चाहत कमरे में अकेली थी वह उठकर सीधा वॉशरूम में चली जाती हैं सीसे के सामने खड़े होकर खुद के अक्ष को देखने लगती हैं । अच्छे साफ सुथरे कपड़े पहने हुए थे , पहले से चेहरा काफी ज्यादा खिला हुआ था। पर होठों पर मायूसी, आंखों में दर्द और रंगत बदली हुई थी, शीशे पर अपना हाथ रख अपने अक्ष को देखते हुए कहती हैं। अगर यह खूबसूरती मुझे नहीं मिली होती है । तो आज मैं जहां हूं वहां नहीं होती लोगों के लिए खूबसूरती दुआ होती हैं और मेरे लिए यही खूबसूरती मेरी बद किस्मत ही बन गई, काश काश मैं दुनिया की सबसे सबसे बदसूरत लड़की होती है। बोलते हुए शावर के नीचे जाकर खड़ी हो जाती हैं । उसने कपड़े भी नहीं उतारे थे । शावर का वह ठंडा पानी उस अपने शरीर पर महसूस हो रहा था। पर जैसे उसे फर्क ही नहीं पड़ रहा था। वह अपने हाथों को अपने चेहरे के पास लेकर आती है और अपनी कलाई की तरह देखती हैं। जहां अब सिर्फ निशान था उस निशान को देखते हुए कहती हैं। क्यों भाई आपने क्यों बचाए मुझे, मर जाने देते मैं अगर किसी की जिंदगी में जाऊंगी तो उसकी बद किस्मती बन जाऊंगी , कोई मुझसे प्यार नहीं कर सकता है । भाई और ना ही मैं किसी के प्यार के लायक हूं। आप लोग सिर्फ और सिर्फ अपना वक्त बर्बाद कर रहे हैं मेरे पीछे,।।।
फिर गहरी सांस लेकर कुछ देर में फ्रेश होकर बाहर आती बेड की तरफ देखती हैं जहां पर रक्षित ने उसी का पसंदीदा एक वाइट और पिंक कलर का कोड सूट निकाल कर रखा हुआ था। और मैचिंग शूज और ज्वेलरी उसके होठों पर मुस्कुराहट खिल जाती हैं ।जब वह छोटी थी और यहां घूमने आया करती थीं।तो हमेशा रक्षित ही उसका हर एक चीज करके रखता था वह तो हमेशा उन दोनों के कमरे में धमकती रहती थी , वह कभी अपने कमरे में नहीं सोई थी, और वह दोनों उसे मना भी नहीं करते थे, बल्कि खुद सोफे पर सोते थे ,या फिर उसके कमरे में आकर सोफे पर सो जाया करते थे जब कभी वह उनसे नाराज होती थी,
चाहत तैयार होकर कमरे से बाहर निकलती हैं ही रही थी कि उसके कानों में किसी की बहुत ही जानी पहचानी सी आवाज जाती हैं । वह उसके कदम उस कमरे की तरफ
कदम बढ़ जाते हैं । वो उस कमरे के नजदीक जाकर खड़ी हो जाती हैं। सामने रक्षित बैठा हुआ था उसके हाथ में फोन था । एक अपने फोन को घूरते हुए कह रहा था,, अगर मुझे अमृत नहीं मिला तो मैं तुम लोगों की जान ले लूंगा 24 घंटे हैं तुम्हारे पास मुझे वह 24 घंटे के अंदर अंदर फार्म हाउस पर चाहिए और अगर वह नहीं मिला तो मैं तुम सबकी की जान ले लूंगा,
उसकी आवाज में बेहद गुस्सा था ।
रूद्र जो खिड़की के पास खड़ा हुआ था रक्षित के पास आ उसके घुटनों के पास बैठते हुए कहता हैं ।भाई क्या गुड़िया कभी भी पहले जैसी नहीं हो पाएंगे कैसे-कैसे यह लोग ऐसा कर सकते हैं । उनको तरस नहीं आया उस बच्ची पर अगर वह लोग मेरे हाथ लग गए ना तो मैं उनकी बोटी बोटी करके जंगली जानवरों को खिला दूंगा ।
रक्षित उसके कंधे पर हाथ रख उसे हौसला देते हुए कहता है , तुम फिर से इमोशनल हो गए तुम लड़के हो इमोशनल होना बंद करो और नजर रखो उस अव्वेयान पर अगर वह आसपास दिखे तो अच्छे सबक सिखा देना ,
तभी रक्षित के दिमाग में कुछ क्लिक होता है और वह रुद्र की तरफ देखते हुए कहता है । स्कूल टाइम पर एक लड़का था ना उसे बुलाओ घर पर बोलते हुए वह कमरे से बाहर की तरफ आने के लिए उठता है तो चाहत जल्दी से वहां से धीमे-धीमे कदमों से जाने लगती हैं।
रक्षित दरवाजा खोलकर बाहर आते हुए स्टार्स की तरफ कदम बढ़ाकर कहता है । गुड़िया तुम अपनी बचपन की हरकतों से अभी भी बाज नहीं आई ना कितनी दफा कहां है । दरवाजे पर खड़े होकर किसी की बातें चुप-चुप कर सुनना अच्छी बात नहीं होती वह हल्का सा हंस दिया था।
वही चाहत जो कमरे की तरफ भाग रही थी वह अपने दांतों से जीव को दवा लेती हैं। और जल्दी से पीछे पलट कर रक्षित की तरह देखती हैं। जो सीडीओ से उतर चुका था वो अपनी उंगलियों को आपस में मसलते हुए आगे की तरह बढ़ती की रक्षित की आवाज फिर से उसके कान में पढ़ती हैं । वह नीचे से चिल्लाते हुए कह रहा था , अब जल्दी आओ वरना लेट हो जाएगा
चाहत जल्दी से नीचे की तरफ जाती हैं। वह तीनों मिलकर घर के पीछे वाले हिस्से में आ जाता जहां काफी दूर तक हॉर्स राइडिंग करने के लिए घोड़े का अस्तबल था वह गार्डन बना हुआ था उसे सेपरेट किया गया था ।
चाहत बड़ी-बड़ी आंखों से उस जगह को देख रही थी उसने यह तो कभी नहीं सोचा था रुद्र और रक्षित दोनों ही उसका एक-एक हाथ पकड़ कर उसे अंदर लेकर आते हैं और सीधा एक घोड़ा को निकालते हैं चाहत की आंखें उस घोड़े को देखकर और ज्यादा बड़ी हो जाती है । वह वाइट कलर का अरेबियन हॉर्स था उसकी कद कट ही देखकर उसकी नस्ल का अंदाजा लगाया जा सकता था।
उसके सफेद लंबे बाल जो एक तरफ गिरे हुए थे वह बहुत ही खूबसूरत लग रहे थे चाहत उस घोड़े को देखकर उन दोनों की तरफ देखने लगती हैं रूद्र उसके कंधे से अपने कंधे मारते हुए कहता है । क्या हुआ अब ऐसे क्या देख रहे हो चलो अब रेस लगाते हैं। देखते हैं तुममें भी अभी भी वह दम है कि नहीं है। बोलते हुए वह लोग अपना-अपना घोड़ा लेकर बाहर आ जाते हैं।
दोनों की तरह देखते हैं और एक ही बार में घोड़े के ऊपर बैठ जाती हैं । वह दोनों भी अपने-अपने घोड़े पर बैठ जाते है। चाहत एक हाथ से घोड़े के गार्डन के पास आहिस्ता से सहला देती हैं ।और उसके गाल को छूते हुए घोड़े को चलाने लगती हैं । रूद्र आगे की तरफ घोड़े को दौड़ आते हुए कहता हैं । अरे गुड़िया लगता है तुम हॉर्स राइडिंग भूल चुकी हो अब मैं भी देखता हूं । कि आज कौन मुझसे जीतेगा और जीतने वाले को पूरे मन भरने तक गोलगप्पे मिलेंगे ,
चाहत की आंखों में एक पल के लिए चमक उठती है वह रुद्र की तरफ देखने लगती हैं । उन दोनों को बहुत अच्छे से पता था चाहत को सबसे पहले नंबर पर गोलगप्पे पसंद है और दूसरे नंबर पर हॉर्स राइडिंग पढ़ाई लिखाई तो उसके मन की थी ही नहीं कभी या तक वो पूरा दिन हॉर्स राइडिंग करती रहती या कुछ ड्राइंग करती थी, और आज वह फिर से 7 साल बाद घोड़े पर बैठे थी और आज उसे उसके मन की चीज दी जा रही हैं वह खुश थी ।
वो उन दोनों की तरह देखते हैं और मुस्कुराते हुए घोड़े की स्पीड बढ़ा देती हैं। वही वो दोनों भी अपनी पकड़ घोड़े की नाल पर मजबूत कर देते हैं । दोनों ही घोड़े को तेजी से भाग रहे थे। वही चाहत भी अपने घोड़े को तेजी से भाग रही थी ,
सुबह के 6:00 बज रहे थे, हल्की-हल्की ओश की बूंदे चाहत को अपने चेहरे पर महसूस हो रही थी वहां चलती वह ठंडी ताजगी से भरी हुई हवा , और घोड़े की आवाज बहुत ही अच्छा लग रही थीं उसके वह अपने बालों में लगा हुआ रबर बैंड एक हाथ से निकाल कर फेंक देती हैं उसके लंबे बाल उस हवा में लहरा रहे थे ,,उसे अब सुकून का एहसास हो रहा था, धुन बढ़ती जा रही थी। और वह आगे की तरफ घोड़े को लेकर आ चुकी थी वह काफी आगे आ गए थे।
रुद्राक्ष काफी पीछे रह गए थे उसके होठों पर मुस्कुराहट
आ जाती है वह खुद से कहती हैं। चाहत को कभी कोई भी हॉर्स राइडिंग में हरा ही नहीं सकता वो बहुत ही अकड़ से अपने बालों को एक तरफ झटकते हैं ।और फिर से घोड़े को दूसरी तरफ पलट आगे की तरफ बढ़ा जाती हैं उसे रास्ते में ही रूद्र मिल जाता है वह अपने हाथ को रब करते हुए किटकिटाते हुए कहता है। बेवकूफ गुड़िया तुम इतना आगे क्यों आ गई तुम्हें पता है कितनी ठंड हो रही है चलो चलो वापस चलते हैं।
चाहत उसे देखते हुए फिर कुछ सोचते हुए कहती हैं। पर भाई मेरा गोलगप्पे उसने बहुत मासूमियत से कहा था
रूद्र का दिल सुकून से भर जाता है
वो उसकी तरह देखते हुए कहता है हां हां गुड़िया आफ्टर all मुझे हरा दिया पार्टी तो बनती है चलो अब वापस तो पहुंच जाए उसके बाद दोपहर को मैं तुम्हें गोलगप्पे खिलाने लेकर चलूंगा ।
चाहत मुस्कुराते हैं वह दोनों वहां से वापस आ जाते हैं।
रक्षित चलो अब अंदर चलते है
ईसके बाद हमें कंपनी भी जाना है ।
चाहत जल्दी से सर ना म हिलाते हुए कहती है
भाई आप लोग जाइए मैं थोड़ी देर बाद आऊंगी
साथ ले जाता है ।रुद्र चाहत को एक लम्हे के लिए भी नहीं छोड़ना चाहता था और रात में भी वह लोग करीब 4:00 बजे बजे उसके कमरे में आ गए थे और अभी भी रूद्र उसे बिल्कुल भी छोड़ना नहीं चाहता था। उसे लग रहा था कि अगर वह दूर जाएगा तो उसकी गुड़िया किसी चीज से परेशान न हो जाए और कुछ गलत न हो जाए
और रक्षित उसे अपने साथ जबरदस्ती घसीटते हुए ले जाता बक।
चाहत उस हवा में घोड़े को धीरे-धीरे चलते हुए दोनों हाथों को फैला लेती हैं । उसका चेहरा ऊपर की तरफ था ठंडी हवा खुले बाल एकदम सुकून उसे सुकून मिल रहा था। वह काफी देर तक इसी तरीके से उसे जगह पर घोड़े को चलाते रहती रहती हैं।
इस सब से बेखबर किसी की नजर उसके हर कदम पर थी।
अग्निहोत्री मेंशन,
अव्वेयान सोफे पर पैर के ऊपर पैर रखकर बैठ हुआ था उसके चेहरे पर रोब घमंड गुरुर बरकरार था वही रुक्मणी जी उसको ठीक सामने बैठी हुई थी उनके चेहरे पर गुस्सा बरकरार था , पूरे एक हफ्ते से वह कभी किसी नौकर को कम से निकल रहे थे तो कभी किसी बात पर जबरदस्ती का अपना गुस्सा निकल रही थी एक हफ्ते से चाहत घर पर नहीं थी जो हमेशा उनके थप्पड़
पर उनकी बदतमीजी सुनती रहती थी अपने होठों से कुछ भी नहीं कहती थीं उनका चेहरा फर्स्ट स्टेशन से भरा हुआ था वह 70 साल की थी पर उन्होंने अपने आप को इस तरीके से मेंटेन कर रखा था कि उनके उम्र 40 की लगती थी। वह काफी मॉडर्न कपड़े पहनती थी बहुत ही स्टाइलिश तरीके उसके सामने अकड़ कर बैठी हुई थी।
अव्वेयान ठीक सामने बैठा हुआ था पर उसे बिल्कुल फर्क ही नहीं पढ़ रहा था । अव्वेयान उनकी तरफ देखते हुए बहुत ही गहरी आवाज में कहता है। दादी अपने अभियुक्त और चेरी पर हाथ क्यों उठाया था? उसने बहुत ही शांत होकर पूछा था पर वह अपने आवाज को बहुत ज्यादा दबा रहा था।
रुक्मणी जी चौंकते हुए कहती हैं। तुम्हारी औलाद ही ऐसी है। उसकी हरकतें ही ऐसी थी और जब बच्चे गलती करते हैं तो बड़ों को ही उन्हें सजा देनी पड़ती हैं। अगर तुम्हें सवाल करना हो तो बाद में करना और इस तरीके से बार-बार उस लड़की के जाने के बाद मुझे कटघरे में खड़ा करना बंद करो, दादी हूं तुम्हारे समझी तुम,
अव्वेयान उनकी तरह बिना किसी एक्सप्रेशंस के देखते हुए कहता है । चाहत चाहत ने ऐसी क्या गलती कर दी थी जो पिछले 3 महीने से आपने उसका खाना पीना बंद कर दिया था । उसे बात-बात पर ताने देती थी तीन दिन में एक बार खाना देती थीं। अगर आपका मन चाहेगा और वह भी आप अपना झूठा खाना उसने ऐसी कौन सी गलती कर दी थी जिसकी सजा आप उसे दे रही थी।
रुक्मणी जी के चेहरे पर आए हुए एक्सप्रेशंस कुछ बदल से जाते हैं वह अव्वेयान की तरफ देखकर अपनी आवाज को थोड़ा नॉर्मल करते हुए कहती हैं ।उस लड़की पर मुझे पूरा यकीन था एक न एक दिन वह तुम्हारे मन जरूर भरेगी मैंने ऐसा कुछ भी नहीं करा है । झूठ बोल रही है। वह और तुम्हारे सामने कमजोरी का नाटक कर रही हैं। इसीलिए हॉस्पिटल में पड़े पड़े बिल बढ़ा रही है। एक बार मेरे सामने लेकर आओ फिर मैं बताती हूं कि मैं उसे रोज खाना देती थी कि नहीं देती थी। झूठ बोल रही है उसने सिर्फ और सिर्फ तुम पर अपने हुस्न का जादू चला दिया है इसीलिए तुम ज्यादा बोल रहे हो, ऐसा कुछ नहीं है मैंने यह बाल धूप में नहीं सफेद करें हैं। वह लड़की ही एहसान फरामोश थी , आए दिन कभी किसी गार्ड के साथ कभी किसी सर्वेंट के साथ तो किसी के साथ मुंह काला करती थी और अगर मैं उसकी सजा ,,
उन्होंने इतना ही कहा था कि अव्वेयान अपनी पूरी ताकत से टेबल पर लात मार अपनी उंगली उनकी तरफ पॉइंट करते हुए घुर्राते हुए कहता है । माइंड योर टांग मैसेज रुक्मणी अग्निहोत्री मैं अपनी बीवी के खिलाफ एक शब्द और नहीं सुनूंगा उसकी आवाज इतनी तेज थी कि वहां काम कर रहे हैं सर्वेंट तक काप जाते हैं।
वही रुक्मणी जी घबराहट से अपने सीने पर हाथ रख लेती उनकी तो धड़कन इतनी तेज हो गई थी जैसा अभी हार्ड ही फेल हो जाएगा ।।
वही सभी कोई छोड़ी आंखों से अव्वेयान की तरफ देख रहे थे उसने कभी भी उनसे ऊंचे आवाज में बात नहीं करी थी वह अपनी जगह से खड़ी होकर गुस्से से उसे कहती हैं। तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुम मुझ से ऊंची आवाज में बात करोगे ।
अव्वेयान अपना चेहरे पर हाथ रख लेता है उसकी नसें पूरी तरीके से उभर रही थी वह गुस्से से उन्हें घूरते हुए कहता है। अगर दादी आप जैसी होती हैं ।तो मैं रिश्ते का लिहाज करना तक भूल सकता हूं । और आपने तो मेरी ग़ैर मौजूदगी में मेरी बीवी के साथ इतने जुल्म करें तो सोचिए मैं आपके साथ क्या करूंगा रुक्मणी जी उसकी तरफ देखते हैं ।
और फिर कहती हैं। क्या मतलब है आप मुझे सजा दोगे किस बात की
सजा दोगे तुम भूलो मत की तुम्हारा बाप एक ना जायज औलाद है । और उसका गंदा खून तुम्हारे अंदर भी है वह तो मैं हूं जिसने तुम्हें पाल पोस कर आज भी अपने सर पर बैठा रखा है इस घर की इज्जत बना रखा है।
अव्वेयान उनकी तरफ देखता है और हल्का हंस कर कहता है मुझे आपके इन टुकड़ों की जरूरत नहीं मैं खुद में ही आग हूं और खुद सब कुछ बनाने वाला हूं और आपके रही बात आपको घमंड जिस चीज का है
उसे तो में चूर करके रख दूंगा गिव मी ऑन 2 मिनिट्स बोलते हुए वह अपना फोन निकलता है कि तभी उसे दरवाजे से एक रफ्तार आवाज सुनाई देती है क्या हो रहा है यहां पर अव्वेयान की मुठ्ठी मजबूत हो जाती हैं।।
Hello everyone to aap mujhse Kisi Ne comment kara tha ki awesome but yeh wali Chahat acchi nahin lagi to gais usne 7 sal ka drama jhela jab use Kisi Ne Bhi support nahin kara tha vah is tarah hi Thi hi nahin per jab koi bhi saat sal ka drama jhilen to kabhi bhi pahle jaisa ho hi nahin Sakta han vah normal Rahane ki koshish karte hain vaise log per Ho ekadam normal apni purani jindagi mein chaha kar bhi nahin Laut sakte Rahi baat Chahat ki to Chahat Ne do jindagi kaisi hai ek jismein Koi Khushi azadi sab uska pyar sab kuchh tha to vahi dusri taraf use sirf Dard taklif vah chij mujhe Jo usne kabhi sapne mein Bhi nahin soche the to vah kaise Badal sakti hai jo kuchh Bhi hua tha vah chhoti Thi tab hua tha per jab use sahare ki jarurat Thi tab uski jindagi Badal Gaye na hi Kisi Ne Sahara Diya Apne Tak Badal Gaye the to fir kaise vah itni jaldi Apne do bhaiyon ko milane ke bad recover ho sakti hai janti hun yah story hai aur story to ek din Mera to raat mein din kar deti bhale hi fictional Hai per kuchh chijen kabhi nahin badalte aur Chahat ka character hi ab aisa hai ki vah shant ho chuki hai per kuchh chijen Hain Jo nahin badlenge kyunki jab tak uske andar ka gussa nahin nikalega tab to kaise kar sakte hain …aur Main kisi ke kahane per apni story line to change nahin kar sakti to Jaise yah story Maine likhi hai main vaise hi likhungi



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