अव्वेयान का कमरा
चाहत ठीक अव्वेयान के कमरे के सामने खड़ी हुई थी वह आहिस्ता से अपना हाथ कमरे के दरवाजे पर रखते ही है दरवाजा अपने आप खुल जाता है वो एक नजर बाहर चमचमाती हुई घर को देखते हैं और उसके बाद अंदर जहां दूर तक पसरा हुआ वह अंधेरा जितना ज्यादा गहरा था उसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल था। वह अपने नाजुक से पैरों के साथ अंदर की तरफ कदम रखती है उसने अपनी सांस तक रोक ली थी और नीचे की तरफ देख रहे थे पर जब आसपास उसे कुछ भी महसूस नहीं होता वह अपने नजर उठाकर आसपास देखते हैं वहां सिर्फ गहरी खामोशी का एहसास हो रहा था।
उसकी नजर बालकनी पर चली जाती हैं जो खुली हुई थी और वहां से दिख रहा वह खूबसूरत से चांद की रोशनी जो सीधा उस कमरे में दाखिल हो रही थी वो देखने में बेहद खूबसूरत लग रहा था
वो बस नजरे झुकाए नीचे की तरफ ही देख रही थी पर जब उसे एहसास होता है कि आसपास कोई नहीं है वह आहिस्ता से अपनी नजरे उठाकर उस कमरे की तरह देखते हैं वह पूरी तरीके से मोयना करने की कोशिश कर रहे थे जैसे सच में उस कमरे में कोई है कि नहीं पर जैसे ही उसे एहसास होता है उसे कमरे में कोई भी नहीं है वो धीरे-धीरे अपनी नाजुक से पंजों के बल भागते हुए बालकनी में आती हैं और उस बालकनी के पास खड़े होकर एक गहरी सांस भर अपने दोनों हाथों को फैला लेते हैं। वहां चल रहा है ठंडी से हवा उसे छूकर जा रहे थे वो उस ठंडा होता हुआ मौसम को महसूस कर रहे थे उसके लहराते बाल ,होठों पर सजी हुई मुस्कुराहट चांद से भी ज्यादा खूबसूरत चेहरा पर दाग उसमें चांद जैसे तो बिल्कुल भी नहीं थे वह बेहद खूबसूरत लग रहे थे और चांद की रोशनी जो उसके चेहरे पर पढ़ रहे थे उससे इतनी खूबसूरत कोई भी एक बार देखे हैं तो बस देखता ही रह जाए वह अभी ठंडी हवाओं को महसूस कर ही रहे थे कि तभी उसके कानों में दिल दहला देने वाली आवाज पढ़ते है।
लगता है अपने उन दोगले मां-बाप से मिलकर बहुत खुशी हो रहे हैं कुछ पट्टी पढ़कर गए हैं क्या वह तुम्हें मेरे खिलाफ जो तुम्हारे होठों से वह मुस्कुराहट जा ही नहीं रही
चाहत का जो जरा देर गुलाब की तरह खीला हुआ चेहरा था वह एकदम से सफेद पड़ जाता है वह पीछे पलटती उससे पहले अव्वेयान उसके कमर पर दो मजबूत हाथ जकड़ महसूस होती है । वह खुद में ही एकदम से सिमट जाती है । उसे अव्वेयान की गहरी सांस अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थी
उसकी सांस गले में ही रुक जाते हैं उसने अपनी कंधों को ऊपर की तरफ उठा लिया था, और सांस तक रोक ली थी अव्वेयान उसकी रुकी हुई सांसों को महसूस कर पा रहा था जिसे महसूस कर उसके चेहरे पर डेविल मुस्कुराहट आ जाती है । वो उसके कान के पास गहरी आवाज में केहते हैं। क्या हुआ डर लग रहा है क्या मेरी आवाज सुनकर
बोलते हुए वह एकदम से पलट बाल्कनी से चिपकाते हुए अपने दोनों हाथ रेलिंग के इर्द-गिर्द रख उस पर झुक जाता है ।
चाहत एक नजर पीछे की तरफ देखते हैं और सामने खड़े हुए अव्वेयान को जो उसके चेहरे के दर को बहुत अच्छे से भाप चुका था उसे खुद में कैद करते हुए उसके चेहरे पर आई लट को आहिस्ता से पीछे कर उसके चेहरे पर झुक कर खड़ा हुआ था । वही चाहत तो जैसे उसकी शरीर से जान निकलने के लिए तैयार हो गए थे। वह वहीं खड़े-खड़े बुरी तरीके से कांप रहे थे
उसका चेहरा बिल्कुल सफेद पड़ चुका था और नज़रे नीचे की तरह झुक चुके थे उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वह अपनी एक नजर अव्वेयान पर डालना खुद पर पाप समझते हो अव्वेयान उसकी झुकी हुई नजरों को काफी देर से देख रहा था ,
वही चाहत से जब उसकी तपती हुई नजरे बर्दाश्त नहीं होती वह अपनी आंखें बंद करके खड़ी हो जाते हैं वहां गहरी खामोशी पसरी हुई थी जहां सिर्फ अव्वेयान की सांसों का शोर था चाहत ने तो जैसे सांस ही रोक लेते थे काफी देर तक जब चाहत सांस नहीं लेती अव्वेयान उसके झबड़े को दबाते हुए दांत पीसकर कहता है, मिस ड्रामा क्वीन यही नाम है ना तुम्हारा जो अपने पेरेंट्स के सामने ड्रामा कर रही थी लगता है उन्हें भी तुम्हारी ड्रामा का बारे में पता चल चुका है इसीलिए तो वह तुम्हें यहां छोड़ कर चले गए , फिर हल्का हस कर , वैसे ऐसे का क्या रहे थे मुझे भी तो बताओ जरा बोलते हुए उसका एक अंगूठा उसके नाजुक से होठों को सहला रहा था।
चाहत का शरीर जो पहले ही कांप रहा था और अव्वेयान के हरकत पर वह बुरी तरीके से सिहर जाते हैं पर चाहत में अपनी आंखें एक बार नहीं खोली थी जिसे अब अव्वेयान को गुस्सा आ रहा था, वह उसके गर्दन को पकड़ एकदम से ऊपर की तरफ कर जबड़े को दबाते हुए गुस्से से केहता है , क्या तुम बहरी हो चुकी हो जब मैं तुमसे बात कर रहा हूं तो तुम्हारी नजर मुझ पर होनी चाहिए नीचे क्या देख रही हो हां नीचे क्या तुम्हारा कोई आशिक खड़ा हुआ है जिस पर तुम्हारी नज़रें टिकी हुई है ।
चाहत को उसकी शब्द अपनी कान में किसी गर्म लोहे के पिघलने जैसे महसूस हो रहे थे वह अपना सर आहिस्ता से ना में हिला देते हैं तुम्हें उसके कुछ ना बोलने पर गुस्से से पागल हो जाता है उसका कानों में कियान के कहे हुए शब्द गूंज रहे थे, जिसे तुम दर्द देने की कोशिश कर रहे हो कहीं ऐसा तो नहीं जितना वह दर्द सह रहे हैं उसे कहीं गुना ज्यादा दर्द पहले ही बर्दाश्त कर चुके हो इसलिए तुम्हारे दिए दर्दों से उसे दर्द का एहसास होना बंद हो गया है । किसी इंसान को इतना भी दर्द मत दो कि वह अपने दर्द पर मरहम लगाना भूल जाए ,
चाहत इस बार फिर से खामोश थी अव्वेयान उसे पकड़ कर अंदर लेकर आता है ।और सीधा काउच पर पटक देता है चाहत ने कुछ भी नहीं कहा ना हां अव्वेयान उसे इस तरीके से खामोश देख एक सिगर निकलता है और उसे जलाकर अपने तपते हुए होठों पर लगा सिगार के लंबे कश लेने लगता है ।
चाहत डरी हुए सी सोफे के किनारे एकदम चिपक कर बैठी थी , उसने अपनी सांसों को बहुत ही धीमा कर हुआ था हअव्वेयान कुछ देर उसे देखता है और देखते ही देखते हैं वह सिगार कब खत्म हो जाते हैं उसे एहसास ही नहीं होता वह एक और शिगार चलता है और उससे भी अपने होठों से लगाकर फूकना शुरू कर देता है। इसी तरीके से न जाने कितनी सिंगर वह जल चुका था 1 घंटे के अंदर पर चाहत अभी भी वहीं बैठे बिना कुछ कहे और पूरी तरीके से कांप रही थी जब अव्वेयान जिसका टेम्पर ही इतना हाई था कि वह मिनट में इंसान की जान ले ले किसी की खामोशी उसका बर्दाश्त करना बाहर थे पता नहीं क्यों लेकिन इस बात का तो उसे भी एहसास नहीं था कि उसे चाहत की खामोशी इतना ज्यादा चुभ क्यों रहे हैं वह अपने हाथ में जल रहे उसे शिगार की तरफ देखता है और उसे चाहत की तरह बढ़ा देता है । चाहत उस जलती हुई सिगर को देखने लगते जैसे उसके दिमाग में कुछ चल रहा हो
अव्वेयान अगले ही पल उस सिगार को जमीन पर फेक उस पर जूता रखते हुए तुरंत खड़ा होता है और अपना घुटना सोफे पर रख एक हाथ चाहत की गर्दन में फंसा उसके होठों पर अपना होंठ रख अपने मुंह में भरा हुआ धुआं उसके मुंह में भरने लगता है ।
चाहत की झुकी हुई पलके एकदम से ऊपर की तरह उठ जाते हैं ।
अव्वेयान जो उसे देख रहा था उसकी पकड़ अचानक ही चाहत की गर्दन पर नरम पड़ जाते हैं वह चाहत की आंखों को देखने लगता है उसकी वह हनी गोल्डन आइस जो बिल्कुल लाल हो रखे थे, आंखों के नीचे वह गहरे लाल निशान देखकर सब बता रहे थे कि वह कितना रोई हो अव्वेयान उसे दूर हो जाता है।
चाहत उसे खुद से दूर होता ही अपने दुपट्टे से अपने होठों को साफ करने लगते हैं उसे तो लगा ही नहीं था कि अव्वीयान छोड़ देगा फिर उसकी आंखों से एक बार फिर से आंसू का कतरा निकाल कर गाल पर आ चुका था
अव्वेयान उसे खामोश देख सोफे पर बैठ जाता है फिर गहरी आवाज में कहता है। इधर आओ
।।
चाहत उसकी तरफ हल्की नजर डालते हैं और फिर सर ना में हीला देते हैं।
अव्वेयान उसके न देख जरा आवाज को नरम करते हुए कहता है , मैंने कहा इधर आओ अदर वाइज मैं उधर आया तो तुम्हारी चीख निकाल दूंगा और छोड़ूंगा भी नहीं
चाहत उसकी बात का मतलब बहुत अच्छे से समझ रहे थे वह आहिस्ता से अपने घुटनों के बल खींसकते हुए उसके नजदीक आकर बैठ जाते हैं ।
अव्वेयान उसे गहरी नजर से देखने लगता है उसके लंबे बिखरे हुए बाल पुरे पीठ पर बिखरे हुए थे ,और मासूम से सफेद पड़ चुका चेहरा जो लाल था कांपते हुए होंठ जो उस से डर की निशानी थी
वह अव्वेयन के नजदीक आकर बैठ गई थी उसने अपनी नज़रें एक बार फिर झुका ली थीं उस से अव्वेयन की तपती हुई नजरे खुद पर बर्दाश्त नहीं हो रही थी
अव्वेयन उस के चेहरे से बिना नजर हटाए कहता है गिव मी वन ग्लास वॉटर
चाहत उसके बात पर सामने टी टेबल पर देखती हैं जहां एक वास रखा हुआ था जिसमें लाल गुलाब क थे और उसी के ठीक बगल में कांच का जार और ग्लास रखा था वह हाथ आगे बढ़ाकर उसे जार को उठती है। और गिलास में पानी डालने लगती है पर कमजोरी की वजह से उसके हाथ बुरी तरीके से कांप रहे थे, उसकी आंखों के सामने हल्का अंधेरा छाने लगता है गिलाश पूरा भरताहुए पानी ऊपर से गिरने लगता है और हर छूट के सीधा नीचे गिर जाता है।
डर से अपनी आंखें खींच लेती है । कांच के टुकड़े पूरी जगह फैल जाती है और कुछ काउच पर a जाते है।
वह खुद को गिरने से संभालने के लिए जैसे ही टेबल को पकड़ने की कोशिश करती है। उसके हाथ सीधा उस वस के में रखे हुए गुलाब के फूल में लगता है । जिसमें से कांटे हटाए ही नहीं गए थे उसका हाथ से खून निकलना शुरू हो जाता है । वह पीछे की तरफ अपना हाथ खींचती तो सीधा काउच पर गिरती है उसका सर पूरी तरीके से घूम रहा था उसके पीट में कांच का टुकड़ा अंदर की तरफ घुस जाता है। दर्द से अपने होठों को वाइट करने लगती है
उसके पुराने जख्म अभी भर नहीं थे और एक बार फिर से नए जख्म ने उसे अपने करीब कर लिया था
अव्वेयन जो उसे ही देख रहा था उसकी आंखें कुछ अजीब हो जाती है एक्सप्रेशन लेस चेहरा कुछ बयां नहीं कर रहा था पर आंखें जिनमें एक पल के लिए कुछ बदल गया था।
अव्वेयान आहिस्ता से उसके नजदीक आ उसके ऊपर झुकने लगता है । पानी तो साइड में पहले ही गिर चुका था चाहत एकदम से घबरा गई थी उसने दर से अपनी आंखें भेज ली थी । अव्वेयान उसके नजदीक आकर उसके चेहरे पर झुकते हुए एकदम नजदीक आ जाता है ।
चाहत का डर से सफेद पड़ता चेहरा उसके गुलाबी हो चुके हैं होंठ जो उसे बहुत ही खूबसूरत बना रहे थे वह उसे देखते हुए खुद से कहता है । कोई डरते हुए भी इतना खूबसूरत कैसे लग सकता है भला , उसकी नजर चाहत से हटने के लिए तैयार ही नहीं थी,
तभी उसके कानों में चाहत की बहुत ही मीठी और सुरीली से आवाज बढ़ाते हैं , वो डर कर कहती है। वह मैंने मैंने जानकर नहीं क्या वह गलती से गलती से टूट गया मैं अभी साफ कर लेती हूं उसके चेहरे पर दर्द छा चुका था फिर भी वह अपने दर्द को नजर अंदाज कर अव्वेयान से माफी मांग रहे थे,
अव्वेयान उसके चेहरे को देखने लगता है क्या सच में आज के टाइम पर भी ऐसी लड़कियां होती है जिन्हें अपने दर्द से फर्क ना पढ़ रहा हो
वह उसके होठों पर अपनी ठंडी उंगली रख गहराई से उसे देखते हुए shhsshhhhs उसे एकदम खामोश कर देता है ।
चाहत अपनी आंखें डॉ ओर दर्द से मिच लेती है। जैसे आंखें बंद कर लेंगे अव्वेयान उसकी नजरों से दूर हो जाएगा और उसे कोई चोट नहीं देगा ,
अव्वेयान उसके बचकानी हरकत पर उसे घूरता है और फिर अगले ही पर उसे अपनी बाहों में उठाते हुए सीधा बेड की तरफ कदम बढ़ा देता है । उसने बहुत ही ध्यान से चाहत को उठाया था , जैसे वह कोई कांच की गुड़िया हो जरा सख्ती से पकड़ने पर वो टूट जाएगी
वह उसे बेड पर बैठता है और खुद उसके नजदीक होकर बैठ जाता है। चाहत डर से जल्दी से पीछे की तरफ खिसकने लगती है। अव्वेयान उसके बिल्कुल नजदीक जाकर उस के चेहरे पर हाथ रख धीरे-धीरे अंगूठे से सहलाते हुए कहता है , don't provek me little desire वरना जख्म पर मलहम लगाने की जगह और दर्द दे सकता हु ,
उसकी गहरी आवाज ठंडा चेहरा बेहद सख्त थी उसकी आंखें देख चाहत खामोशी से बैठे जाती है उसकी आवाज इतनी ठंडी थी कि उसे अपनी रीड की हड्डी गलती हुई। महसूस हो रही थी पहले ही नवंबर की मौसम की ठंड ऊपर से अव्वेयान का वह डोमिनेटिं ओरा जो उस कमरे को अजीब से ठंडक में गिराता चला जा रहा था।
चाहत डरते हुए खामोशी से वही बैठ जाती हैं, पर डर तो उसे अभी भी लग रहा था जिसे अव्वेयान भी समझ रहा था वो सर हिला देता हैं।
अव्वेयान अपना बड़ा सा हाथ ड्रार की तरफ बढ़कर उसमें से फर्स्ट एड और एक कैची निकलता है चाहत की आंखें उस कैची देखकर और ज्यादा बड़े हो गई थी
वही अव्वेयान कैची को अच्छी तरीके से अपनी हाथों में घूमाते हुए बिल्कुल चाहत के सामने लेकर आ जाता है ।
उन दोनों के दरमियान गहरी खामोशी थी पर चाहत की आंखें बहुत कुछ बोल रही थी, वही अव्वे
यान के होठों पर तेरी मुस्कुराहट खीली हुई थी,



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