांप रहे थे , उसके चेहरे पर कमज़ोरी , उदासी , दर्द आंसू सब कुछ दिख रहा था , अव्वेयान उसका हाथ पकड़ लेता है । चाहत धीरे से अपनी पलके उठा कर अव्वेयान को देखती हैं। जो अपनी गहरी ओसियन ब्लू आइज़ से उसे ही देख रहा था, उसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशंस नहीं थे, चाहत घबराते हुए कहते हैं ।।

" आप.. आप मेरे साथ.. मेरे साथ चलिए , मैं अभी-अभी से क्लीन कर देता हूं , फिर आपको ज़्यादा.. आपको ज़्यादा टाइम.. टाइम नहीं लगेगा ।"

अव्वेयान बिना कुछ कहे आगे बढ़ जाता है। चाहत अपना सर झुकाए उसके पीछे-पीछे चलने लगती है । वह बहुत ही ज़्यादा घबरा चुकी थी , वही रुक्मणी जी नफरत से चाहत की तरफ देख रही थी, उनकी आंखों में बी हिसाब गुस्सा था , वह अपने दांत किटकैट आते हुए कहती है ।।

" इतनी आसानी से तो मैं तुम्हें नहीं छोडूंगी, नफरत करती हूं मैं तुमसे , इतनी कि तुम्हें अपनी नफरत की आग में जलकर राख कर दूंगा , तुम बस देखते जाओ । " बोलते हुए वह अपने खाने पर ध्यान देने लगते हैं । वहीं पर कुछ लोग एक-एक करके अपने नाश्ता कर उन्हें इग्नोर करके उठ चुके थे , पर रुक्मणी जी को उनसे कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा था, वह तो आराम से अपना खाने पर फोकस कर रही थी ।।

अव्वेयान का कमरा

चाहत पीछे पीछे कमरे में आते हैं ।अव्वेयान एकदम से पलट जाता है । चाहत जो नीचे देख रहे थे , उसका कर सीधा अव्वेयान के सीने में जाकर लगता है। वह घबरा जाती है और जल्दी से अपने कदम पीछे लेते हुए पीछे ले लेती है । अव्वेयान एक नज़र उसे देखता है। और उसको घूरते हुए कहता है । ।

" आप बताओ तुम मेरी शर्ट को 5 मिनट के अंदर अंदर कैसे क्लीन करोगी, चाहत अपना सर झुकाए हुए ही कहती है । आप शर्ट.. शर्ट निकाल कर मुझे दे दीजिए, मैं.. मैं अभी इसको.. इसको साफ करके ले आता हूं । " उसने बहुत मुश्किल से कहा था , अव्वेयान एक नज़र उसे देखता हैं और उसके तरफ कदम बढ़ाते हुए अपने शर्ट के बटन खोलने लगता है। चाहत उसे अपनी तरफ आता देख अपने कदम पीछे लेने लगती है । उसे अजीब सा डर लग रहा था ।।

अव्वेयान के साथ अकेले कमरे में एक गहरी खामोशी के बीच चाहत को वह ठंडा डरावना और उसे सांस तक नहीं लेने दे रहा था , वह पीछे खिसकते हुए दीवार से लग जाते हैं। अभियान उसके हाथ को पकड़ अपने सीने पर रखते हुए कहता है ।

" तुमने मेरे कपड़ों को गंदा कर है । तो रिमूव भी तुम्हें ही करना पड़ेगा , और क्लीन भी तुम्हें ही करना पड़ेगा ना , क्लीन करो । " बोलते हुए उसके हाथों को पकड़ कर अपने शर्ट के बटन पर रख देता है। चाहत अपनी पतली पतली उंगलियों से उसके शर्ट के बटन को खोल, धीरे से उसके शरीर से अलग कर देती है। और धीमे में कदमों से बाथरूम की तरफ चली जाती है।।

अव्वेयान उसे जाता हुआ देखा है । खुद उसके पीछे आ जाता है। चाहत सिंक के पास आती है और उसकी शर्ट के उस हिस्से के ऊपर नल चालू कर धीरे-धीरे साफ करने लगते हैं । उसे अपने पीछे कुछ गर्माहट और ठंडक का एहसास होता है। उसकी सांस गले में अटक जाते हैं । उसके कानों में अव्वेयान की आवाज़ पड़ती हैं ।।

" तुम शर्त तो क्लीन कर दोगी पर इसे कौन क्लीन करेगा , चाहत धीरे से अपनी नज़र उठा कर सामने की तरफ देखती है । अव्वेयान ठीक उसके सामने शर्टलेस खड़ा था, वह दोनों शीशे से ही एक दूसरे को देख रहे थे, अव्वेयान उसे एकदम से अपनी तरफ पेलता है और अपने हाथ की तरफ इशारा करता है ।।

उसके सफेद स्किन गम सूप गिरने की वजह से हल्की-हल्की लाल हो गई थी, उसके खूबसूरत वीनस हाथ की नस दिखने लगी थी , चाहत उसके लाल हो चुके हाथ को देख रही थी , एक बार फिर से उसकी धड़कनें तेज़ हो गई थी, उसे अब बहुत ही ज़्यादा डर लग रहा था, वह अपने लिप्स को व्हाइट कर रही थी, उसकी आंखों से आंसू निकलना शुरू हो जाते हैं और वह रोती हुई आवाज़ में कहती है । _ " मैं सच कह रही हूं मैंने जानकर नहीं करा था , गलती से हो गया था, बोलते हुए वह अपने नाक धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खींच रही थी ,अव्वेयान की नज़र उस पर और गहरी हो जाती है ।।

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