अव्वेयान का कमरा
चाहत ठीक अव्वेयान के कमरे के सामने खड़ी हुई थी वह आहिस्ता से अपना हाथ कमरे के दरवाजे पर रखते ही है दरवाजा अपने आप खुल जाता है वो एक नजर बाहर चमचमाती हुई घर को देखते हैं और उसके बाद अंदर जहां दूर तक पसरा हुआ वह अंधेरा जितना ज्यादा गहरा था उसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल था। वह अपने नाजुक से पैरों के साथ अंदर की तरफ कदम रखती है उसने अपनी सांस तक रोक ली थी और नीचे की तरफ देख रहे थे पर जब आसपास उसे कुछ भी महसूस नहीं होता वह अपने नजर उठाकर आसपास देखते हैं वहां सिर्फ गहरी खामोशी का एहसास हो रहा था।



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