रात का वक्त,
एक बड़ी - सी बिल्डिंग के नीचे बने हुए गोदाम के अंदर एक आदमी बैठा हुआ था । उसकी ब्लैक कलर की शर्ट केहुनी तक मुड़ी हुई थी, और उसके वीनस हाथ काफी अट्रैक्टिव लग रहा था ।
उसकी मसल्स काफी उभरी हुई थीं । वह हाथ में गन को बहुत ही अजीब ढंग से गोल - गोल घुमा रहा था । उसका चेहरा एकदम इमोशन लेस था । अंधेरे में उस आदमी का चेहरा ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था ।
वहां कुछ गार्ड्स खड़े थे, जिन्होंने अपनी पीठ उसकी तरफ की हुई थी और दोनों हाथ पीछे किए हुए थे ।
तभी वह आदमी बहुत ही डरावनी आवाज़ में कहता है, " जाओ और जाकर उसके बाप से कह दो, अगर इतनी ही औकात है, तो आकर सीधा मेरे पैर पकड़ ले । जाने दूंगा उसे । वरना इतनी आसानी से तो जाने नहीं दूंगा मैं ।"
बोलते हुए वह शूट कर देता है । एक गार्ड के माथे से पसीना बहकर सीधा उसके कान तक आ जाता है । पीछे बैठे हुए एक शख्स का चेहरा डर से पीला पड़ चुका था ।
अगले ही पल उस शख्स की हंसने की आवाज़ गूंजती है, और वह एक बार फिर से गोली चलाता है । वह गार्ड, जिसके माथे से पसीना बह रहा था, एक ही झटके में जमीन पर गिर जाता है ।
वह शख्स गार्ड के कंधे के पीछे से गोली चलाता है, जो कि सीधा हेडशॉट था । वह खड़े होकर स्टाइल से गन से निकल रहे धुएं को अपने होठों के पास ले जाता है और फिर गार्ड के पास आता है ।
फिर उसकी गर्दन पर पैर रखकर बहुत ही बेदर्दी से कहता है, " अव्वयान अग्निहोत्री हूं मैं! और तुम्हें क्या लगता है ? तुम मेरे साथ रहकर, मेरा साया बनकर, मुझ पर नजर रखोगे और मुझे पता भी नहीं चलेगा ? अव्वयान अग्निहोत्री वो है, जो लेफ्ट हाथ से काम करता है और राइट हैंड को पता तक नहीं लगता । और तुम उसी के साथ साजिश कर रहे हो ?"
यह बोलते हुए उसका चेहरा एकदम काला पड़ जाता है, उसकी आंखें बेहद लाल हो चुकी थीं । तभी उसका फोन रिंग करने लगता है ।
अव्वयान फोन उठाकर नॉर्मल आवाज़ में कहता है, " हैलो!”
दूसरी तरफ से आवाज आती है, " सर, मैंअंम और उनकी कोई फ्रेंड वापस आ रही हैं ।"
अव्वयान के दांत भींच जाते हैं । वह गुस्से में फोन पकड़ते हुए कहता है, " फुल सिक्योरिटी अलर्ट करो । अगर उसे कुछ भी हुआ, तो तुम अपनी कब्र खुद खोदोगे, या फिर मैं खुद अपने हाथों से तुम्हारी कब्र खोद दूंगा । अगर उसका एक बाल भी बांका हुआ, तो समझ लेना!"
यह कहते हुए वह फोन डिस्कनेक्ट कर देता है ।
वहीं, एयरपोर्ट पर,
एक लड़की, चेहरे पर मास्क लगाए हुए, हाथ में छोटा - सा बैग लिए तेज़ी से आगे की तरफ भाग रही थी । उसके लंबे - लंबे बाल हवा में लहरा रहे थे ।
पीछे एक और लड़की, हाथों में दो - दो बड़े साइज के सूटकेस लेकर भागते हुए कह रही थी, " तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या ? पहले तो बिना किसी को बताए यहां आ गईं, और अब इस तरह भाग रही हो! अगर तुम्हारे उस खूंखार भाई को पता चल गया, तो मुझे मत कहना! तुम्हें पता है, मैं उससे कितना ज्यादा डरती हूं ।"
वह लड़की खिलखिलाते हुए कहती है, " जानवी सिंघानिया किसके बाप से नहीं डरती, तो वह अपने भाई से क्या ही डरेगी!"
यह कहते हुए वह आगे की तरफ कदम बढ़ाती है कि तभी एक गाड़ी तेज़ी से उसकी तरफ बढ़ने लगती है । वह दूसरी लड़की का हाथ पकड़कर अंदर खींच लेती है । वह लड़की तेजी से चिल्लाती है, " जानवी!"
उसके चेहरे का सारा रंग उड़ चुका था । तभी वहां कुछ गार्ड्स आ जाते हैं और उन लड़कियों के चारों ओर खड़े हो जाते हैं । सभी गार्ड्स हाई अलर्ट हो चुके थे ।
तभी उन्हीं के बीच से एक लड़का स्टाइल से चलकर आता है । उसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं था । वह लड़की के सर पर हाथ रखते हुए कहता है, " क्या हुआ है तुम्हें ?"
वह लड़की, जिसका नाम अवनी था, जल्दी से कियान को गले लगाते हुए रोकर कहती है, " भाई, बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई है । वो लोग जानवी को लेकर चले गए ।"
कियान की आंखें डार्क हो जाती हैं । वह गार्ड की तरफ इशारा कर कहता है, " इसे सेफली घर ले जाओ । और चिंता मत करो, उसे मैं लेकर आऊंगा ।"
यह कहते हुए वह अवनी को गाड़ी में बैठाता है और खुद सीधा एक गाड़ी लेकर वहां से निकल जाता है ।
वहीं दूसरी तरफ,
एक गाड़ी मुंबई की सड़क पर बहुत तेज़ रफ्तार से दौड़ रही थी । गाड़ी के अंदर बैठी लड़की लगातार खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी ।
वह गुस्से में चिल्लाती है, " साले, कुत्ते! क***! छोड़ मुझे! आज पहला ही दिन मेरा इंडिया में है, और कमीनों, तुम लोगों ने मुझे किडनैप कर लिया! तुम लोग जानते नहीं हो मैं किसकी औलाद हूं! अगर उन्हें खबर हो गई ना, तो तुम्हारे जिस टकले में बाल नहीं हैं, उसे भी तुम्हारे कंधों से उखाड़ कर फेंक देंगे! कुत्तों, क*** छोड़ो मुझे!"
वह लगातार गालियां बक रही थी । वहीं जो आदमी गाड़ी ड्राइव कर रहा था, वह चिल्लाते हुए कहता है, " अगर इस लड़की का मुंह अभी बंद नहीं किया, तो मैं इसकी चीखों को इसकी सिसकियों में बदल दूंगा! साले, मुंह बंद करो! एक लड़की तुमसे नहीं संभल रही है!"
यह कहते - कहते वह अचानक ब्रेक लगा देता है । रात हो चुकी थी और अचानक ब्रेक लगने से वह लड़की, जो सीट पर बैठी हुई थी, गिर जाती है । उसे अपने सिर पर तेज़ दर्द महसूस होता है । वह गुस्से में उन लोगों को घूरने लगती है ।
तभी वहाँ मौजूद लोग, जो गाड़ी में बैठे हुए थे, चिल्लाते हुए कहते हैं, " रघु, क्या हुआ ? तूने गाड़ी क्यों रोकी ?"
वह आदमी, जो गाड़ी चला रहा था, जिसका नाम रघु था, अजीब तरीके से मुस्कुराते हुए कहता है, " लगता है, किसी को अपनी जान देने का बहुत शौक चढ़ा हुआ है । इसीलिए तो सड़क पर बैठा हुआ है ।"
सभी के चेहरे के एक्सप्रेशंस एकदम बदल जाते हैं । वही जानवी, जो एकदम हैरान थी, वह ऊपर की तरफ उठने लगती है ।
तभी एक लड़का उसके सर के पीछे गन रखते हुए कहता है, " अगर तुम्हें अपनी जान प्यारी है, तो चुपचाप गाड़ी में ही बैठे रहना ।"
यह बोलते हुए बाकी लोग गाड़ी से उतर जाते हैं । वही गाड़ी इस सड़क के बीच - बीच एक शख्स कुर्सी के ऊपर लगभग लेटा हुआ था और एक हाथ से अपनी गन को घुमा रहा था ।
तभी रघु आगे जाकर उस शख्स को घूरते हुए कहता है, " क्यों बे साले, अपनी जान प्यारी नहीं है क्या ? चल, कट ले यहाँ से! तेरे बाप का रोड है क्या, जो इस तरीके से यहाँ पर खाट लगाकर पड़ा हुआ है ? अभी एक बार गाड़ी चलाऊंगा ना, तो तेरी पहचानिया भी नहीं मिलेंगी ।"
कियान के चेहरे पर अजीब - सी स्माइल आ जाती है । वह वैसे ही बैठे हुए अपनी गन को स्ट्रेट करता है और एकदम से अपने पैर को खोलते हुए लगभग ऐसे मूव करता है कि उसका पैर सीधे रघु के मुंह पर लगता है ।
वह बिना रुके छह के थप्पड़ मारने के बाद अपने दोनों हाथों से कुर्सी पर घूमते हुए रघु को मारना शुरू कर देता है । उसके सर पर इतनी जोरदार वार होता है कि उसका जबड़ा फट चुका था । रघु मुंह के बल जमीन पर गिरा था ।
वह शख्स अपनी गन को कमर के पीछे रखकर गाड़ी की तरफ आने लगता है । वही गाड़ी के आस - पास खड़े हुए आदमियों के चेहरे के एक्सप्रेशंस बहुत ही ज्यादा डरावने हो चुके थे ।
उनमें से एक आदमी आगे आते हुए कहता है, " देखो, तुम जो कोई भी हो, हमारे तुमसे दुश्मनी नहीं है । हमें बस इस लड़की को ले जाने दो ।"
कियान अपना सर टेढ़ा करके उस आदमी की तरफ देखता है और बिल्कुल उसके पास आकर उसकी गर्दन पर हाथ डालते हुए कहता है, " क्यों बे, क्या यह तेरी चाहत है ? क्या यह तेरी प्राइवेट प्रॉपर्टी है, जो मैं तुझे लेकर जाने दूं ? बेटा, जिस लड़की को तू लेकर आया है, एक बार उसकी शक्ल भी देख ले । गलत लड़की को लेकर आया है । और वैसे भी, तुझे जिसे लेकर जाना है, पर बात यह है कि हमारी घर की मेहमान है, यानी कि उसकी इज्जत बचाना मेरा काम है । मेरे दिल का टुकड़ा, मेरा शहजादा यहाँ पर नहीं आ सकता था, इसलिए उसकी जगह पर मुझे आना पड़ा । पर बहुत टाइम हो गया यार, प्रैक्टिस नहीं करी है । चलो, उसकी वजह से एक इंटरेस्टिंग केस तो हाथ में आया । वैसे, मैं तुम्हें एक बता सकता हूं कि मैं एक psychologist साथ में पैसे से डॉक्टर हो तो थोड़ा बहुत मुझे नॉलेज है हूं । और अगर तुम्हारी हड्डियाँ यहाँ से टूट गईं, तो तुम्हें बहुत दर्द होगा ।”
यह बोलते हुए वह उसके हाथ को पूरी तरह घुमा कर ऊपर की तरफ खींच देता है । अगले ही पल, अपना दूसरा हाथ उसकी गर्दन में घुसाते हुए एकदम से मोड़ देता है । वह आदमी जमीन पर तड़पता हुआ गिर जाता है ।
कियान एकदम से बाकियों की तरफ बढ़ता है । वही बाकी लोग अपने कदम पीछे की तरफ ले लेते हैं ।
तभी एक आदमी गाड़ी के अंदर बैठी हुई जानवी के बालों को पकड़कर बुरी तरीके से खींचता है और उसके सिर पर गन पॉइंट करते हुए कहता है, " देख ले, तेरी छमिया को मैं लेकर नहीं जा सकता, और ना तो इसे मैं तेरे पास भी नहीं जाने दूंगा । मुझे पता है, तुम लोग हमें जिंदा नहीं छोड़ोगे, तो मैं इसको भी मार देता हूं ।"
जानवी एक नजर उस लड़के को देखकर उसे सिर्फ उसकी आंखें दिखाई देती हैं । उसकी इतनी गहरी काली आंखें जो डर से भरी हुई थीं, वह एक टक कियान को देख रही थी ।
वही कियान एक पल के लिए उसकी नजर पर रुक जाता है । अगले ही पल वह अपनी नजरें हटाते हुए खुद से कहता है, " इसकी आंखें बिल्कुल दिलरुबा की तरह लग रही हैं ।"
यह बोलते हुए वह अपनी आंखें बंद करता है और हल्की आवाज में अपने लिप्स को बाइट करते हुए खुद से बड़बड़ाते हुए कहता है, " होश में आ, होश में । हां, यह तेरी दिलरुबा हो ही नहीं सकती । वरना अब तक इन लोगों का कीमा निकल चुकी होती ।"
यह बोलते हुए वह उस आदमी की तरफ देखता है और फिर उसके पास आ जाता है । और कहता है, " पहली बात, यह मेरी छमिया नहीं है । और दूसरी बात, अगर मेरी छमिया होती ना, तो बेटा, तेरी औकात नहीं है कि उसकी पैरों की धूल भी बन सके । और यह तो मेरे दोस्त के घर आई मेहमान है, यानी कि उसकी इज्जत । और भई, जब मेरे दोस्त की इज्जत पर बात आएगी, तो बात तो मेरी इज्जत पर भी आएगी । तो चल, पहले लड़की को छोड़ और मैं तुझे छोड़ दूंगा ।"
वह आदमी, जिसे माथे पर पसीने आ रहे थे, कांपते हुए कहता है, " नहीं, मुझे पता है, तुम मुझे मार दोगे ।"
उसकी बात पर कियान मुस्कुराता है और अगले ही पल अपनी कमर में लगी हुई गन निकालकर सीधा उसके माथे पर शूट कर देता है । वह आदमी सीधा किसी मुर्दे की तरह लुढ़ककर जमीन पर ढेर हो जाता है ।
वह लड़की यानी की जानवी अपनी जगह पर खड़ी - खड़ी कांप गई थी । खून के छींटे उसके कपड़ों पर लग चुके थे ।
कियान उसके पास आता है, अपनी गर्दन पर हाथ रखते हुए अजीब - सी आवाज में कहता है, " साला, खुद को समझता क्या है बे ? हां, इज्जत से बात कर रहा हूं, तो लोगों को रास नहीं आ रही! वैसे भी, मेरा टाइम बहुत बर्बाद कर दिया ।"
यह बोलते हुए जानवी के चेहरे से मास्क निकालकर अपनी उंगली में घुमाते हुए कहता है, " अब तो डरना बंद कर हो यार । तुम मेरे दोस्त के घर की इज्जत हो, यानी कि मेरी इज्जत ।"
यह कहते हुए वह उसे सीधा गाड़ी में बैठाता है । उसने एक नजर भी जानवी की तरफ नहीं देखा । उसकी गाड़ी सीधा अग्निहोत्री मेंशन की तरफ निकल जाती है । वहीं जानवी अभी भी गाड़ी में बैठी हुई थी । उसका मुंह खुला का खुला रह जाता है ।
अग्निहोत्री मेंशन की गाड़ी आकर, कियान चाबी को दूसरी तरफ उछालते हुए कहता है, " लो, तुम्हारी लगेज वापस आ गई है ।"
जानवी, जो गाड़ी से निकल रही थी, उसके मुंह से खुद के लिए यह सुनकर उसका चेहरा तमतमा जाता है । वह पीछे से लगभग थप्पड़ जड़ते हुए चिल्लाती है, " आर यू आउट ऑफ़ योर माइंड ? तुम्हारे पास दिमाग नाम की चीज है भी की नहीं ? खुद को समझते क्या हो, कहीं के हीरो हो क्या ? तुमने वहाँ सबके सामने उस आदमी को मार दिया । इंसान हो या कोई ?"
बोलते हुए वह ब्रिथलेस हो चुकी थी, उसे ठीक से सांस नहीं आ रही थी । वही अवनी, अपने दोनों हाथ मुंह पर रखकर एक टक जानवी को देख रही थी, जो गुस्से से कियान को घूर रही थी ।
कियान अपने चेहरे पर हाथ रख लेता है, उसका चेहरा हल्का झुक गया था । वह अपने दांतों को चिढ़ाते हुए एकदम से सीधा हो जाता है, अपना हाथ हवा में उठाकर उसे मारने के लिए ऊपर करता है, लेकिन उसकी नजर जानवी के चेहरे पर जाकर रुक जाती है, जो गुस्से से उसे घूर रही थी ।
कियान एक टक उसे देखता ही रह जाता है । उसका हाथ हवा में ही रह चुका था ।
वही जानवी घबरा कर एक कदम पीछे हो चुकी थी । कियान अपने मुठ्ठी बंद कर लेता है और थोड़ा - सा उसकी तरफ कदम बढ़ाते हुए, मुस्कुराते हुए कहता है, " आपकी चाहत में गिरफ्तार हो चुके हैं हम । और अब तो आपका दीदार हमें रोज होगा । आराम से उठेगा अपने हाथों को । वैसे भी हमें बुरा नहीं लगेगा अगर आप हमें दूसरे गाल पर भी इतनी नरम, मुलायम हाथों से छाप छोड़ेंगी ।"
बोलते हुए वह बहुत ही बेशर्मी से अपना दूसरा गाल आगे कर देता है । जानवी मुंह खोलकर कियान को देख रही थी । वही अवनी का हाल भी ऐसा ही था ।
तभी उनके कानों में बहुत ही रोबदार आवाज पड़ती है, " क्या हो रहा है यहाँ ?"
सभी लोग पीछे की तरफ देखते हैं, जहां अव्वयान अपने कपड़े हाथ में लिए अंदर की तरफ आ रहा था । उसका चेहरा बहुत ही डार्क था ।
उसे देखकर अवनी जल्दी से उसके पास जाती है और अव्वयान उसे गले लगाते हुए कहता है, " अपने कमरे में जाओ और जाकर रेस्ट करो । मैं डिनर तुम्हारे कमरे में भिजवाता हूं ।”
वह एक नजर जानवी पर देखता है, जो अभी भी उसकी तरफ देख रही थी । सभी लोग अपने - अपने कमरों की तरफ चले जाते हैं ।
वहीं अव्वयान फोन पर किसी से बात करते हुए अंदर की तरफ जाता है । तो उसे किसी के रोने की आवाज सुनाई देती है । उसके कदम रुक जाते हैं ।
अपने फोन को जेब में डालकर वह सीधा उसकी तरफ कदम बढ़ा देता है । उसकी नजर एक लड़की पर पड़ती है, जो मंदिर के अंदर बैठी हुई थी और धीरे - धीरे सिसकते हुए कुछ बोल रही थी । अव्वयान एक टक उसे देखने लगता है । उसे पहचानने में जरा भी देर नहीं लगती कि वह चाहत है ।
वही चाहत मंदिर में बैठे हुए भगवान की मूर्ति की तरफ देखते हुए रोते हुए कह रही थी, " भगवान जी, प्लीज, थोड़ा - सा, बस थोड़ा - सा खाऊंगी । ज्यादा नहीं । आंटी ने कहा था कि वह आज मुझे खाना देंगी । 4 दिन हो गए, मुझे कुछ भी खाने को नहीं मिला है । इससे अच्छा तो डैड के घर पर था, कम से कम तीन दिन पर खाना तो दे देते थे, पेट भरके । पर ये लोग, ये लोग मुझे खाना भी नहीं देते । मैं बस थोड़ा - सा, एकदम थोड़ा - सा भोग खाऊंगी । बाकी का आप खा लेना ना, प्लीज, मैं थोड़ा - सा खा लू ?”
बोलते हुए वह हिचकियां लेते हुए रो रही थी । वह वही एक प्लेट पर रखा हुआ भोग, अपने कांपते हुए हाथों से आगे की तरफ बढ़ाती है ।
वह जैसे ही उस भोग को टच करती है, उसकी दर्द भरी सिसकियाँ निकल जाती हैं । वह अपने हाथ की तरफ देखती है और उसे अपने सीने पर रखकर खुद से कहती है, " भगवान जी, आप मेरे साथ ऐसा ही करेंगे, जैसे सब लोग करते हैं । आप ने हीं तो मुझे बनाया था ना, तो आप भी मुझे खाना नहीं देंगे, जैसे घर में मॉम नहीं देती थी ।"
वह ऐसे ही अपने घुटनों में चेहरे को छुपा लेती हैं और सिसकने लगते हैं । अव्वयान की आंखें उसे देखकर एकदम गहरी हो चुकी थीं । एक नजर उसे देखने के बाद, वह सीधा अपने कमरे में चला जाता है ।
वही चाहत धीरे - धीरे अपने घुटनों में सिर रखकर सिसक रही थी । उसका चेहरा बेहद लाल था । वह ऐसे ही काफी देर तक बैठे रहती है । जाने किस पैहर, उसका चेहरा लुढ़ककर सीधा जमीन पर आ जाता है । उसे एहसास ही नहीं होता कि उसके हाथ जमीन पर पड़े हुए थे । उसका पूरा शरीर लाल पड़ चुका था ।
नेक्स्ट मॉर्निंग,
चाहत की आंख धीरे - धीरे खुलती है । उसे ऐसा लग रहा था, जैसे कोई उसके ऊपर रेंग रहा हो । वह जैसे ही अपनी आंख खोलती है, उसकी आंखें एकदम गहरी ओशियन ब्लू आँखों से जाकर टकराती हैं ।
उसके चेहरे पर छोटी - सी मुस्कान खिल जाती है । वह धीरे - धीरे उठकर बैठती है । उसे अपना सिर भारी होता हुआ महसूस हो रहा था ।
आर्यन, जो चाहत को उठाने के लिए आया था, वह अपने दोनों हाथ चाहत की गर्दन पर लपेटते हुए कहता है, " एंजेल, जल्दी से उठ जाओ । वरना दादी आ जाएगी!"
चाहत उसकी बात पर हल्का - सा मुस्कुराती है और उसे अपनी गोद में उठाकर बाहर लेकर आता है । वह उसे झूले पर बैठाकर कहती हैं, " अच्छा, मैं बस 5 मिनट में रेडी होकर आती हूं । उसके बाद तुम्हारे लिए ब्रेकफास्ट रेडी करूँगी । तब तक तुम यही रहना ।"
आर्यन अपना सिर हिला देता है । चाहत अंदर चली जाती है । वह सीधा सर्वेंट क्वार्टर में आती है और कुछ ही देर में रेडी होकर सीधा किचन में चली जाती है ।
जैसे ही कढ़ाई को छूती है, उसकी हल्की - सी सिसकी निकल जाती है । वह अपने हाथ की तरफ देखते हैं, जो पूरी तरीके से लाल हो चुका था । उसका हाथ कांपने लगता है । अपने हाथ पर दुपट्टा लपेटते हुए आर्यन के लिए ब्रेकफास्ट रेडी करने लगती है ।
कुछ ही देर में वह ब्रेकफास्ट रेडी करके ट्रे में लगाते हुए सीधा बाहर आती है और उसे टेबल पर रखते हुए आर्यन की तरफ मुड़ती है ।
वही अव्वयान, जो बालकनी में खड़ा हुआ था, उसकी आंखें बिल्कुल लाल हो चुकी थीं । वह एक टक आसमान को देख रहा था । उसे देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे वह पूरी रात सोया न हो ।
चाहत को देखकर उसके कदम अपने आप चाहत की तरफ बढ़ जाते हैं । वह सीढ़ियों से होते हुए नीचे आने लगता है ।
उसकी नजर चाहत से एक पल के लिए भी नहीं हटी थी । अव्वयान ने अपने लिए अपने रूम से सीधे बाहर का रास्ता बनवाया था । उसे ज्यादा नॉइज बिल्कुल भी पसंद नहीं थी और न ही किसी का इंटरफेयर । इसलिए उसके लिए अलग ही रास्ता बनाया गया था ।
वही चाहत, जो आर्यन की तरफ पलटती है, उसकी आंखें हैरानी से बड़ी हो जाती हैं । आर्यन, जो झूले पर बैठा हुआ था, चाहत की तरफ देखता है और उंगली के इशारे से खुद की तरफ आने का इशारा करता है ।
चाहत, जो हैरानी से उसे देख रही थी, उसकी नजर झूले की चेन पर थी । वह तेजी से भागते हुए आर्यन के पास आती हैं और उसके अगली ही पल झूला चेन से टूट जाता है ।
आर्यन की एक जोरदार चीख निकल जाती है, " आह्ह्हह्ह्ह्ह….!”
वही अव्वयान, जो चाहत की तरफ आता हुआ देख रहा था, उसे भागता हुआ देख तेज कदमों से उसकी तरफ बढ़ता है ।
वह चाहत की गोद से लगभग आर्यन को छीनते हुए अपनी बाहों में लेते हुए कहता है, " तुम ठीक तो हो ? तुम्हें लगी तो नहीं ?" उसकी आवाज में हल्की फिक्र थी ।
वही आर्यन कसके अव्वयान के सीने में चिपक जाता है । वह बहुत ही ज्यादा घबरा गया था ।
वही चाहत धीरे से अपनी जगह से उठती है और आर्यन के पास जाकर उसके पेट पर हाथ रख लेती है । आर्यन, एक नॉर्मल सा टच महसूस कर, धीरे से अपना चेहरा अव्वयान के सीने से निकालकर चाहत की तरफ देखता है और उसकी तरफ अपने दोनों हाथ बढ़ा देता है ।
चाहत जल्दी से उसे अपने गोद में ले लेती है और उसके पूरे चेहरे को छूने लगती है । वही आर्यन अपने दोनों हाथ उसकी पीठ पर लपेट देता है, पर उसे
कुछ गीला - गीला सा लगता है । वह अपने छोटे से हाथ को आगे की तरफ बढ़ाकर देखता है, उसका हाथ पूरा खून से भरा हुआ था ।
वही अव्वयान चाहत का हाथ पकड़कर लगभग खुद की तरफ खींचता है कि चाहत एकदम से बेहोश हो जाती हैं । आर्यन की एक जोरदार चीख निकल जाती है, " Mommmmmmmmmmm!"
उसकी आंखों में आंसू आ चुके थे । वही अव्वयान हैरानी से चाहत की तरफ देखता है । वह अपने हाथ को आगे की तरफ करता है । उसके हाथ में खून लगा हुआ था और उसका चेहरा बिल्कुल काला पड़ जाता है । वही आर्यन की आंखों से आंसू निकलना शुरू हो जाता है ।



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